By Malay Ojha | Published: 12 August 2026 at 11:23 PM
झारखंड लोक सेवा आयोग की भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस पूरे खेल की परतें खुलती जा रही हैं। मामले में गिरफ्तार टीडीपीएल के पूर्व मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी से पूछताछ में जांच एजेंसी को अभ्यर्थियों से पैसे लेने, बिचौलियों के जरिए संपर्क कराने और साक्षात्कार में कथित तौर पर नंबर बढ़वाने के नेटवर्क से जुड़ी अहम जानकारी मिलने की बात सामने आई है। पूछताछ में सामने आए कथित रेट के मुताबिक, एक अभ्यर्थी से शुरुआती परीक्षा के लिए लाखों रुपये से लेकर अंतिम चयन तक 60-70 लाख रुपये तक लिए जाने की बात कही गई है।
अभय तिवारी के कथित बयान के मुताबिक, 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा में प्रारंभिक परीक्षा के स्तर पर सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों से करीब 5 लाख रुपये लिए जाने की व्यवस्था थी। वहीं अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए यह रकम करीब 2 से 3 लाख रुपये बताई गई है। जांच में सामने आए दावे के मुताबिक, मामला सिर्फ प्रारंभिक परीक्षा तक सीमित नहीं था। अंतिम चयन तक पहुंचने के दौरान रकम कई गुना बढ़ जाती थी और प्रति अभ्यर्थी यह राशि 60 से 70 लाख रुपये तक पहुंचने की बात कही गई है।
साक्षात्कार में नंबर बढ़ाने का भी आरोप
पूछताछ में सबसे गंभीर बात साक्षात्कार से जुड़ी सामने आई है। अभय तिवारी के बयान के अनुसार, अभ्यर्थियों को साक्षात्कार में फायदा पहुंचाने के लिए अलग से रकम तय की जाती थी। इसके लिए प्रति अभ्यर्थी करीब 15 लाख रुपये लिए जाने का दावा किया गया है। आरोप है कि बिचौलियों के जरिए अभ्यर्थियों की जानकारी संबंधित लोगों तक पहुंचाई जाती और उसके बाद साक्षात्कार में अधिक अंक दिलाने की कथित व्यवस्था की जाती थी। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगी।
एजेंट से लेकर आयोग तक पहुंचता था संपर्क
सीआईडी की पूछताछ में सामने आए कथित नेटवर्क की कड़ी भी काफी अहम बताई जा रही है। अभय तिवारी के अनुसार, अभ्यर्थी सीधे उसके संपर्क में नहीं आते थे। उन्हें एजेंट या बिचौलियों के माध्यम से इस नेटवर्क तक पहुंचाया जाता था। उसके बयान में आदित्य पांडे का नाम सामने आने की बात कही गई है। दावा है कि अभ्यर्थियों को आगे पहुंचाने के बाद आयोग से जुड़े लोगों तक संपर्क साधा जाता था।
कई नामों का जिक्र, जांच में होगी पुष्टि
अभय तिवारी के कथित बयान में रामवीर सिंह, डॉ. अजीता भट्टाचार्य, डॉ. जमाल अहमद, डॉ. अनीमा हसदा और एल. खियांग्ते के नामों का भी जिक्र होने की बात सामने आई है। आरोप है कि कुछ अभ्यर्थियों के साक्षात्कार में मदद पहुंचाने के लिए संपर्क किया गया था। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि पूछताछ में किसी व्यक्ति का नाम सामने आना अपने आप में अपराध साबित नहीं करता। संबंधित लोगों की भूमिका जांच और साक्ष्यों के आधार पर ही तय होगी।
तीन सरकारी अधिकारियों के नाम भी सामने आए
अभय तिवारी के बयान में पुलिस अधीक्षक रोबिन कुमार, पुलिस उपाधीक्षक शैलेश सिंह और डिप्टी जेलर राजेश कुमार रजक के नाम लिए जाने की बात भी सामने आई है। उसके मुताबिक, इन अभ्यर्थियों के लिए कोडरमा के लालू यादव नामक व्यक्ति ने कथित तौर पर एजेंट की भूमिका निभाई। दावा है कि लालू यादव अभ्यर्थियों को अभय तिवारी तक लेकर आया और इसके बाद साक्षात्कार की कथित सेटिंग के लिए आगे संपर्क किया गया।
अभ्यर्थी से अंतिम चयन तक ऐसे चलता था कथित खेल
जांच में सामने आए दावों को अगर पूरे क्रम में समझें तो कथित नेटवर्क की तस्वीर कुछ इस तरह बनती है। पहले अभ्यर्थियों की तलाश की जाती थी। इसके बाद उन्हें एजेंट या बिचौलिये के जरिए नेटवर्क से जोड़ा जाता था। फिर परीक्षा के अलग-अलग चरणों के लिए रकम तय होने की बात सामने आई है। साक्षात्कार के स्तर पर कथित तौर पर अलग रकम ली जाती थी और अंतिम चयन तक पहुंचने पर कुल रकम 60 से 70 लाख रुपये तक पहुंचने का दावा किया गया है।
टीडीपीएल की भूमिका पर भी उठे सवाल
इस मामले में टीडीपीएल की भूमिका पहले से जांच के दायरे में है। सीआईडी ने कंपनी से जुड़े कई लोगों से पूछताछ की है और जांच में परीक्षा संचालन तथा आंकड़ों से जुड़े पहलुओं को भी देखा जा रहा है। अभय तिवारी इसी कंपनी से जुड़ा रहा था और उसकी गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी उसके संपर्कों, लेन-देन और अभ्यर्थियों से जुड़े नेटवर्क की पड़ताल कर रही है। रिपोर्टों के मुताबिक, उससे जुड़े कथित आर्थिक लेन-देन की कड़ियों की भी जांच की जा रही है।
कई परीक्षाओं की जांच तक पहुंचा मामला
मामला अब सिर्फ एक परीक्षा के विवाद तक सीमित नहीं दिखाई दे रहा है। जांच एजेंसी परीक्षा संचालन से जुड़े लोगों की भूमिका, अलग-अलग भर्ती परीक्षाओं में संभावित गड़बड़ी और अभ्यर्थियों से जुड़े संपर्कों की जांच कर रही है। अभय तिवारी की गिरफ्तारी को इसी व्यापक जांच की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। इससे पहले भी सीआईडी ने आयोग और परीक्षा संचालन से जुड़े ठिकानों पर कार्रवाई करते हुए कई लोगों को हिरासत में लिया था।
14वीं परीक्षा पर भी पड़ा विवाद का असर
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर बढ़ते विवाद के बीच राज्य सरकार ने 14वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा को रद्द करने की घोषणा की है और टीडीपीएल से जुड़ी परीक्षाओं की जांच कराने की बात कही गई है। ऐसे में 11वीं से 13वीं परीक्षा को लेकर पूछताछ में सामने आ रहे कथित रेट और नेटवर्क की जानकारी जांच के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हो गई है।
अब जांच का सबसे बड़ा सवाल क्या है?
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पैसे लेकर परीक्षा में फायदा पहुंचाने का यह कथित नेटवर्क वास्तव में कितने अभ्यर्थियों तक पहुंचा था और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि कथित तौर पर रकम कहां से आई, किसके माध्यम से पहुंची और परीक्षा के किस चरण में किस स्तर पर इसका इस्तेमाल किया गया। अभय तिवारी के बयान के आधार पर सामने आई जानकारी की अब दस्तावेजों, लेन-देन और अन्य आरोपियों से पूछताछ के जरिए पुष्टि किए जाने की कोशिश होगी।
सिर्फ बयान से नहीं, सबूतों से खुलेगा पूरा राज
अभय तिवारी की पूछताछ ने भर्ती परीक्षा में कथित पैसे के खेल की एक तस्वीर जरूर सामने रखी है, लेकिन जांच की असली दिशा अब साक्ष्यों पर निर्भर करेगी। एजेंटों, अभ्यर्थियों, परीक्षा संचालन से जुड़े लोगों और आयोग से जुड़े संदिग्ध संपर्कों की कड़ियां अगर आपस में जुड़ती हैं, तो यह मामला झारखंड की भर्ती व्यवस्था में अब तक सामने आए सबसे बड़े विवादों में से एक बन सकता है। फिलहाल 60 से 70 लाख रुपये तक के कथित रेट, साक्षात्कार में नंबर बढ़ाने के आरोप और बिचौलियों के नेटवर्क की जांच पर सबकी नजर है।
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