By Malay Ojha | Published: 26 August 2026 at 04:48 PM
वाराणसी के सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय स्थित योगसाधना भवन में श्रीकाशीविद्वद्धर्मपरिषद की ओर से आयोजित समारोह में महाराष्ट्र से आए श्रीमहंत वेदाचार्य पीठाधीश्वर स्वामी डॉ. अनिकेत शास्त्री का अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम में उन्होंने विश्वविद्यालय को अंतरराष्ट्रीय स्तर की पहचान दिलाने की जरूरत बताई। उनका कहना था कि अपनी समृद्ध परंपरा और संस्कृत शिक्षा के महत्व को देखते हुए विश्वविद्यालय को और बड़े स्तर पर विकसित किया जाना चाहिए।
स्वामी अनिकेत शास्त्री ने कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा की कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि उनकी सक्रियता को देखते हुए उन्हें उम्मीद है कि विश्वविद्यालय जल्द अपने विकास के लक्ष्य हासिल करेगा। उन्होंने कहा कि संस्कृत और शास्त्रीय ज्ञान की इस संस्था को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी मजबूत पहचान बनानी चाहिए।
धार्मिक आयोजनों की व्यवस्था पर भी उठाया मुद्दा
स्वामी अनिकेत शास्त्री ने कहा कि बड़े धार्मिक आयोजनों और कुंभ जैसे आयोजनों में शास्त्रीय परंपराओं और धार्मिक मर्यादाओं का ध्यान रखना जरूरी है। उन्होंने सुझाव दिया कि काशी के विद्वान और धर्माचार्य ऐसे आयोजनों की व्यवस्था को लेकर सरकार को शास्त्रसम्मत सुझाव और दिशा-निर्देश दें, ताकि धार्मिक परंपराओं के साथ आयोजन बेहतर तरीके से हो सकें।
सनातन परंपरा के संरक्षण का आह्वान
उन्होंने कहा कि परिषद की ओर से किया गया सम्मान केवल उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं है, बल्कि इससे संत परंपरा और सनातन संस्कृति के प्रति सम्मान का भाव भी सामने आता है। उन्होंने परिषद के प्रयासों को सनातन धर्म, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण से जोड़ते हुए इसे आगे बढ़ाने की जरूरत बताई।
हरिवंश पुराण कार्यशाला और महारुद्र यज्ञ भी हुआ
कार्यक्रम से पहले योगसाधना भवन में हरिवंश पुराण कार्यशाला का विशेष सत्र आयोजित किया गया। इसी दौरान वेद विभाग की ओर से चल रहे महारुद्र यज्ञ की पूर्णाहुति भी हुई। इसके बाद दोपहर में अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया, जिसमें काशी के कई विद्वान और धर्माचार्य शामिल हुए।
परिषद ने बताया अपना उद्देश्य
परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष पं. कमलाकांत त्रिपाठी ने स्वामी अनिकेत शास्त्री के सम्मान में अभिनंदन पत्र पढ़ा। परिषद के मुख्य न्यासी डॉ. अभिषेक कुमार उपाध्याय ने कहा कि श्रीकाशीविद्वद्धर्मपरिषद का उद्देश्य काशी की अन्य विद्वत और धर्म परिषदों के साथ मिलकर काम करना है। उन्होंने परिषद के मूल विचार को ‘गुरुकुल से गांव तक, शास्त्र से समाधान तक’ बताया।
जम्मू-कश्मीर में मंदिरों को लेकर भी योजना
डॉ. अभिषेक कुमार उपाध्याय ने कहा कि परिषद धर्म और समाज से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने के साथ सीमांत क्षेत्रों में मंदिरों की व्यवस्था मजबूत करने पर भी काम करेगी। खासतौर पर जम्मू-कश्मीर के ऐसे मंदिरों में अर्चक प्रशिक्षण और नियमित पूजा व्यवस्था शुरू करने की योजना पर जोर दिया गया।
कुलपति का भी हुआ अभिनंदन
सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा का भी कार्यक्रम में सम्मान किया गया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान विश्वविद्यालय के विकास के लिए उन्हें और अधिक मेहनत करने की प्रेरणा देगा। कार्यक्रम में अखिल भारत हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मुन्ना कुमार शर्मा समेत काशी के कई विद्वान मौजूद रहे।
शताधिक विद्वान और आचार्य रहे मौजूद
कार्यक्रम में प्रो. सुधाकर मिश्र, प्रो. रामप्रिय पाण्डेय, डॉ. उमंग नाथ शर्मा, प्रो. महेंद्र नाथ पाण्डेय, प्रो. दिनेश कुमार गर्ग सहित 100 से अधिक विद्वान, आचार्य और गणमान्य लोग शामिल हुए। संचालन परिषद के प्रवक्ता पं. विजय शर्मा ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन कार्यालय मंत्री पं. दुर्गेश पाठक ने किया।
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