By Malay Ojha | Published: 10 August 2026 at 03:09 PM
नीट पेपर लीक और छात्रों के प्रदर्शन को लेकर संसद में चल रहा सियासी घमासान अब सीधे सरकार और विपक्ष के बीच टकराव में बदल गया है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सरकार की ओर से साफ किया कि छात्रों से जुड़े मुद्दों पर सदन में विस्तार से चर्चा होनी चाहिए और विपक्ष को अपनी बात रखने का पूरा मौका मिलेगा। दूसरी तरफ विपक्ष प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई, पेपर लीक और सरकार की जवाबदेही का मुद्दा उठाते हुए गृह मंत्री अमित शाह से सदन में जवाब मांग रहा है।
सरकार बोली- छात्रों के मुद्दे पर खुलकर चर्चा हो
केंद्र सरकार का कहना है कि छात्रों से जुड़े विषय बेहद गंभीर हैं और इन्हें सड़क के बजाय संसद में चर्चा के जरिए उठाया जाना चाहिए। किरेन रिजिजू ने विपक्ष से बार-बार अपील की कि वह सदन की कार्यवाही चलने दे और चर्चा में शामिल हो। सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि परीक्षा में गड़बड़ी और पेपर लीक जैसे मामलों पर कानून को मजबूत करने की जरूरत है।
विपक्ष की मांग- पहले पुलिस कार्रवाई पर जवाब
विपक्ष का रुख सरकार से अलग है। विपक्षी दलों ने 20 जुलाई को दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। कई विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया गया। इसी मुद्दे पर गृह मंत्री से जवाब देने की मांग सदन में उठी। राज्यसभा में भी विपक्ष ने इस मामले को तत्काल चर्चा के लिए उठाने की कोशिश की थी।
इस पूरे विवाद की शुरुआत नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ी और पेपर लीक के आरोपों से हुई। छात्रों और विपक्षी दलों ने परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा। इसके बाद प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई का मुद्दा भी आंदोलन का बड़ा हिस्सा बन गया। संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से ही विपक्ष इन दोनों मुद्दों को लेकर सरकार पर दबाव बनाता रहा है।
सरकार ने पेश किया परीक्षा व्यवस्था सुधारने वाला विधेयक
इस बीच सरकार ने सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों को रोकने के लिए संशोधन विधेयक भी लोकसभा में पेश किया। सरकार का कहना है कि इसका मकसद पेपर लीक और परीक्षा में होने वाली दूसरी गड़बड़ियों पर रोक लगाना तथा छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करना है। किरेन रिजिजू ने विपक्ष से अपील की कि वह नारेबाजी और हंगामे के बजाय इस विषय पर सदन में गंभीर चर्चा करे।
सदन में चर्चा हुई तो विपक्ष ने सरकार को घेरा
28 जुलाई को लोकसभा में परीक्षा व्यवस्था से जुड़े विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष ने नीट विवाद और छात्र आंदोलन का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने परीक्षा व्यवस्था, नीट से जुड़े विवादों और छात्रों की स्थिति को लेकर सरकार से कई सवाल पूछे। उन्होंने प्रदर्शनकारी छात्रों पर कार्रवाई का मुद्दा भी उठाया और गृह मंत्री से जवाब देने की मांग की।
राहुल गांधी के आरोप पर भी हुआ जोरदार हंगामा
छात्र आंदोलन पर चर्चा के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर बल प्रयोग को लेकर सरकार को घेरा। उनके बयान पर सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने आरोपों के लिए सबूत मांगे और सदन में तीखी बहस देखने को मिली। बाद में राहुल गांधी की कुछ विवादित टिप्पणियों को सदन की कार्यवाही से हटा दिया गया।
सरकार और विपक्ष के बीच असली टकराव यहीं
सरकार का तर्क है कि छात्रों के भविष्य से जुड़े विषय पर कानून बनाने और परीक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए संसद में बहस होनी चाहिए। वहीं विपक्ष का कहना है कि सिर्फ नया कानून लाने से सवाल खत्म नहीं होंगे। प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ क्या हुआ, पुलिस कार्रवाई के आदेश किस स्तर से दिए गए और नीट से जुड़ी गड़बड़ियों की जिम्मेदारी किसकी है, इन सवालों का जवाब भी सदन में मिलना चाहिए। यही अंतर दोनों पक्षों के बीच टकराव की सबसे बड़ी वजह बना हुआ है।
अयोध्या के चंदे का मुद्दा भी विपक्ष ने उठाया
संसद में छात्र आंदोलन और नीट विवाद के अलावा विपक्ष ने अयोध्या में राम मंदिर के चंदे से जुड़े कथित गड़बड़ी के आरोपों पर भी चर्चा की मांग उठाई थी। इस वजह से सरकार और विपक्ष के बीच यह साफ दिखाई दिया कि दोनों की प्राथमिकताएं अलग-अलग हैं। विपक्ष जहां छात्र आंदोलन के साथ दूसरे राजनीतिक मुद्दों को भी सदन में लाना चाहता है, वहीं सरकार परीक्षा सुधार और पेपर लीक रोकने से जुड़े विधायी काम को आगे बढ़ाने पर जोर देती रही।
अब नजर सरकार के जवाब और आगे की कार्रवाई पर
छात्र आंदोलन ने संसद के भीतर सरकार के सामने कई सवाल खड़े किए हैं। एक तरफ परीक्षा व्यवस्था में सुधार और पेपर लीक रोकने के लिए कड़े कानून की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है, तो दूसरी तरफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर जवाबदेही तय करने की मांग जारी है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार इन आरोपों का किस तरह जवाब देती है और परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए उठाए गए कदम छात्रों का भरोसा कितना वापस ला पाते हैं।
छात्रों का मुद्दा अब सिर्फ परीक्षा तक सीमित नहीं
दरअसल, यह विवाद अब केवल नीट पेपर लीक तक सीमित नहीं रह गया है। परीक्षा व्यवस्था में भरोसा, पेपर लीक के खिलाफ कार्रवाई, छात्रों के प्रदर्शन का अधिकार और पुलिस कार्रवाई की जवाबदेही जैसे कई सवाल एक साथ सामने आ चुके हैं। संसद में हुई बहस ने इस पूरे विवाद को और बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना दिया है। सरकार चर्चा के जरिए समाधान की बात कर रही है, जबकि विपक्ष लगातार जवाबदेही और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग कर रहा है। यही वजह है कि छात्र आंदोलन पर संसद की आगे की कार्रवाई पर पूरे देश की नजर बनी हुई है।
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