By aryavartalive | Published: 19 September 2026 at 05:26 PM
पटना में शुक्रवार को जदयू के विधानमंडल दल के सदस्यों के लिए एकदिवसीय प्रबोधन कार्यक्रम आयोजित किया गया। पार्टी प्रवक्ताओं शंभू नाथ सिन्हा और चंदन कुमार सिंह ने इसे बिहार में किसी राजनीतिक दल की ओर से विशेषज्ञों के माध्यम से आयोजित इस तरह का पहला कार्यक्रम बताया। कार्यक्रम की शुरुआत जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने की।
कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार भी शामिल हुए। प्रेस नोट के मुताबिक, उन्होंने विधानमंडल दल के सदस्यों को पार्टी की भावी रणनीति से अवगत कराया। वहीं, कार्यक्रम में शामिल सदस्यों ने आयोजन के लिए जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा के प्रति आभार जताया।
PRS विशेषज्ञों ने विधायकों को दी जरूरी जानकारी
प्रबोधन कार्यक्रम में दिल्ली से आए PRS Legislative Research के विशेषज्ञों ने विधायकों और विधान पार्षदों के साथ विधायी कामकाज से जुड़े अहम विषयों पर चर्चा की। पांच प्रमुख विषयों में विधायी जिम्मेदारियां और समितियां, कानून बनाने की प्रक्रिया, देश में हाल के विधायी घटनाक्रम, राज्य के बजट को समझना तथा बिहार की अर्थव्यवस्था और राज्य के वित्त को शामिल किया गया।
सदन में विधायकों की भूमिका पर जोर
विशेषज्ञों ने बताया कि विधानसभा और विधान परिषद के सदस्यों की जिम्मेदारी केवल अपने क्षेत्र तक सीमित नहीं रहती। सदन के भीतर कानून, नीतियों, बजट और जनहित के मुद्दों पर उनकी भूमिका अहम होती है। प्रशिक्षण और बेहतर तैयारी के जरिए जनप्रतिनिधि सदन में अपनी जिम्मेदारी ज्यादा प्रभावी तरीके से निभा सकते हैं।
बिहार के विकास पर भी हुई चर्चा
कार्यक्रम के दौरान बिहार में हो रहे विकास कार्यों और राज्य की अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। जदयू प्रवक्ताओं के मुताबिक, विशेषज्ञों ने राज्य में विकास की रफ्तार और कम समय में हुए बदलावों का भी उल्लेख किया।
जदयू ने जनहित को बताया कार्यक्रम का मकसद
जदयू प्रवक्ताओं ने कहा कि पार्टी राज्य के हित और जन कल्याण को प्राथमिकता देती है। उनके मुताबिक, प्रबोधन कार्यक्रम का उद्देश्य पार्टी के विधायकों और विधान पार्षदों को जनहित और राज्य से जुड़े मामलों में ज्यादा जिम्मेदारी के साथ काम करने के लिए तैयार करना है।
आरजेडी के पुराने शासन पर भी साधा निशाना
संयुक्त बयान में जदयू प्रवक्ताओं ने 1990 से 2005 के बीच रहे आरजेडी शासन पर भी राजनीतिक निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौर में लोगों के प्रति जिम्मेदारी और जन कल्याण को प्राथमिकता नहीं दी गई। यह हिस्सा जदयू प्रवक्ताओं के राजनीतिक आरोप के रूप में है।
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