By Malay Ojha | Published: 13 August 2026 at 08:45 PM
बिहार में शराबबंदी को लेकर सरकार ने अब कार्रवाई का दायरा और बढ़ाने का फैसला किया है। राज्य में अवैध शराब की खेप पकड़े जाने पर केवल तस्कर या कारोबारी ही नहीं, बल्कि उस शराब के ब्रांड की निर्माता कंपनी के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। मद्य निषेध मंत्री मदन सहनी ने गुरुवार को यह जानकारी देते हुए कहा कि कंपनी के मालिक को भी मुकदमे में शामिल किया जाएगा। सरकार के इस फैसले से शराब तस्करी के मामले में अब कंपनियों पर भी कार्रवाई का रास्ता खुल गया है।
मद्य निषेध मंत्री मदन सहनी ने कहा कि बिहार में यदि किसी कंपनी की विदेशी शराब अवैध तरीके से पहुंचती हुई पकड़ी जाती है तो संबंधित कंपनी के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि शराबबंदी कानून के तहत अब कार्रवाई केवल उस व्यक्ति तक सीमित नहीं रहेगी, जो शराब लेकर बिहार पहुंचा है। शराब के निर्माण से जुड़ी कंपनी और उसके जिम्मेदार लोगों की भूमिका की भी जांच की जाएगी।
पटना में पकड़ी गई खेप के बाद शुरू हुई कार्रवाई
मंत्री के मुताबिक इस व्यवस्था पर अमल भी शुरू हो चुका है। उन्होंने बताया कि हाल ही में पटना में शराब की एक खेप पकड़ी गई थी। इस मामले में शराब लेकर आने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ संबंधित कंपनी के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की गई। सरकार का मानना है कि इस कदम से शराब की अवैध आपूर्ति के पीछे काम करने वाले पूरे तंत्र पर दबाव बढ़ेगा।
कंपनी के मालिक तक पहुंचेगा मुकदमा
मदन सहनी ने साफ कहा कि यदि जांच में शराब की निर्माता कंपनी की भूमिका सामने आती है तो उसके मालिक को भी मुकदमे के दायरे में लाया जाएगा। सरकार का यह रुख इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि बिहार में शराबबंदी के बावजूद दूसरे राज्यों से शराब पहुंचाने की कोशिश लगातार सामने आती रही है। अब जांच का फोकस केवल तस्करी करने वाले व्यक्ति तक सीमित रखने के बजाय शराब की आपूर्ति से जुड़े दूसरे पक्षों तक भी बढ़ाया जाएगा।
शराबबंदी कानून में बदलाव नहीं होगा
शराबबंदी कानून में बदलाव या उसे कमजोर करने की चर्चाओं के बीच मंत्री ने सरकार का रुख भी साफ कर दिया। मदन सहनी ने कहा कि कानून में फिलहाल किसी तरह का संशोधन नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विभाग समय-समय पर इसकी समीक्षा करता है और पिछले महीने भी समीक्षा की गई थी। सरकार का कहना है कि कानून को खत्म करने या इसमें बड़े बदलाव की फिलहाल कोई जरूरत नहीं है।
10 साल से लागू है बिहार में शराबबंदी
बिहार में शराबबंदी को लागू हुए करीब दस साल हो चुके हैं। सरकार की ओर से लगातार यह दावा किया जाता रहा है कि शराब की बिक्री और सेवन पर रोक लगाने का फैसला परिवारों, खासकर महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के हित में लिया गया था। मंत्री ने भी कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार ने इस कानून को लागू करते समय समाज के उन वर्गों को ध्यान में रखा था, जिन्हें शराब की वजह से सबसे ज्यादा आर्थिक और सामाजिक नुकसान उठाना पड़ता था।
गरीब परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधरने का दावा
मदन सहनी ने कहा कि शराबबंदी लागू होने से पहले दिहाड़ी मजदूरी करने वाले कई लोग अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा शराब पर खर्च कर देते थे। ऐसे लोगों के घर लौटने पर परिवार के पास रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पर्याप्त पैसा नहीं बचता था। मंत्री का दावा है कि शराब पर रोक लगने के बाद ऐसे परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है। उन्होंने इसे शराबबंदी के प्रमुख सकारात्मक परिणामों में गिनाया।
महिलाओं के हित का भी सरकार ने दिया हवाला
मंत्री ने शराबबंदी के समर्थन में महिलाओं और परिवारों से जुड़े पहलू को भी सामने रखा। उनका कहना था कि शराब की वजह से परिवारों में होने वाले विवाद और आर्थिक परेशानी को कम करने में कानून की भूमिका रही है। सरकार का तर्क है कि शराब पर खर्च होने वाली रकम घर की दूसरी जरूरतों में लगने लगी, जिससे परिवारों को फायदा हुआ। हालांकि शराबबंदी की प्रभावशीलता को लेकर राज्य में समय-समय पर सवाल भी उठते रहे हैं।
अवैध शराब के खिलाफ छापेमारी जारी
सरकार का कहना है कि शराबबंदी लागू होने के बाद अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई लगातार तेज की गई है। मद्य निषेध विभाग और पुलिस की ओर से अलग-अलग इलाकों में छापेमारी की जा रही है। शराब की खेप, अवैध निर्माण और तस्करी से जुड़े मामलों में गिरफ्तारी के साथ वाहनों और अन्य सामान की जब्ती भी की जा रही है। हाल के सरकारी अभियानों में बड़ी मात्रा में अवैध शराब पकड़े जाने की जानकारी सामने आती रही है।
सूखे नशे के खिलाफ भी अभियान तेज
मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार का अभियान केवल शराब तक सीमित नहीं है। सूखे नशे के खिलाफ भी लगातार छापेमारी की जा रही है। विभाग और पुलिस की टीमें ऐसे मामलों में भी कार्रवाई कर रही हैं। सरकार का कहना है कि नशीले पदार्थों के कारोबार से जुड़े लोगों पर भी सख्ती जारी रहेगी और अवैध कारोबार करने वालों को किसी भी स्थिति में राहत नहीं दी जाएगी।
शराबबंदी पर उठ रहे सवालों के बीच सरकार का सख्त संदेश
बिहार में शराबबंदी को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस जारी है। एक तरफ कानून की वजह से होने वाले कथित फायदे गिनाए जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ अवैध शराब की बरामदगी और तस्करी के लगातार सामने आने वाले मामलों को लेकर सवाल भी उठते हैं। इसी माहौल में सरकार ने शराब की निर्माता कंपनियों को भी कार्रवाई के दायरे में लाने का फैसला सामने रखा है। इससे साफ है कि फिलहाल सरकार शराबबंदी को खत्म करने या इसमें नरमी लाने के बजाय इसके अमल को और सख्त करने के रास्ते पर आगे बढ़ रही है।
सरकार का नया रुख यह है कि बिहार में अवैध शराब की खेप मिलने पर कार्रवाई केवल तस्कर तक सीमित नहीं रहेगी। जब्त शराब के ब्रांड और उसकी निर्माता कंपनी की भूमिका की भी जांच होगी और जरूरत पड़ने पर कंपनी तथा उसके मालिक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। मंत्री के अनुसार, पटना के एक मामले में इस दिशा में कार्रवाई शुरू भी हो चुकी है।
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