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काशी विश्वनाथ धाम: 2 KM में गाड़ियों की नो-एंट्री से पहले उठी बड़ी मांग, ‘पुरोहितों और स्थानीय लोगों का रास्ता बंद न हो’

By Malay Ojha | Published: 20 September 2026 at 11:36 AM

काशी विश्वनाथ धाम के आसपास बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए 2 किलोमीटर के दायरे में ऑटो, ई-रिक्शा समेत तीन और चार पहिया वाहनों की आवाजाही सीमित करने की तैयारी है। मंदिर तक पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए गोल्फ कार्ट की व्यवस्था बढ़ाने का प्रस्ताव है। स्थानीय लोगों के दोपहिया वाहनों को पास के जरिए छूट देने पर भी विचार किया जा रहा है।

प्रस्तावित व्यवस्था को लेकर श्री काशी तीर्थ पुरोहित सभा, स्थानीय नागरिकों और गलियों में कारोबार करने वाले लोगों ने बैठक की। उनका कहना है कि ट्रैफिक कम करने की कोशिश जरूरी है, लेकिन ऐसा नियम नहीं बनाया जाना चाहिए जिससे तीर्थयात्रियों को अपने तीर्थ पुरोहितों तक पहुंचने में परेशानी हो या स्थानीय लोगों का रोजमर्रा का आवागमन प्रभावित हो।

तीर्थयात्रियों के लिए अलग टोटो चलाने की मांग
बैठक में सुझाव दिया गया कि पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के लिए सीमित संख्या में बैट्री वाहन यानी टोटो चलाए जाएं। इनका संचालन चौराहों से घाट और घाट से चौराहों तक तय रूट पर किया जा सकता है। वक्ताओं ने इनके लिए समय तय करने और इलाके में पार्किंग की व्यवस्था करने की भी मांग रखी।

घाट तक पहुंचना आसान हो, यही मांग
स्थानीय लोगों का कहना है कि काशी आने वाले पर्यटक और श्रद्धालु सिर्फ मंदिर दर्शन के लिए नहीं, बल्कि घाटों तक भी जाते हैं। ऐसे में उन्हें चौराहे से घाट तक पहुंचाने की स्पष्ट व्यवस्था जरूरी है। उनका सुझाव है कि पर्यटकों के लिए चलने वाले बैट्री वाहनों की पहचान और रूट तय किया जाए, ताकि व्यवस्था भी बनी रहे और श्रद्धालुओं को परेशानी भी न हो।

गिरजाघर-गोदौलिया तक समय के हिसाब से छूट की मांग
बैठक में सीमित संख्या में टोटो, ऑटो और चार पहिया वाहनों को तय समय के भीतर गिरजाघर और गोदौलिया तक आने-जाने की अनुमति देने की मांग भी उठी। स्थानीय लोगों का कहना है कि पूरी तरह रोक लगाने के बजाय जरूरत, समय और वाहन की श्रेणी के आधार पर नियम बनाए जा सकते हैं।

अवैध टोटो-ऑटो पर कार्रवाई की मांग
वक्ताओं ने ट्रैफिक जाम के लिए अवैध तरीके से चल रहे और बिना लाइसेंस वाले टोटो व ऑटो पर भी कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि ऐसे वाहनों की जांच कर नियमों का उल्लंघन करने वालों को सीज किया जाना चाहिए। इससे वैध वाहनों के संचालन और ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकेगा।

पहले से नो व्हीकल जोन है मैदागिन-गोदौलिया
काशी विश्वनाथ धाम क्षेत्र में वाहनों का दबाव कम करने के लिए मैदागिन-गोदौलिया मार्ग को पहले से नो व्हीकल जोन के तौर पर इस्तेमाल किया जाता रहा है। अब श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए इस व्यवस्था को करीब 2 किलोमीटर के दायरे तक बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। मौजूदा प्रस्ताव में मंदिर तक पहुंचने के लिए गोल्फ कार्ट की संख्या बढ़ाने की बात भी सामने आई है।

पुरोहित सभा ने नियम बनाने से पहले सर्वे की मांग रखी
स्थानीय लोगों और तीर्थ पुरोहितों का कहना है कि अंतिम व्यवस्था लागू करने से पहले गलियों, मंदिरों, घाटों और स्थानीय बस्तियों की स्थिति को ध्यान में रखा जाए। उनका जोर इस बात पर है कि श्रद्धालु, पर्यटक, स्थानीय निवासी और कारोबारी—सभी की जरूरतों को देखते हुए ट्रैफिक नियम बनाए जाएं।

बैठक में काशी तीर्थ पुरोहित सभा के अध्यक्ष एवं अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के महामंत्री पं. कन्हैया त्रिपाठी, पं. मनीष नंदन मिश्र, पं. देवेंद्र नाथ शुक्ल, पं. किशोरी रमण दूबे, पं. विवेक शुक्ल, पं. चंद्रशेखर शर्मा सहित कई पुरोहित, स्थानीय नागरिक और व्यापारी मौजूद रहे।

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काशी विश्वनाथ धाम: 2 KM में गाड़ियों की नो-एंट्री से पहले उठी बड़ी मांग, ‘पुरोहितों और स्थानीय लोगों का रास्ता बंद न हो’

By Malay Ojha | Published: 20 September 2026 at 11:36 AM

काशी विश्वनाथ धाम के आसपास बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए 2 किलोमीटर के दायरे में ऑटो, ई-रिक्शा समेत तीन और चार पहिया वाहनों की आवाजाही सीमित करने की तैयारी है। मंदिर तक पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए गोल्फ कार्ट की व्यवस्था बढ़ाने का प्रस्ताव है। स्थानीय लोगों के दोपहिया वाहनों को पास के जरिए छूट देने पर भी विचार किया जा रहा है।

प्रस्तावित व्यवस्था को लेकर श्री काशी तीर्थ पुरोहित सभा, स्थानीय नागरिकों और गलियों में कारोबार करने वाले लोगों ने बैठक की। उनका कहना है कि ट्रैफिक कम करने की कोशिश जरूरी है, लेकिन ऐसा नियम नहीं बनाया जाना चाहिए जिससे तीर्थयात्रियों को अपने तीर्थ पुरोहितों तक पहुंचने में परेशानी हो या स्थानीय लोगों का रोजमर्रा का आवागमन प्रभावित हो।

तीर्थयात्रियों के लिए अलग टोटो चलाने की मांग
बैठक में सुझाव दिया गया कि पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के लिए सीमित संख्या में बैट्री वाहन यानी टोटो चलाए जाएं। इनका संचालन चौराहों से घाट और घाट से चौराहों तक तय रूट पर किया जा सकता है। वक्ताओं ने इनके लिए समय तय करने और इलाके में पार्किंग की व्यवस्था करने की भी मांग रखी।

घाट तक पहुंचना आसान हो, यही मांग
स्थानीय लोगों का कहना है कि काशी आने वाले पर्यटक और श्रद्धालु सिर्फ मंदिर दर्शन के लिए नहीं, बल्कि घाटों तक भी जाते हैं। ऐसे में उन्हें चौराहे से घाट तक पहुंचाने की स्पष्ट व्यवस्था जरूरी है। उनका सुझाव है कि पर्यटकों के लिए चलने वाले बैट्री वाहनों की पहचान और रूट तय किया जाए, ताकि व्यवस्था भी बनी रहे और श्रद्धालुओं को परेशानी भी न हो।

गिरजाघर-गोदौलिया तक समय के हिसाब से छूट की मांग
बैठक में सीमित संख्या में टोटो, ऑटो और चार पहिया वाहनों को तय समय के भीतर गिरजाघर और गोदौलिया तक आने-जाने की अनुमति देने की मांग भी उठी। स्थानीय लोगों का कहना है कि पूरी तरह रोक लगाने के बजाय जरूरत, समय और वाहन की श्रेणी के आधार पर नियम बनाए जा सकते हैं।

अवैध टोटो-ऑटो पर कार्रवाई की मांग
वक्ताओं ने ट्रैफिक जाम के लिए अवैध तरीके से चल रहे और बिना लाइसेंस वाले टोटो व ऑटो पर भी कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि ऐसे वाहनों की जांच कर नियमों का उल्लंघन करने वालों को सीज किया जाना चाहिए। इससे वैध वाहनों के संचालन और ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकेगा।

पहले से नो व्हीकल जोन है मैदागिन-गोदौलिया
काशी विश्वनाथ धाम क्षेत्र में वाहनों का दबाव कम करने के लिए मैदागिन-गोदौलिया मार्ग को पहले से नो व्हीकल जोन के तौर पर इस्तेमाल किया जाता रहा है। अब श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए इस व्यवस्था को करीब 2 किलोमीटर के दायरे तक बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। मौजूदा प्रस्ताव में मंदिर तक पहुंचने के लिए गोल्फ कार्ट की संख्या बढ़ाने की बात भी सामने आई है।

पुरोहित सभा ने नियम बनाने से पहले सर्वे की मांग रखी
स्थानीय लोगों और तीर्थ पुरोहितों का कहना है कि अंतिम व्यवस्था लागू करने से पहले गलियों, मंदिरों, घाटों और स्थानीय बस्तियों की स्थिति को ध्यान में रखा जाए। उनका जोर इस बात पर है कि श्रद्धालु, पर्यटक, स्थानीय निवासी और कारोबारी—सभी की जरूरतों को देखते हुए ट्रैफिक नियम बनाए जाएं।

बैठक में काशी तीर्थ पुरोहित सभा के अध्यक्ष एवं अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के महामंत्री पं. कन्हैया त्रिपाठी, पं. मनीष नंदन मिश्र, पं. देवेंद्र नाथ शुक्ल, पं. किशोरी रमण दूबे, पं. विवेक शुक्ल, पं. चंद्रशेखर शर्मा सहित कई पुरोहित, स्थानीय नागरिक और व्यापारी मौजूद रहे।

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