By Malay Ojha | Published: 25 August 2026 at 07:37 PM
रक्षाबंधन को लेकर बिहार के बाजारों में इस बार अच्छी खरीदारी की उम्मीद है। कैट बिहार के प्रदेश अध्यक्ष अशोक कुमार वर्मा के मुताबिक, इस त्योहार पर राज्य में करीब 300 करोड़ रुपये का कारोबार हो सकता है। इसमें राखी, मिठाई, आभूषण, इलेक्ट्रिक सामान और उपहार समेत कई तरह के उत्पाद शामिल हैं। खास बात यह है कि बाजार में स्वदेशी राखियों की मांग बढ़ी है और स्थानीय स्तर पर बनी राखियों को लोग पसंद कर रहे हैं।
रक्षाबंधन से पहले पटना समेत बिहार के अलग-अलग बाजारों में राखी और उपहार की खरीदारी तेज हो गई है। बहनें अपने भाइयों के लिए पसंद की राखियां खरीद रही हैं, वहीं मिठाई, कपड़े, आभूषण और उपहार सामग्री की दुकानों पर भी ग्राहकों की आवाजाही बढ़ी है। व्यापारियों को उम्मीद है कि त्योहार नजदीक आने के साथ बाजार में खरीदारी और बढ़ेगी।
300 करोड़ के कारोबार का अनुमान
कैट बिहार के प्रदेश अध्यक्ष अशोक कुमार वर्मा ने बताया कि इस बार रक्षाबंधन से जुड़े सामानों की बिक्री को देखते हुए बिहार में करीब 300 करोड़ रुपये के कारोबार का अनुमान है। उनके अनुसार, त्योहार का असर केवल राखी की बिक्री तक सीमित नहीं रहता, बल्कि मिठाई, ज्वेलरी, इलेक्ट्रिक सामान, उपहार और दूसरे उत्पादों की बिक्री भी बढ़ती है।
राखी से लेकर मिठाई तक बढ़ी मांग
रक्षाबंधन पर सबसे ज्यादा मांग राखी और मिठाई की रहती है। इसके अलावा भाई-बहन एक-दूसरे को उपहार भी देते हैं। यही वजह है कि त्योहार के आसपास कई तरह के बाजारों में बिक्री बढ़ जाती है। व्यापारियों को इस बार भी अच्छी खरीदारी की उम्मीद है और त्योहार से पहले बाजार में इसका असर दिखाई देने लगा है।
स्वदेशी राखियों ने बदला बाजार का रुख
अशोक कुमार वर्मा के मुताबिक, इस बार बाजार में स्वदेशी राखियों की उपलब्धता और मांग दोनों पहले से ज्यादा दिखाई दे रही हैं। चीन समेत दूसरे देशों से आने वाली राखियों की जगह स्थानीय कारीगरों और घरेलू स्तर पर तैयार की गई राखियों को प्राथमिकता मिलने की बात कही जा रही है। इससे बिहार के छोटे कारोबारियों और स्थानीय उत्पादकों को त्योहार के दौरान बड़ा बाजार मिलने की उम्मीद है।
स्थानीय कारीगरों को मिल रहा फायदा
स्वदेशी राखियों की बढ़ती मांग का सीधा फायदा उन लोगों को मिल रहा है जो घर या छोटे स्तर पर राखियां तैयार करते हैं। इनमें महिला उद्यमी, घरेलू उत्पादक, छोटे कारीगर और लघु कारोबारी शामिल हैं। त्योहार के मौसम में इनके उत्पादों की बिक्री बढ़ने से अतिरिक्त आमदनी का रास्ता खुलता है।
महिलाओं और छोटे कारोबारियों के लिए भी मौका
रक्षाबंधन सिर्फ बड़े बाजारों के लिए कारोबार का मौका नहीं है। घरों और छोटे समूहों में राखी तैयार करने वाली महिलाओं के लिए भी यह कमाई का महत्वपूर्ण समय होता है। स्थानीय स्तर पर तैयार राखियों की मांग बढ़ने से ऐसे लोगों को अपने उत्पाद बेचने के लिए ग्राहक मिलते हैं। इससे त्योहार के साथ स्थानीय कारोबार को भी बढ़ावा मिलता है।
वोकल फॉर लोकल का असर बाजार में
अशोक कुमार वर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री के ‘लोकल फॉर वोकल’ और ‘वोकल फॉर ग्लोबल’ के आह्वान का असर बाजार में देखने को मिल रहा है। उनके अनुसार, लोग अब स्थानीय स्तर पर तैयार सामान को खरीदने में ज्यादा रुचि दिखा रहे हैं। रक्षाबंधन जैसे त्योहारों पर यह रुझान छोटे कारोबारियों और कारीगरों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
बिहार की अर्थव्यवस्था को मिल सकता है फायदा
त्योहारों के दौरान स्थानीय उत्पादों की बिक्री बढ़ने का असर सिर्फ दुकानदार तक सीमित नहीं रहता। राखी बनाने वाले कारीगर, पैकिंग से जुड़े लोग, मिठाई कारोबारी, छोटे दुकानदार और दूसरे सेवा क्षेत्र भी इससे जुड़े होते हैं। ऐसे में स्थानीय सामान की खरीदारी बढ़ने से त्योहार का पैसा राज्य के बाजार में ही घूमता है और छोटे कारोबार को सहारा मिलता है।
लोगों से स्वदेशी सामान खरीदने की अपील
कैट बिहार अध्यक्ष ने लोगों से अपील की कि रक्षाबंधन पर अधिक से अधिक स्वदेशी राखी और स्थानीय उत्पाद खरीदें। उनका कहना है कि इससे त्योहार की खुशियां तो बढ़ेंगी ही, साथ ही स्थानीय कारीगरों, महिलाओं और छोटे कारोबारियों को भी सीधा फायदा मिलेगा।
रक्षाबंधन से पहले बाजार को बड़ी उम्मीद
देशभर में भी इस बार रक्षाबंधन के कारोबार को लेकर व्यापारिक संगठनों ने बड़े अनुमान लगाए हैं। कैट के राष्ट्रीय स्तर के आकलन के मुताबिक, राखियों का कारोबार करीब 25 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है और मिठाई, उपहार, कपड़े तथा दूसरे त्योहार से जुड़े सामान को मिलाकर कुल कारोबार 30 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा रहने की संभावना है।
28 अगस्त को मनाया जाएगा रक्षाबंधन
इस साल रक्षाबंधन का त्योहार 28 अगस्त को मनाया जाएगा। त्योहार में अब कुछ ही दिन बाकी हैं, ऐसे में बाजारों में खरीदारी का दबाव और बढ़ने की उम्मीद है। बिहार में करीब 300 करोड़ रुपये के कारोबार का यह अनुमान कैट बिहार की ओर से दिया गया है, इसलिए इसे व्यापारिक संगठन का अनुमान माना जाना चाहिए, न कि किसी सरकारी आर्थिक सर्वेक्षण का अंतिम आंकड़ा।
स्थानीय बाजारों पर टिकी कारोबारियों की नजर
अब कारोबारियों की नजर त्योहार के आखिरी दिनों की खरीदारी पर है। रक्षाबंधन से ठीक पहले राखी, मिठाई और उपहार की बिक्री आम तौर पर तेज होती है। ऐसे में अगर बाजार में ग्राहकों की आवाजाही बढ़ती है तो कारोबार के इस अनुमान के और करीब पहुंचने की उम्मीद की जा सकती है। फिलहाल स्वदेशी राखियों की बढ़ती मांग को स्थानीय व्यापार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
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