By Malay Ojha | Published: 13 August 2026 at 12:32 PM
उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की सभा के बाद मंच पर हुए कथित ‘शुद्धिकरण’ का मामला संसद के आखिरी दिन राज्यसभा तक पहुंच गया। खरगे ने सदन में आरोप लगाया कि उनकी सभा के बाद मंच पर हवन कर उसे शुद्ध किया गया। इस पर सदन के नेता जगत प्रकाश नड्डा ने इसे गंभीर और दुखद मामला बताते हुए कहा कि भाजपा ऐसे किसी कृत्य का समर्थन नहीं करती और मामले की जांच कराई जाएगी।
राज्यसभा में गुरुवार को कांग्रेस अध्यक्ष और विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुई घटना का जिक्र करते हुए सत्ता पक्ष पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि उन्होंने वहां एक बड़ी जनसभा को संबोधित किया था। उनके मुताबिक भाषण के दौरान उन्होंने किसी धर्म या समुदाय का नाम नहीं लिया था, बल्कि सरकार से जुड़े मुद्दों और आम लोगों की समस्याओं को सामने रखा था।
‘मेरे भाषण के बाद मंच को शुद्ध किया गया’
खरगे ने कहा कि उनके भाषण के बाद उसी मंच पर हवन कराया गया और कथित तौर पर उसका ‘शुद्धिकरण’ किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या लोकतंत्र में विपक्ष के नेता के साथ इस तरह का व्यवहार उचित है। उनका कहना था कि जब रामलीला मैदान में सभी राजनीतिक दलों की सभाएं होती हैं, तब केवल उनके कार्यक्रम के बाद इस तरह का आयोजन क्यों किया गया।
नड्डा ने कहा- भाजपा ऐसे काम का समर्थन नहीं करती
खरगे के आरोपों के बाद सदन के नेता जगत प्रकाश नड्डा ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि अगर ऐसी घटना हुई है तो यह गंभीर और दुखद विषय है। नड्डा ने साफ किया कि भाजपा इस तरह के किसी कृत्य का समर्थन नहीं करती। उन्होंने कहा कि खरगे ने सदन में इस मामले को उठाया है, इसलिए इसकी जांच कराई जाएगी और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो कार्रवाई भी होगी।
‘मैंने खुद को कभी पीड़ित नहीं माना’
अपने बयान के दौरान खरगे ने अपने सामाजिक पृष्ठभूमि का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी खुद को पीड़ित बताकर सहानुभूति हासिल करने की कोशिश नहीं की। उनका कहना था कि उन्होंने दलित होने के नाम पर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश नहीं की और न ही वह इस मामले को केवल राजनीतिक विवाद बनाना चाहते हैं।
लोकतंत्र और संविधान का सवाल उठाया
खरगे ने कहा कि वह राज्यसभा में विपक्ष के नेता हैं और ऐसे में उनके साथ होने वाला व्यवहार केवल किसी एक व्यक्ति से जुड़ा मामला नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर किसी जनसभा के बाद मंच को इस सोच के साथ ‘शुद्ध’ किया जाता है कि वहां किसी खास व्यक्ति ने भाषण दिया था, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था और संविधान की भावना पर सवाल खड़ा करता है।
घटना 8 अगस्त की बताई जा रही है
मामले की शुरुआत हल्द्वानी के रामलीला मैदान में आठ अगस्त को हुई कांग्रेस की ‘विजय शंखनाद’ सभा से हुई। इस सभा को खरगे ने संबोधित किया था। इसके दो दिन बाद, दस अगस्त को उसी मैदान में श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास की ओर से हवन-पूजन और शुद्धिकरण कार्यक्रम कराया गया। इस कार्यक्रम की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद बढ़ गया।
धार्मिक संगठन ने क्या कहा?
स्थानीय संगठन से जुड़े लोगों ने इस आयोजन को राजनीतिक दल से जोड़ने से इनकार किया है। उनका कहना है कि रामलीला मैदान की धार्मिक और सांस्कृतिक गरिमा को बनाए रखने के उद्देश्य से हवन कराया गया था। आयोजकों की ओर से यह भी कहा गया कि उनका मकसद किसी समुदाय के खिलाफ माहौल बनाना नहीं था।
कांग्रेस ने भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप
दूसरी ओर कांग्रेस नेताओं ने इस पूरे घटनाक्रम को भाजपा से जोड़ते हुए सवाल उठाए। कांग्रेस की ओर से आरोप लगाया गया कि खरगे की सभा के बाद मंच का शुद्धिकरण कराया जाना केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक भेदभाव का संदेश देने वाला कदम है। पार्टी नेताओं ने इसे खरगे के साथ-साथ अनुसूचित जाति समाज के अपमान से भी जोड़कर देखा।
भाजपा ने संगठन से संबंध होने से किया इनकार
भाजपा की स्थानीय इकाई ने भी इस मामले में अपना पक्ष रखा। पार्टी नेताओं का कहना है कि शुद्धिकरण कार्यक्रम से भाजपा का कोई संबंध नहीं है। उनका आरोप है कि कांग्रेस एक निजी संगठन की ओर से किए गए कार्यक्रम को भाजपा से जोड़कर राजनीतिक मुद्दा बना रही है। ऐसे में अब नड्डा के सदन में दिए गए बयान के बाद जांच की बात सामने आने से मामले ने नया मोड़ ले लिया है।
मानसून सत्र के आखिरी दिन गरमाया मुद्दा
संसद के मानसून सत्र के आखिरी दिन यह मुद्दा ऐसे समय उठा, जब सदन में पहले से ही कई राजनीतिक मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं। हल्द्वानी की घटना पर खरगे का बयान और उसके बाद नड्डा की प्रतिक्रिया ने दोनों पक्षों के बीच बहस को और तीखा कर दिया। हालांकि, नड्डा के जांच कराने के आश्वासन के बाद अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि जांच में इस आयोजन के पीछे किसकी भूमिका सामने आती है।
अब जांच के नतीजे पर टिकी नजर
इस पूरे विवाद में फिलहाल दो अलग-अलग दावे सामने हैं। खरगे और कांग्रेस का आरोप है कि उनकी सभा के बाद मंच को उनके भाषण के कारण ‘शुद्ध’ कराया गया, जबकि स्थानीय संगठन और भाजपा इससे अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं। ऐसे में नड्डा द्वारा जांच की घोषणा महत्वपूर्ण हो गई है। जांच से ही यह साफ हो सकेगा कि कार्यक्रम किसने आयोजित किया, उसका वास्तविक उद्देश्य क्या था और क्या इसका किसी राजनीतिक दल से कोई संबंध था।
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