By Malay Ojha | Published: 10 August 2026 at 12:19 PM
झारखंड की राजधानी रांची में सोमवार को छात्रों का आंदोलन निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया। जेपीएससी और जेएसएससी की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग को लेकर पिछले 16 दिनों से धरने पर बैठे हजारों छात्र अब विधानसभा की ओर कूच कर चुके हैं। मार्च के दौरान छात्रों ने पहली बैरिकेडिंग पार कर ली और नई विधानसभा की तरफ बढ़ते रहे। प्रशासन ने विधानसभा के आसपास निषेधाज्ञा लागू कर रखी है, जबकि छात्र शांतिपूर्ण तरीके से विधानसभा तक पहुंचने की बात कह रहे हैं।
सुबह से ही रांची की सड़कों पर छात्रों की भीड़ बढ़ती गई। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से निकला छात्रों का कारवां जैसे-जैसे विधानसभा की तरफ बढ़ा, सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी होती गई। कई जगह बैरिकेड लगाए गए थे। छात्रों का दावा है कि रास्ते में कुछ युवाओं को रोका और हिरासत में लिया गया, जबकि पुलिस का कहना है कि छात्रों को रोकने की कोशिश नहीं की जा रही है। इसी बीच प्रदर्शनकारी पहली बैरिकेडिंग को पार कर आगे बढ़ गए।
एंबुलेंस में पहुंचे देवेंद्र महतो
इस आंदोलन का एक बड़ा चेहरा बने देवेंद्र नाथ महतो भी विधानसभा मार्च में शामिल हुए। लगातार भूख हड़ताल पर बैठे महतो की तबीयत खराब होने के बावजूद उन्होंने आंदोलन से पीछे हटने से इनकार किया। सोमवार को वह एंबुलेंस में सवार होकर मार्च में पहुंचे। उनकी मौजूदगी ने आंदोलनकारियों के बीच उत्साह बढ़ाया। इससे पहले भी महतो साफ कर चुके हैं कि जब तक छात्रों की प्रमुख मांगों पर ठोस फैसला नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।
विधानसभा के आसपास कड़ी सुरक्षा
छात्रों के विधानसभा घेराव के ऐलान के बाद रांची प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। विधानसभा परिसर के आसपास निषेधाज्ञा लागू की गई है और कई स्तर पर बैरिकेडिंग की गई है। सुरक्षा के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। कुछ स्थानों पर कंटीले तारों वाली बैरिकेडिंग भी की गई है। प्रशासन की कोशिश है कि प्रदर्शनकारी विधानसभा के प्रतिबंधित क्षेत्र तक न पहुंचें और किसी तरह की अप्रिय स्थिति पैदा न हो।
छात्रों का दावा- रास्ते में रोके जा रहे साथी
प्रदर्शन में शामिल छात्रों का आरोप है कि रांची पहुंचने वाले युवाओं को कई जगहों पर रोका जा रहा है। जिला सीमाओं, प्रमुख सड़कों और दूसरे रास्तों पर बसों तथा निजी वाहनों की जांच किए जाने की बात भी सामने आई है। छात्रों का कहना है कि अगर आंदोलन शांतिपूर्ण है तो फिर युवाओं को रांची पहुंचने से क्यों रोका जा रहा है। हालांकि प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अलग तर्क दिया जा रहा है और पुलिस ने छात्रों से शांति बनाए रखने की अपील की है।
‘हमें शांतिपूर्वक आंदोलन करना है’
प्रदर्शन में शामिल एक छात्र ने कहा कि सरकार को युवाओं की बात सुननी चाहिए और उनकी मांगों का जवाब देना चाहिए। छात्रों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता उनकी सबसे बड़ी मांग है। उनका आरोप है कि बार-बार परीक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं और इसका सीधा असर उन युवाओं पर पड़ रहा है जो वर्षों की तैयारी के बाद सरकारी नौकरी की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
16 दिन से स्टेडियम में जारी है आंदोलन
यह आंदोलन अचानक शुरू नहीं हुआ है। छात्र पिछले 16 दिनों से रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में डटे हुए हैं। भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी, प्रश्नपत्र से जुड़े विवाद और परीक्षा व्यवस्था में भरोसे का संकट आंदोलन की मुख्य वजहों में शामिल हैं। 10 अगस्त को विधानसभा घेराव का फैसला छात्रों ने सरकार के साथ बातचीत के बावजूद लिया। रविवार तक सरकार और आंदोलनकारियों के बीच कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन कुछ अहम मांगों पर सहमति नहीं बन सकी।
जेपीएससी के तीन सदस्यों का इस्तीफा
आंदोलन के बीच झारखंड लोक सेवा आयोग के तीन सदस्यों के इस्तीफे ने मामले को और बड़ा बना दिया है। रिपोर्टों के मुताबिक अनीमा हांसदा, जमाल अहमद और अजिता भट्टाचार्य ने इस्तीफा दिया है। इसके साथ ही जेपीएससी की 14वीं प्रारंभिक परीक्षा को रद्द किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। छात्रों की कई मांगों पर सरकार की तरफ से कदम उठाए जाने के बावजूद आंदोलन खत्म नहीं हुआ है।
फिर भी क्यों नहीं थम रहा छात्रों का आंदोलन?
छात्रों का कहना है कि केवल परीक्षा रद्द करने या कुछ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई से समस्या खत्म नहीं होगी। उनकी मांग है कि भर्ती परीक्षाओं की पूरी प्रक्रिया ऐसी हो, जिसमें किसी भी स्तर पर गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे। छात्र कथित परीक्षा धांधली की निष्पक्ष और व्यापक जांच की मांग कर रहे हैं। यही मुद्दा सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत में सबसे बड़ी अड़चन बनकर सामने आया है।
सरकार के सामने अब बड़ी चुनौती
एक तरफ सरकार का कहना है कि छात्रों की बड़ी संख्या में मांगों पर कदम उठाए गए हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रदर्शनकारी अभी पीछे हटने के मूड में नहीं हैं। रविवार को हुई बातचीत भी पूरी तरह सफल नहीं हो सकी। सरकार की ओर से आंदोलन खत्म करने की अपील की गई, लेकिन छात्रों ने विधानसभा मार्च का फैसला बरकरार रखा। अब सोमवार का दिन इस आंदोलन के लिए सबसे अहम माना जा रहा है।
कई जिलों से रांची पहुंचे छात्र
विधानसभा मार्च में शामिल होने के लिए झारखंड के अलग-अलग जिलों से छात्र रांची पहुंचे हैं। कई छात्र ट्रेन, बस और निजी वाहनों से राजधानी आए। आंदोलनकारियों का दावा है कि उनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। यही वजह है कि प्रशासन ने शहर के प्रमुख चौराहों और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी है। छात्रों की भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती आंदोलन को शांतिपूर्ण बनाए रखना है।
अब नजर विधानसभा की तरफ
रांची में इस समय पूरा ध्यान छात्रों के मार्च पर टिका हुआ है। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से शुरू हुआ आंदोलन अब विधानसभा की ओर बढ़ चुका है। पहली बैरिकेडिंग पार करने के बाद छात्रों का अगला कदम क्या होगा और प्रशासन उन्हें आगे बढ़ने देता है या नहीं, इस पर सभी की नजर है। छात्र लगातार यही कह रहे हैं कि उनका आंदोलन रोजगार और भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता के लिए है और वे अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं। ऐसे में 10 अगस्त का दिन झारखंड के छात्र आंदोलन की दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है।
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