By aryavartalive | Published: 17 August 2026 at 06:39 PM
नवादा जिले के नवादा प्रखंड अंतर्गत घोसतावां मौजा के जगतपुर दलदलहा महादलित टोले में करीब तीन दशक से रह रहे 20 भूमिहीन महादलित परिवारों ने अब अपने आवासीय अधिकार के लिए जिला प्रशासन का दरवाजा खटखटाया है। इन परिवारों ने सोमवार को जिलाधिकारी के जनता दरबार में लिखित आवेदन देकर वासगीत पर्चा जारी करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से सरकारी गैरमजरूआ जमीन पर रहने के बावजूद उन्हें अब तक जमीन का कानूनी दस्तावेज नहीं मिल सका है।
ग्रामीणों के मुताबिक जगतपुर दलदलहा में महादलित परिवार बिहार सरकार की गैरमजरूआ जमीन पर लंबे समय से झोपड़ी बनाकर रह रहे हैं। आवेदन में जमीन का प्लॉट नंबर 4586 बताया गया है। परिवारों का कहना है कि उनके पास अपनी जमीन नहीं है और इसी जगह पर किसी तरह घर बनाकर बच्चों और परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं।
1991 में दिया था आवेदन, फिर भी नहीं मिली पर्ची
सबसे अहम बात यह है कि इन परिवारों ने करीब 35 वर्ष पहले यानी 21 अक्टूबर 1991 को ही वासगीत पर्चा के लिए अंचल कार्यालय में आवेदन दिया था। आवेदन मिलने के बाद अंचल अधिकारी ने संबंधित हल्का कर्मचारी से जमीन की जांच कर रिपोर्ट भी मांगी थी। लेकिन ग्रामीणों का दावा है कि जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ने के बावजूद आज तक उन्हें वासगीत पर्चा जारी नहीं किया गया।
जांच के बाद भी अटका रहा मामला
ग्रामीणों के अनुसार उस समय उम्मीद जगी थी कि जमीन की जांच के बाद उन्हें रहने के अधिकार से जुड़ा दस्तावेज मिल जाएगा। लेकिन साल-दर-साल बीतते गए और मामला वहीं अटका रहा। तीन दशक से अधिक समय गुजरने के बाद भी परिवार अपने ही बसेरे को लेकर सरकारी कागज का इंतजार कर रहे हैं। उनका कहना है कि लगातार कार्यालयों के चक्कर लगाने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।
जमीन का कागज नहीं होने से योजनाओं का लाभ प्रभावित
महादलित परिवारों का कहना है कि जमीन का वैध दस्तावेज नहीं होने के कारण उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में भी परेशानी होती है। उनका दावा है कि आवास और दूसरी सरकारी सुविधाओं से जुड़ी योजनाओं में जमीन के कागजात की जरूरत पड़ती है। ऐसे में जिन परिवारों के पास रहने के लिए अपनी जमीन का कोई दस्तावेज नहीं है, उनके सामने सरकारी सुविधाओं का लाभ लेने में बड़ी अड़चन खड़ी हो जाती है।
परिवारों का सवाल- इतने वर्षों बाद भी कब मिलेगा अधिकार?
आवेदन देने वाले परिवारों का कहना है कि सरकार भूमिहीन गरीब परिवारों को रहने के लिए जमीन उपलब्ध कराने और वासगीत पर्चा देने की बात करती है। ऐसे में उनका सवाल है कि जब वे लोग करीब तीन दशक से एक ही जगह पर रह रहे हैं और पहले भी इस संबंध में आवेदन दे चुके हैं, तो उनके मामले का निपटारा अब तक क्यों नहीं हुआ।
झोपड़ी में गुजर रही जिंदगी
जगतपुर दलदलहा के इन परिवारों के लिए यह सिर्फ जमीन का मामला नहीं है, बल्कि सुरक्षित घर और स्थायी पहचान से जुड़ा सवाल भी है। ग्रामीणों के अनुसार वे लंबे समय से इसी जगह पर छोटे-छोटे कच्चे या अस्थायी घर बनाकर रह रहे हैं। रोज मजदूरी कर परिवार चलाने वाले इन लोगों के लिए जमीन खरीदकर घर बनाना आसान नहीं है। यही वजह है कि वे सरकारी जमीन पर बसे अपने परिवारों के लिए वासगीत पर्चा की मांग कर रहे हैं।
महादलित परिवारों में बढ़ रही नाराजगी
लंबे समय से मामला लंबित रहने के कारण ग्रामीणों में नाराजगी भी बढ़ रही है। आवेदन में कहा गया है कि समस्या का समाधान नहीं होने से भूमिहीन परिवारों में असंतोष है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए जमीन की स्थिति की जांच कराने और पात्र परिवारों को जल्द से जल्द वासगीत पर्चा उपलब्ध कराने की मांग की है।
20 आवेदकों ने हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान के साथ दिया आवेदन
जिलाधिकारी के जनता दरबार में दिए गए आवेदन पर जगतपुर दलदलहा के करीब 20 महादलित परिवारों के हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान हैं। इन परिवारों ने प्रशासन से मांग की है कि वर्ष 1991 में दिए गए पुराने आवेदन और जमीन से संबंधित जांच रिपोर्ट को रिकॉर्ड में देखा जाए और नियमानुसार उनके मामले का निपटारा किया जाए।
अब प्रशासन के फैसले पर टिकी नजर
करीब तीन दशक से चली आ रही इस समस्या को लेकर अब ग्रामीणों की उम्मीद जिला प्रशासन पर टिकी है। जनता दरबार में आवेदन पहुंचने के बाद देखना होगा कि प्रशासन इस पुराने मामले में क्या कार्रवाई करता है और जांच के बाद पात्र परिवारों को वासगीत पर्चा देने की प्रक्रिया कब तक आगे बढ़ती है। फिलहाल 20 भूमिहीन महादलित परिवार अपने लंबे इंतजार के खत्म होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
Aryavarta Live के WhatsApp Channel से जुड़ें और हर महत्वपूर्ण अपडेट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।
WhatsApp चैनल जॉइन करें

