By Malay Ojha | Published: 22 August 2026 at 11:47 AM
बिहार में अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच कथित दूरी को लेकर राष्ट्रीय जनता दल ने राज्य सरकार पर हमला बोला है। राजद नेता एजाज अहमद ने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से बार-बार अधिकारियों को प्रोटोकॉल और नियमों का पालन करने तथा सांसदों, विधायकों और पंचायती राज प्रतिनिधियों के सम्मान का ध्यान रखने के निर्देश दिए जाते हैं, लेकिन जमीन पर इन निर्देशों का असर दिखाई नहीं दे रहा है। उनका दावा है कि अब स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि जनप्रतिनिधियों की ओर से बुलाई गई बैठकों में अधिकारी पहुंचते ही नहीं हैं और कई बार अधिकारी के नहीं आने पर बैठक तक रद्द करनी पड़ती है।
एजाज अहमद ने कहा कि जनप्रतिनिधियों की बैठक में अधिकारियों की गैरमौजूदगी केवल एक प्रशासनिक लापरवाही का मामला नहीं है, बल्कि इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं। उनके मुताबिक सांसद, विधायक और पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधि जनता के बीच से चुनकर आते हैं और उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
बैठक में अधिकारी नहीं आए तो उठे सवाल
राजद नेता का आरोप है कि बिहार में ऐसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जिनमें जनप्रतिनिधियों की ओर से बुलाई गई बैठकों में संबंधित अधिकारी शामिल नहीं होते। उनका कहना है कि अधिकारियों की अनुपस्थिति के कारण कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा नहीं हो पाती और बैठक को ही स्थगित या रद्द करना पड़ता है। इससे जनता से जुड़े मामलों के समाधान की प्रक्रिया भी प्रभावित होती है।
‘सरकार पत्राचार करती है, फिर भी असर क्यों नहीं’
एजाज अहमद ने सवाल उठाया कि जब राज्य सरकार खुद अधिकारियों को प्रोटोकॉल का पालन करने और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के सम्मान का ध्यान रखने के लिए पत्राचार करती है, तो फिर इन निर्देशों का पालन क्यों नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार के स्तर से आदेश और निर्देश जारी होने के बावजूद यदि अधिकारी उसे गंभीरता से नहीं लेते हैं तो इसकी जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
सांसद-विधायक के सम्मान का मुद्दा
राजद नेता ने कहा कि लोकतंत्र में सांसद और विधायक केवल राजनीतिक पद पर बैठे लोग नहीं होते, बल्कि वे जनता के प्रतिनिधि होते हैं। इसी तरह पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधि भी अपने-अपने क्षेत्र के लोगों की समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाते हैं। ऐसे में किसी अधिकारी का बैठक में नहीं पहुंचना या जनप्रतिनिधि को अपेक्षित सम्मान नहीं देना व्यवस्था में गलत संदेश भेजता है।
‘अफसरशाही लोकतंत्र पर भारी पड़ रही’
एजाज अहमद ने आरोप लगाया कि बिहार में अब ऐसी स्थिति बन रही है, जहां प्रशासनिक अधिकारियों का प्रभाव निर्वाचित जनप्रतिनिधियों से ज्यादा दिखाई देने लगा है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए चिंता का विषय बताया। उनके मुताबिक यदि जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों की बात को प्रशासनिक स्तर पर महत्व नहीं दिया जाएगा तो इससे लोगों का लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भरोसा कमजोर हो सकता है।
एनडीए सरकार पर सीधे निशाना
राजद नेता ने सवाल उठाया कि आखिर एनडीए सरकार के कार्यकाल में ही अधिकारियों के स्तर पर प्रोटोकॉल के पालन को लेकर बार-बार सवाल क्यों उठ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार की ओर से निर्देश जारी किए जा रहे हैं और उसके बाद भी अधिकारी अपने तरीके से काम कर रहे हैं तो यह केवल अधिकारियों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सरकार के कामकाज पर भी सवाल खड़ा करता है।
‘किसके संरक्षण में बढ़ रहा अधिकारियों का मनोबल’
एजाज अहमद ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ ऐसे अधिकारियों और पदाधिकारियों को राजनीतिक संरक्षण मिलने की वजह से उनका मनोबल बढ़ रहा है, जो जनप्रतिनिधियों के सम्मान और प्रोटोकॉल का ख्याल नहीं रखते। हालांकि उन्होंने किसी खास अधिकारी या नेता का नाम नहीं लिया। उनका कहना है कि सरकार के भीतर बैठे लोगों की जिम्मेदारी है कि वे ऐसे मामलों पर नजर रखें और यह सुनिश्चित करें कि प्रशासनिक व्यवस्था निर्वाचित प्रतिनिधियों के साथ निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार व्यवहार करे।
जनता के काम पर भी पड़ता है असर
जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच तालमेल केवल औपचारिकता नहीं है। सांसद, विधायक और पंचायत प्रतिनिधि अपने क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और दूसरी स्थानीय समस्याओं को लेकर अधिकारियों के साथ बैठक करते हैं। अगर इन बैठकों में संबंधित अधिकारी मौजूद नहीं होंगे तो समस्याओं पर चर्चा और उनके समाधान की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि राजद ने इस मुद्दे को लोकतांत्रिक व्यवस्था और आम लोगों से जुड़े कामकाज से जोड़कर सरकार को घेरा है।
राजद ने सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की
एजाज अहमद ने कहा कि अधिकारियों को यह समझना होगा कि प्रशासन जनता की सेवा के लिए है और जनप्रतिनिधि जनता की आवाज को सरकार तक पहुंचाने का काम करते हैं। दोनों के बीच बेहतर तालमेल से ही विकास और प्रशासन से जुड़े काम आगे बढ़ सकते हैं। उन्होंने सरकार से ऐसे मामलों को गंभीरता से लेने और प्रोटोकॉल का पालन नहीं करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की।
‘लोकतंत्र में किसी एक की मनमानी नहीं चलेगी’
राजद नेता ने कहा कि लोकतंत्र में निर्वाचित संस्थाओं और प्रशासन के बीच संतुलन बेहद जरूरी है। यदि अधिकारी जनप्रतिनिधियों की बैठकों को महत्व नहीं देंगे और सरकार के निर्देशों के बावजूद प्रोटोकॉल का पालन नहीं करेंगे तो यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए ठीक संकेत नहीं है। उन्होंने कहा कि बिहार में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिसमें जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच सम्मान, संवाद और जवाबदेही के साथ काम हो।
आरोपों पर सरकार का पक्ष आना बाकी
एजाज अहमद के इन आरोपों के बीच अब सरकार और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की प्रतिक्रिया का इंतजार है। फिलहाल राजद नेता ने अपने बयान के जरिए सरकार से यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि यदि जनप्रतिनिधियों के सम्मान और प्रोटोकॉल को लेकर लगातार निर्देश जारी किए जा रहे हैं, तो फिर उन निर्देशों के पालन की निगरानी और जिम्मेदारी तय करने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है। इसी सवाल को लेकर बिहार की राजनीति में एक बार फिर अफसरशाही बनाम जनप्रतिनिधि का मुद्दा चर्चा में आ गया है।
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