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पीयूष मिश्रा ने नसीरुद्दीन शाह को दिया करारा जवाब, बोले- ‘अब मुझे आपसे डरने का मन नहीं करता’, झारखंड छात्र आंदोलन में गाया ‘आरंभ है प्रचंड’

By Malay Ojha | Published: 10 August 2026 at 11:35 AM

रांची में झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन में रविवार को अभिनेता और गायक पीयूष मिश्रा पहुंचे। छात्रों के बीच उन्होंने गीत गाकर उनका हौसला बढ़ाया, लेकिन इसके बाद उनका एक बयान सबसे ज्यादा चर्चा में आ गया। पीयूष मिश्रा ने पुराने छात्र आंदोलन को लेकर दिए गए नसीरुद्दीन शाह के बयान का जिक्र करते हुए उनसे सीधा सवाल किया कि आखिर इस समय वे लोग कौन हैं, जिनके मुंह में हड्डियां हैं और जो बोल नहीं रहे हैं।

छात्रों के बीच पहुंचे पीयूष मिश्रा
रांची में भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार चर्चा में बना हुआ है। प्रदर्शनकारी छात्र परीक्षाओं और भर्तियों में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। इसी आंदोलन के बीच पीयूष मिश्रा छात्रों के बीच पहुंचे। उन्होंने न सिर्फ प्रदर्शन कर रहे युवाओं से बातचीत की, बल्कि गीतों के जरिए उनका मनोबल भी बढ़ाया।

पीयूष मिश्रा ने ‘आरंभ है प्रचंड’ और ‘इक बगल में चांद होगा’ जैसे अपने लोकप्रिय गीत गाकर छात्रों का हौसला बढ़ाया। उनके पहुंचने से प्रदर्शन स्थल पर मौजूद छात्रों में उत्साह नजर आया। हालांकि, छात्रों के बीच उनकी मौजूदगी से ज्यादा चर्चा उस बयान की शुरू हो गई, जिसमें उन्होंने नसीरुद्दीन शाह के पुराने बयान को सामने रखते हुए दिल्ली और रांची के छात्र आंदोलनों के तरीके में फर्क बताया।

‘सरकार का काम सरकार चलाना है’
पीयूष मिश्रा ने छात्रों से बातचीत के दौरान आंदोलन को शांतिपूर्ण बनाए रखने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि सरकार का काम सरकार चलाना है और सरकार अपने हर कदम के बारे में सोच-समझकर फैसला लेती है। उनके मुताबिक छात्रों को भी अपनी बात मजबूती से रखते हुए शांति बनाए रखनी चाहिए।

उन्होंने प्रदर्शनकारियों को गाली-गलौज से बचने की सलाह दी। पीयूष ने कहा कि वह इस मामले में पुराने विचारों वाले व्यक्ति हैं और उन्हें गाली-गलौज की भाषा पसंद नहीं है। उन्होंने अपने दो बेटों का जिक्र करते हुए कहा कि वे नई पीढ़ी से हैं और राजनीति को लेकर भी जागरूक हैं।

नसीरुद्दीन शाह के बयान का जिक्र
इसके बाद पीयूष मिश्रा ने नसीरुद्दीन शाह के उस बयान को याद किया, जो दिल्ली में हुए छात्र आंदोलन के दौरान काफी चर्चा में आया था। नसीरुद्दीन शाह ने फिल्म जगत की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा था कि जिन लोगों के मुंह में हड्डियां होती हैं, वे बोल नहीं सकते। उनका इशारा उन फिल्मी सितारों की तरफ था, जो अपने हित के हिसाब से किसी मुद्दे पर अपनी आवाज उठाते हैं।

पीयूष मिश्रा ने इसी बात को आधार बनाकर रांची के आंदोलन और दिल्ली में हुए आंदोलन के बीच अंतर की बात रखी। उन्होंने कहा कि वह नसीरुद्दीन शाह की बहुत इज्जत करते हैं, लेकिन अब इस मुद्दे पर उनसे सवाल करने में उन्हें डर नहीं लगता।

‘इस वक्त कौन हैं वो लोग?’
पीयूष मिश्रा ने नसीरुद्दीन शाह को संबोधित करते हुए कहा कि वह पूरी इज्जत के साथ उनसे एक सवाल पूछना चाहते हैं। उनका सवाल था कि इस समय आखिर वे कौन लोग हैं, जिनके मुंह में हड्डियां हैं और जो चुप बैठे हैं।

उनकी इस टिप्पणी को नसीरुद्दीन शाह के पुराने बयान के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है। पीयूष का कहना था कि अगर किसी आंदोलन में फिल्मी सितारों की मौजूदगी या गैरमौजूदगी को लेकर सवाल उठाया जाता है, तो अलग-अलग आंदोलनों के हालात और उनके मुद्दों को भी देखना चाहिए।

‘यहां छात्र दाल-चावल खाकर आंदोलन कर रहे हैं’
पीयूष मिश्रा ने रांची के छात्र आंदोलन की तुलना दिल्ली और मुंबई में हुए हालिया प्रदर्शनों से करते हुए कहा कि दोनों जगहों के आंदोलन की परिस्थितियों में काफी अंतर है। उन्होंने रांची के छात्रों की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि यहां आंदोलन करने वाले छात्र पिज्जा या बर्गर नहीं खा रहे हैं, बल्कि दाल-चावल खाकर अपने आंदोलन को आगे बढ़ा रहे हैं।

उनकी इस टिप्पणी का मकसद आंदोलन में शामिल छात्रों की परिस्थितियों और उनके संघर्ष को रेखांकित करना था। पीयूष ने कहा कि वह यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि अलग-अलग जगहों पर होने वाले छात्र आंदोलनों को एक ही नजर से क्यों देखा जाए।

‘क्या इसलिए चुप थे कि पिज्जा-बर्गर खाना था?’
पीयूष मिश्रा ने आगे सवाल उठाया कि क्या कुछ लोग इसलिए चुप थे क्योंकि उन्हें पिज्जा और बर्गर खाने की इच्छा थी या फिर इसलिए कि वे किसी खास भीड़ का हिस्सा बनकर आंदोलन में शामिल हुए थे।

हालांकि, उनके इस बयान का सीधा निशाना किस व्यक्ति या समूह पर था, यह उन्होंने स्पष्ट रूप से नहीं बताया। लेकिन उनकी टिप्पणी को नसीरुद्दीन शाह की उस बात से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने फिल्मी सितारों की चुप्पी पर सवाल उठाया था। पीयूष के बयान के बाद अब दोनों अभिनेताओं के पुराने मतभेद और छात्र आंदोलनों को लेकर उनके अलग-अलग रुख की चर्चा तेज हो गई है।

‘मुझे आपसे डरने का मन नहीं करता’
पीयूष मिश्रा ने अपनी बात खत्म करते हुए नसीरुद्दीन शाह के प्रति सम्मान भी जताया। उन्होंने कहा कि वह नसीर साहब की बहुत इज्जत करते हैं और उनकी बात पूरी इज्जत के साथ कह रहे हैं। लेकिन इसके साथ ही उन्होंने साफ कर दिया कि अब वह उनसे डरना नहीं चाहते।

पीयूष की इस टिप्पणी ने पूरे मामले को और दिलचस्प बना दिया है। एक तरफ वह रांची के छात्रों के बीच खड़े होकर उनके आंदोलन को समर्थन देते नजर आए, तो दूसरी तरफ उन्होंने फिल्म जगत के अपने वरिष्ठ साथी के पुराने बयान पर खुलकर सवाल खड़ा कर दिया।

रांची में लगातार जारी है छात्रों का आंदोलन
रांची में जेपीएससी और जेएसएससी से जुड़ी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन कई दिनों से जारी है। आंदोलनकारी छात्र अपनी मांगों को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। रविवार को विधानसभा की ओर प्रस्तावित मार्च को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी की थी और विधानसभा के आसपास निषेधात्मक आदेश लागू किए गए थे।

इस बीच सरकार और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच बातचीत भी हुई है। रिपोर्टों के मुताबिक, बातचीत में कई मांगों को लेकर सहमति बनने के संकेत मिले हैं और आंदोलन समाप्त होने की संभावना भी जताई गई है। हालांकि, छात्रों का आंदोलन और उनकी मांगें फिलहाल पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं।

दिल्ली के आंदोलन के बाद रांची पर नजर
देश में छात्र आंदोलनों को लेकर पिछले कुछ समय में काफी बहस हुई है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान भी फिल्म जगत के कई लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया दी थी। पीयूष मिश्रा ने भी उस समय छात्रों के समर्थन में आवाज उठाई थी और प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा पर चिंता जताई थी।

अब रांची पहुंचकर छात्रों के बीच खड़े होने और नसीरुद्दीन शाह के पुराने बयान पर सवाल उठाने के बाद पीयूष मिश्रा एक बार फिर चर्चा में हैं। उनके बयान ने छात्र आंदोलन, फिल्मी सितारों की भूमिका और अलग-अलग आंदोलनों के समर्थन को लेकर नई बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में नसीरुद्दीन शाह की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया आती है या नहीं, इस पर भी लोगों की नजर रहेगी।

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पीयूष मिश्रा ने नसीरुद्दीन शाह को दिया करारा जवाब, बोले- ‘अब मुझे आपसे डरने का मन नहीं करता’, झारखंड छात्र आंदोलन में गाया ‘आरंभ है प्रचंड’

By Malay Ojha | Published: 10 August 2026 at 11:35 AM

रांची में झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन में रविवार को अभिनेता और गायक पीयूष मिश्रा पहुंचे। छात्रों के बीच उन्होंने गीत गाकर उनका हौसला बढ़ाया, लेकिन इसके बाद उनका एक बयान सबसे ज्यादा चर्चा में आ गया। पीयूष मिश्रा ने पुराने छात्र आंदोलन को लेकर दिए गए नसीरुद्दीन शाह के बयान का जिक्र करते हुए उनसे सीधा सवाल किया कि आखिर इस समय वे लोग कौन हैं, जिनके मुंह में हड्डियां हैं और जो बोल नहीं रहे हैं।

छात्रों के बीच पहुंचे पीयूष मिश्रा
रांची में भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार चर्चा में बना हुआ है। प्रदर्शनकारी छात्र परीक्षाओं और भर्तियों में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। इसी आंदोलन के बीच पीयूष मिश्रा छात्रों के बीच पहुंचे। उन्होंने न सिर्फ प्रदर्शन कर रहे युवाओं से बातचीत की, बल्कि गीतों के जरिए उनका मनोबल भी बढ़ाया।

पीयूष मिश्रा ने ‘आरंभ है प्रचंड’ और ‘इक बगल में चांद होगा’ जैसे अपने लोकप्रिय गीत गाकर छात्रों का हौसला बढ़ाया। उनके पहुंचने से प्रदर्शन स्थल पर मौजूद छात्रों में उत्साह नजर आया। हालांकि, छात्रों के बीच उनकी मौजूदगी से ज्यादा चर्चा उस बयान की शुरू हो गई, जिसमें उन्होंने नसीरुद्दीन शाह के पुराने बयान को सामने रखते हुए दिल्ली और रांची के छात्र आंदोलनों के तरीके में फर्क बताया।

‘सरकार का काम सरकार चलाना है’
पीयूष मिश्रा ने छात्रों से बातचीत के दौरान आंदोलन को शांतिपूर्ण बनाए रखने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि सरकार का काम सरकार चलाना है और सरकार अपने हर कदम के बारे में सोच-समझकर फैसला लेती है। उनके मुताबिक छात्रों को भी अपनी बात मजबूती से रखते हुए शांति बनाए रखनी चाहिए।

उन्होंने प्रदर्शनकारियों को गाली-गलौज से बचने की सलाह दी। पीयूष ने कहा कि वह इस मामले में पुराने विचारों वाले व्यक्ति हैं और उन्हें गाली-गलौज की भाषा पसंद नहीं है। उन्होंने अपने दो बेटों का जिक्र करते हुए कहा कि वे नई पीढ़ी से हैं और राजनीति को लेकर भी जागरूक हैं।

नसीरुद्दीन शाह के बयान का जिक्र
इसके बाद पीयूष मिश्रा ने नसीरुद्दीन शाह के उस बयान को याद किया, जो दिल्ली में हुए छात्र आंदोलन के दौरान काफी चर्चा में आया था। नसीरुद्दीन शाह ने फिल्म जगत की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा था कि जिन लोगों के मुंह में हड्डियां होती हैं, वे बोल नहीं सकते। उनका इशारा उन फिल्मी सितारों की तरफ था, जो अपने हित के हिसाब से किसी मुद्दे पर अपनी आवाज उठाते हैं।

पीयूष मिश्रा ने इसी बात को आधार बनाकर रांची के आंदोलन और दिल्ली में हुए आंदोलन के बीच अंतर की बात रखी। उन्होंने कहा कि वह नसीरुद्दीन शाह की बहुत इज्जत करते हैं, लेकिन अब इस मुद्दे पर उनसे सवाल करने में उन्हें डर नहीं लगता।

‘इस वक्त कौन हैं वो लोग?’
पीयूष मिश्रा ने नसीरुद्दीन शाह को संबोधित करते हुए कहा कि वह पूरी इज्जत के साथ उनसे एक सवाल पूछना चाहते हैं। उनका सवाल था कि इस समय आखिर वे कौन लोग हैं, जिनके मुंह में हड्डियां हैं और जो चुप बैठे हैं।

उनकी इस टिप्पणी को नसीरुद्दीन शाह के पुराने बयान के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है। पीयूष का कहना था कि अगर किसी आंदोलन में फिल्मी सितारों की मौजूदगी या गैरमौजूदगी को लेकर सवाल उठाया जाता है, तो अलग-अलग आंदोलनों के हालात और उनके मुद्दों को भी देखना चाहिए।

‘यहां छात्र दाल-चावल खाकर आंदोलन कर रहे हैं’
पीयूष मिश्रा ने रांची के छात्र आंदोलन की तुलना दिल्ली और मुंबई में हुए हालिया प्रदर्शनों से करते हुए कहा कि दोनों जगहों के आंदोलन की परिस्थितियों में काफी अंतर है। उन्होंने रांची के छात्रों की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि यहां आंदोलन करने वाले छात्र पिज्जा या बर्गर नहीं खा रहे हैं, बल्कि दाल-चावल खाकर अपने आंदोलन को आगे बढ़ा रहे हैं।

उनकी इस टिप्पणी का मकसद आंदोलन में शामिल छात्रों की परिस्थितियों और उनके संघर्ष को रेखांकित करना था। पीयूष ने कहा कि वह यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि अलग-अलग जगहों पर होने वाले छात्र आंदोलनों को एक ही नजर से क्यों देखा जाए।

‘क्या इसलिए चुप थे कि पिज्जा-बर्गर खाना था?’
पीयूष मिश्रा ने आगे सवाल उठाया कि क्या कुछ लोग इसलिए चुप थे क्योंकि उन्हें पिज्जा और बर्गर खाने की इच्छा थी या फिर इसलिए कि वे किसी खास भीड़ का हिस्सा बनकर आंदोलन में शामिल हुए थे।

हालांकि, उनके इस बयान का सीधा निशाना किस व्यक्ति या समूह पर था, यह उन्होंने स्पष्ट रूप से नहीं बताया। लेकिन उनकी टिप्पणी को नसीरुद्दीन शाह की उस बात से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने फिल्मी सितारों की चुप्पी पर सवाल उठाया था। पीयूष के बयान के बाद अब दोनों अभिनेताओं के पुराने मतभेद और छात्र आंदोलनों को लेकर उनके अलग-अलग रुख की चर्चा तेज हो गई है।

‘मुझे आपसे डरने का मन नहीं करता’
पीयूष मिश्रा ने अपनी बात खत्म करते हुए नसीरुद्दीन शाह के प्रति सम्मान भी जताया। उन्होंने कहा कि वह नसीर साहब की बहुत इज्जत करते हैं और उनकी बात पूरी इज्जत के साथ कह रहे हैं। लेकिन इसके साथ ही उन्होंने साफ कर दिया कि अब वह उनसे डरना नहीं चाहते।

पीयूष की इस टिप्पणी ने पूरे मामले को और दिलचस्प बना दिया है। एक तरफ वह रांची के छात्रों के बीच खड़े होकर उनके आंदोलन को समर्थन देते नजर आए, तो दूसरी तरफ उन्होंने फिल्म जगत के अपने वरिष्ठ साथी के पुराने बयान पर खुलकर सवाल खड़ा कर दिया।

रांची में लगातार जारी है छात्रों का आंदोलन
रांची में जेपीएससी और जेएसएससी से जुड़ी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन कई दिनों से जारी है। आंदोलनकारी छात्र अपनी मांगों को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। रविवार को विधानसभा की ओर प्रस्तावित मार्च को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी की थी और विधानसभा के आसपास निषेधात्मक आदेश लागू किए गए थे।

इस बीच सरकार और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच बातचीत भी हुई है। रिपोर्टों के मुताबिक, बातचीत में कई मांगों को लेकर सहमति बनने के संकेत मिले हैं और आंदोलन समाप्त होने की संभावना भी जताई गई है। हालांकि, छात्रों का आंदोलन और उनकी मांगें फिलहाल पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं।

दिल्ली के आंदोलन के बाद रांची पर नजर
देश में छात्र आंदोलनों को लेकर पिछले कुछ समय में काफी बहस हुई है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान भी फिल्म जगत के कई लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया दी थी। पीयूष मिश्रा ने भी उस समय छात्रों के समर्थन में आवाज उठाई थी और प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा पर चिंता जताई थी।

अब रांची पहुंचकर छात्रों के बीच खड़े होने और नसीरुद्दीन शाह के पुराने बयान पर सवाल उठाने के बाद पीयूष मिश्रा एक बार फिर चर्चा में हैं। उनके बयान ने छात्र आंदोलन, फिल्मी सितारों की भूमिका और अलग-अलग आंदोलनों के समर्थन को लेकर नई बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में नसीरुद्दीन शाह की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया आती है या नहीं, इस पर भी लोगों की नजर रहेगी।

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