By Malay Ojha | Published: 13 August 2026 at 04:16 PM
भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में न्यायिक जांच आयोग की अंतरिम रिपोर्ट आने के बाद बिहार सरकार ने पीड़ित परिवार के लिए बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों और सुझावों के आधार पर दिवंगत भरत तिवारी के परिवार को आर्थिक सहायता दी जाएगी और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी भी मिलेगी। सरकार के इस फैसले के बाद अब इस मामले में आगे की कार्रवाई पर सबकी नजर है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया पर इस फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि न्यायिक जांच की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर भरत तिवारी के परिवार को आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसके साथ ही परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का भी फैसला लिया गया है। सरकार का कहना है कि जांच आयोग की रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों और सुझावों को ध्यान में रखते हुए पीड़ित परिवार के हित में जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
न्यायिक जांच के बाद बढ़ी सरकार की जिम्मेदारी
भरत तिवारी की मौत के बाद से ही इस मामले को लेकर पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठते रहे हैं। परिवार और स्थानीय लोगों ने घटना को सामान्य पुलिस मुठभेड़ मानने से इनकार किया था और निष्पक्ष जांच की मांग की थी। विवाद बढ़ने के बाद राज्य सरकार ने न्यायिक जांच का फैसला लिया। इसके लिए पटना उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में आयोग बनाया गया था।
आयोग ने शुरू की थी गवाहों की जांच
जांच आयोग ने जुलाई में आरा में अपना काम शुरू किया था। आयोग की ओर से घटना से जुड़े लोगों और गवाहों को सम्मन भेजे गए थे। आयोग के अध्यक्ष ने बताया था कि जांच का मुख्य उद्देश्य 17 जून की घटना की पूरी पृष्ठभूमि, घटनाक्रम और उन परिस्थितियों की पड़ताल करना है, जिनके बीच पुलिस कार्रवाई हुई। जरूरत पड़ने पर घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी तय की जानी है।
अब परिवार को सीधे मिलेगी सरकारी मदद
सरकार के नए फैसले का सीधा असर भरत तिवारी के परिवार पर पड़ेगा। आर्थिक सहायता के साथ परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का फैसला ऐसे समय में आया है, जब न्यायिक जांच की अंतरिम रिपोर्ट सरकार के पास पहुंच चुकी है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि आर्थिक सहायता की राशि कितनी होगी और परिवार के किस सदस्य को नौकरी दी जाएगी। इन दोनों बिंदुओं पर आगे आधिकारिक जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
मानवाधिकार आयोग भी दे चुका है राहत का निर्देश
इस मामले में बिहार मानवाधिकार आयोग भी पहले हस्तक्षेप कर चुका है। जुलाई में आयोग ने बिहार सरकार को भरत तिवारी के माता-पिता को अंतरिम मुआवजा देने का निर्देश दिया था। आयोग ने साथ ही यह साफ किया था कि अंतरिम मुआवजा देने का मतलब यह नहीं माना जाएगा कि सरकार ने मामले में अपनी कानूनी जिम्मेदारी स्वीकार कर ली है। उस समय भरत तिवारी मामले की न्यायिक जांच भी जारी थी।
17 जून को बिलौटी में हुई थी पुलिस कार्रवाई
पूरा मामला 17 जून 2026 को भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव से जुड़ा है। पुलिस और विशेष कार्यबल की कार्रवाई के दौरान भरत भूषण तिवारी को गोली लगी थी। बाद में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। पुलिस का कहना था कि कार्रवाई के दौरान भरत ने पुलिस टीम पर हथियार से गोली चलाने की कोशिश की थी और जवाब में आत्मरक्षा के लिए गोली चलाई गई।
परिवार ने पुलिस के दावे पर उठाए थे सवाल
दूसरी ओर भरत तिवारी के परिवार ने पुलिस के इस दावे को स्वीकार नहीं किया। परिजनों का आरोप था कि घटना की परिस्थितियां संदिग्ध थीं और भरत को आत्मसमर्पण के बाद गोली मारे जाने का दावा भी सामने आया। परिवार लगातार इस मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग करता रहा। इसी वजह से मामला स्थानीय स्तर से निकलकर राज्य की राजनीति और न्यायिक प्रक्रिया तक पहुंच गया।
जांच के आदेश के बाद मामला और गंभीर हुआ
विवाद बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने न्यायिक जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद सेवानिवृत्त न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में आयोग ने जांच शुरू की। आयोग ने घटना की परिस्थितियों के साथ पुलिस कार्रवाई की भूमिका की जांच को भी अपने प्रमुख बिंदुओं में रखा था। अधिकारियों और पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी तय करने की संभावना भी जांच के दायरे में रखी गई थी।
परिवार से भी दर्ज कराया गया बयान
जांच के दौरान भरत तिवारी के परिवार के सदस्यों के बयान भी दर्ज किए गए। उनकी मां आशा देवी, भाई चंदन तिवारी और भाभी सुमन देवी अदालत पहुंचे थे, जहां परिवार ने घटना से जुड़ी अपनी बात रखी। परिवार की ओर से लगातार यह कहा जाता रहा कि उन्हें पुलिस की जांच से ज्यादा न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा है और घटना की सच्चाई सामने आनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था मामला
भरत तिवारी एनकाउंटर का मामला सर्वोच्च न्यायालय तक भी पहुंचा था। जुलाई में सर्वोच्च न्यायालय ने मामले में दायर याचिका पर सीधे सुनवाई करने से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को पटना उच्च न्यायालय जाने की सलाह दी थी। इससे यह साफ हो गया था कि मामले को लेकर कानूनी लड़ाई भी आगे बढ़ रही है।
अब आगे की कार्रवाई पर टिकी नजर
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि न्यायिक जांच की अंतरिम रिपोर्ट में किन तथ्यों और सुझावों के आधार पर सरकार ने परिवार के लिए आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरी का फैसला किया है। सरकार के इस कदम से परिवार को तत्काल राहत जरूर मिलेगी, लेकिन भरत तिवारी की मौत को लेकर उठे मूल सवालों का जवाब जांच की पूरी प्रक्रिया और अंतिम निष्कर्ष से ही मिलेगा। यही वजह है कि अब इस मामले में अगली सरकारी कार्रवाई और जांच आयोग की आगे की रिपोर्ट महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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