By Malay Ojha | Published: 04 June 2026 at 04:11 PM
देश में पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता कम करने की कोशिशों के बीच वाहन उद्योग में एक नया अध्याय जुड़ गया है। लंबे समय से चर्चा में रही फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक अब आम लोगों तक पहुंचने की तैयारी में है। इसी दिशा में मारुति सुजुकी ने अपनी लोकप्रिय कार वैगनआर का विशेष संस्करण पेश किया है, जो पारंपरिक ईंधन के साथ-साथ अधिक एथेनॉल मिश्रित ईंधन पर भी चल सकेगा। माना जा रहा है कि यह कदम आने वाले वर्षों में भारतीय वाहन बाजार की दिशा बदल सकता है।
फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वाहन अलग-अलग अनुपात में मिले पेट्रोल और एथेनॉल के मिश्रण के अनुसार खुद को ढाल लेता है। नई वैगनआर को इस तरह तैयार किया गया है कि यह ई-85 श्रेणी के ईंधन पर भी आसानी से चल सके। यानी इसमें 85 प्रतिशत एथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण इस्तेमाल किया जा सकता है।
सामान्य गाड़ियों से कितनी अलग है यह कार?
आज बाजार में मौजूद अधिकांश वाहन सीमित मात्रा में एथेनॉल मिश्रित ईंधन के लिए तैयार किए जाते हैं। लेकिन फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक वाली गाड़ियों में इंजन और उससे जुड़े कई महत्वपूर्ण हिस्सों को विशेष रूप से विकसित किया जाता है। यही वजह है कि यह कार ईंधन के बदलते मिश्रण के बावजूद प्रदर्शन में संतुलन बनाए रखती है।
कैसे काम करती है यह तकनीक?
नई वैगनआर में एक उन्नत इलेक्ट्रॉनिक नियंत्रण प्रणाली दी गई है, जो लगातार यह निगरानी करती है कि टैंक में कितना एथेनॉल और कितना पेट्रोल मौजूद है। इसके आधार पर इंजन की कार्यप्रणाली अपने आप बदलती रहती है। परिणामस्वरूप वाहन को अलग-अलग प्रकार के मिश्रित ईंधन पर भी बेहतर प्रदर्शन मिलता है और इंजन की क्षमता प्रभावित नहीं होती।
सरकार एथेनॉल पर इतना जोर क्यों दे रही है?
भारत हर वर्ष बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है, जिस पर भारी विदेशी मुद्रा खर्च होती है। सरकार की योजना है कि एथेनॉल के उपयोग को बढ़ाकर इस खर्च को कम किया जाए। एथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने और अन्य कृषि आधारित उत्पादों से तैयार किया जाता है। ऐसे में इसका उपयोग बढ़ने से किसानों के लिए भी नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
किसानों को कैसे मिलेगा फायदा?
एथेनॉल की मांग बढ़ने का सीधा असर कृषि क्षेत्र पर पड़ सकता है। यदि एथेनॉल उत्पादन बढ़ता है तो गन्ना और अन्य संबंधित फसलों की मांग भी बढ़ेगी। इससे किसानों को बेहतर बाजार मिलने की संभावना है। यही कारण है कि सरकार इसे सिर्फ ईंधन नीति नहीं, बल्कि कृषि और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी बड़ी रणनीति के रूप में देख रही है।
वैगनआर को ही क्यों चुना गया?
मारुति सुजुकी ने अपनी पहली फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक वाली कार के लिए वैगनआर को चुना है। इसकी वजह साफ है। वैगनआर वर्षों से देश की सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली कारों में शामिल रही है। इसका विशाल केबिन, आरामदायक बैठने की व्यवस्था, बेहतर माइलेज और कम रखरखाव खर्च इसे परिवारों की पहली पसंद बनाता है। कंपनी को भरोसा है कि लोकप्रिय मॉडल होने के कारण नई तकनीक को भी ग्राहकों के बीच तेजी से स्वीकार्यता मिलेगी।
कीमत पर क्या पड़ेगा असर?
विशेष तकनीक और उन्नत पुर्जों के कारण इस मॉडल की कीमत सामान्य वैगनआर की तुलना में कुछ अधिक हो सकती है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भविष्य में एथेनॉल आधारित ईंधन की कीमत पेट्रोल से कम रहती है तो वाहन मालिकों को ईंधन खर्च में राहत मिल सकती है। लंबे समय में यह बचत शुरुआती अतिरिक्त कीमत की भरपाई कर सकती है।
आने वाले वर्षों में क्या बदल सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ वर्षों में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ सकती है। जैसे-जैसे एथेनॉल की उपलब्धता बढ़ेगी और ईंधन वितरण व्यवस्था मजबूत होगी, वैसे-वैसे लोग इस तकनीक को अपनाने लगेंगे। कई अन्य वाहन निर्माता कंपनियां भी इस दिशा में काम कर रही हैं और जल्द ही बाजार में ऐसे नए मॉडल देखने को मिल सकते हैं।
क्या यह तकनीक सचमुच भविष्य है?
ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने जैसे कई लक्ष्यों को एक साथ जोड़ने वाली फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक को भविष्य की महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। नई वैगनआर की लॉन्चिंग सिर्फ एक नई कार का आगमन नहीं है, बल्कि यह संकेत भी है कि देश का वाहन उद्योग अब वैकल्पिक ईंधन की ओर तेजी से बढ़ रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि ग्राहक इस बदलाव को कितनी तेजी से अपनाते हैं।

