Saturday, June 13, 2026

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दुनिया में घट रही शराब की मांग, लेकिन भारत पर टिकी हैं बड़ी कंपनियों की उम्मीदें; 2032 तक बन सकता है दूसरा सबसे बड़ा बाजार

By Malay Ojha | Published: 13 June 2026 at 09:17 PM

वैश्विक शराब उद्योग के लिए एक बड़ा बदलाव सामने आ रहा है। जिन देशों पर दशकों तक शराब कंपनियों का कारोबार टिका रहा, वहां अब मांग कमजोर पड़ने लगी है। इसके विपरीत भारत तेजी से ऐसे बाजार के रूप में उभर रहा है, जहां आने वाले वर्षों में शराब की बिक्री लगातार बढ़ सकती है। उद्योग से जुड़े ताजा आकलनों के अनुसार वर्ष 2032 तक भारत दुनिया के सबसे बड़े शराब बाजारों में शामिल हो सकता है और दूसरे स्थान तक पहुंचने की क्षमता रखता है।

शराब उद्योग का केंद्र लंबे समय तक पश्चिमी देशों और पूर्वी एशिया के बड़े बाजार रहे हैं। लेकिन अब बड़ी कंपनियां अपने विस्तार की रणनीति में भारत को सबसे अहम स्थान दे रही हैं। इसका सबसे बड़ा कारण यहां की विशाल युवा आबादी और तेजी से बढ़ती उपभोक्ता क्षमता को माना जा रहा है।

विकसित देशों में कमजोर पड़ रही मांग
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि कई विकसित देशों में शराब की खपत पहले जैसी नहीं रही है। वहां के उपभोक्ताओं की जीवनशैली तेजी से बदल रही है और स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। इसके चलते युवा वर्ग पहले की तुलना में कम शराब का सेवन कर रहा है। यही कारण है कि आने वाले वर्षों में इन बाजारों की वृद्धि दर धीमी रहने की संभावना जताई जा रही है।

बढ़ती महंगाई भी बनी बड़ी वजह
दुनिया के कई देशों में महंगाई लगातार उपभोक्ताओं की जेब पर दबाव बना रही है। आवश्यक खर्च बढ़ने के कारण लोगों के पास वैकल्पिक खर्च के लिए कम पैसा बच रहा है। इसका असर शराब उद्योग पर भी दिखाई दे रहा है। कई बाजारों में बिक्री की रफ्तार पहले की तुलना में कमजोर पड़ गई है।

भारत में अलग दिख रही तस्वीर
भारत का परिदृश्य बाकी देशों से काफी अलग नजर आता है। यहां तेजी से बढ़ता मध्यम वर्ग, आय में वृद्धि और शहरी क्षेत्रों का विस्तार उपभोग क्षमता को बढ़ा रहा है। इसके चलते शराब उद्योग को नए ग्राहक मिल रहे हैं और बाजार का आकार लगातार बढ़ रहा है।

सस्ते से प्रीमियम उत्पादों की ओर बढ़ रहे ग्राहक
विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय उपभोक्ताओं की पसंद में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। पहले जहां कीमत सबसे बड़ा कारक हुआ करती थी, वहीं अब बड़ी संख्या में ग्राहक बेहतर गुणवत्ता और प्रतिष्ठित ब्रांडों की ओर बढ़ रहे हैं। यही वजह है कि कंपनियां प्रीमियम श्रेणी के उत्पादों पर अधिक ध्यान दे रही हैं।

निवेश बढ़ाने की तैयारी में अंतरराष्ट्रीय कंपनियां
भारतीय बाजार की संभावनाओं को देखते हुए कई वैश्विक कंपनियां अपने निवेश की योजनाओं का विस्तार कर रही हैं। उद्योग जगत का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत सिर्फ बिक्री का केंद्र नहीं रहेगा, बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण बाजार बनेगा।

अगले दशक में बड़ा बदलाव संभव
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार यदि वर्तमान वृद्धि दर बनी रहती है तो अगले कुछ वर्षों में भारत वैश्विक शराब उद्योग की दिशा बदल सकता है। मांग में लगातार वृद्धि के कारण भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो सकता है जो उद्योग की कुल वैश्विक वृद्धि को आगे बढ़ाने का काम करेंगे।

चुनौतियां भी कम नहीं
हालांकि बाजार की संभावनाएं मजबूत हैं, लेकिन कंपनियों के सामने कई चुनौतियां भी मौजूद हैं। अलग-अलग राज्यों में अलग नियम, कर व्यवस्था, लाइसेंस प्रणाली और नियंत्रण संबंधी नीतियां कारोबार को जटिल बनाती हैं। कई राज्यों में प्रतिबंधात्मक नीतियां भी उद्योग के विस्तार को प्रभावित करती हैं।

नीति और बाजार के बीच संतुलन की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उद्योग को स्थिर और पारदर्शी नीतिगत वातावरण मिलता है तो भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक शराब बाजार का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। हालांकि इसके लिए उद्योग, सरकार और नियामक संस्थाओं के बीच संतुलन बनाना जरूरी होगा।

दुनिया की निगाहें अब भारत पर
एक समय था जब वैश्विक शराब उद्योग की दिशा पश्चिमी देशों की मांग तय करती थी। अब स्थिति बदल रही है। जब दुनिया के कई बड़े बाजारों में खपत घटने की आशंका है, तब भारत वह देश बनकर उभर रहा है जिस पर उद्योग की भविष्य की वृद्धि काफी हद तक निर्भर करती दिखाई दे रही है।

Breaking Hindi News और ताज़ा अपडेट्स पाएं सबसे पहले Aryavarta Live पर। यहां आपको भारत, पाकिस्तान, अमेरिका समेत दुनिया भर की महत्वपूर्ण खबरें मिलेंगी। खेल, मनोरंजन, व्यापार, टेक्नोलॉजी, क्राइम, उत्तर प्रदेश और बिहार की हर बड़ी खबर पढ़ने के लिए जुड़े रहें Aryavarta Live के साथ।

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दुनिया में घट रही शराब की मांग, लेकिन भारत पर टिकी हैं बड़ी कंपनियों की उम्मीदें; 2032 तक बन सकता है दूसरा सबसे बड़ा बाजार

By Malay Ojha | Published: 13 June 2026 at 09:17 PM

वैश्विक शराब उद्योग के लिए एक बड़ा बदलाव सामने आ रहा है। जिन देशों पर दशकों तक शराब कंपनियों का कारोबार टिका रहा, वहां अब मांग कमजोर पड़ने लगी है। इसके विपरीत भारत तेजी से ऐसे बाजार के रूप में उभर रहा है, जहां आने वाले वर्षों में शराब की बिक्री लगातार बढ़ सकती है। उद्योग से जुड़े ताजा आकलनों के अनुसार वर्ष 2032 तक भारत दुनिया के सबसे बड़े शराब बाजारों में शामिल हो सकता है और दूसरे स्थान तक पहुंचने की क्षमता रखता है।

शराब उद्योग का केंद्र लंबे समय तक पश्चिमी देशों और पूर्वी एशिया के बड़े बाजार रहे हैं। लेकिन अब बड़ी कंपनियां अपने विस्तार की रणनीति में भारत को सबसे अहम स्थान दे रही हैं। इसका सबसे बड़ा कारण यहां की विशाल युवा आबादी और तेजी से बढ़ती उपभोक्ता क्षमता को माना जा रहा है।

विकसित देशों में कमजोर पड़ रही मांग
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि कई विकसित देशों में शराब की खपत पहले जैसी नहीं रही है। वहां के उपभोक्ताओं की जीवनशैली तेजी से बदल रही है और स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। इसके चलते युवा वर्ग पहले की तुलना में कम शराब का सेवन कर रहा है। यही कारण है कि आने वाले वर्षों में इन बाजारों की वृद्धि दर धीमी रहने की संभावना जताई जा रही है।

बढ़ती महंगाई भी बनी बड़ी वजह
दुनिया के कई देशों में महंगाई लगातार उपभोक्ताओं की जेब पर दबाव बना रही है। आवश्यक खर्च बढ़ने के कारण लोगों के पास वैकल्पिक खर्च के लिए कम पैसा बच रहा है। इसका असर शराब उद्योग पर भी दिखाई दे रहा है। कई बाजारों में बिक्री की रफ्तार पहले की तुलना में कमजोर पड़ गई है।

भारत में अलग दिख रही तस्वीर
भारत का परिदृश्य बाकी देशों से काफी अलग नजर आता है। यहां तेजी से बढ़ता मध्यम वर्ग, आय में वृद्धि और शहरी क्षेत्रों का विस्तार उपभोग क्षमता को बढ़ा रहा है। इसके चलते शराब उद्योग को नए ग्राहक मिल रहे हैं और बाजार का आकार लगातार बढ़ रहा है।

सस्ते से प्रीमियम उत्पादों की ओर बढ़ रहे ग्राहक
विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय उपभोक्ताओं की पसंद में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। पहले जहां कीमत सबसे बड़ा कारक हुआ करती थी, वहीं अब बड़ी संख्या में ग्राहक बेहतर गुणवत्ता और प्रतिष्ठित ब्रांडों की ओर बढ़ रहे हैं। यही वजह है कि कंपनियां प्रीमियम श्रेणी के उत्पादों पर अधिक ध्यान दे रही हैं।

निवेश बढ़ाने की तैयारी में अंतरराष्ट्रीय कंपनियां
भारतीय बाजार की संभावनाओं को देखते हुए कई वैश्विक कंपनियां अपने निवेश की योजनाओं का विस्तार कर रही हैं। उद्योग जगत का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत सिर्फ बिक्री का केंद्र नहीं रहेगा, बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण बाजार बनेगा।

अगले दशक में बड़ा बदलाव संभव
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार यदि वर्तमान वृद्धि दर बनी रहती है तो अगले कुछ वर्षों में भारत वैश्विक शराब उद्योग की दिशा बदल सकता है। मांग में लगातार वृद्धि के कारण भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो सकता है जो उद्योग की कुल वैश्विक वृद्धि को आगे बढ़ाने का काम करेंगे।

चुनौतियां भी कम नहीं
हालांकि बाजार की संभावनाएं मजबूत हैं, लेकिन कंपनियों के सामने कई चुनौतियां भी मौजूद हैं। अलग-अलग राज्यों में अलग नियम, कर व्यवस्था, लाइसेंस प्रणाली और नियंत्रण संबंधी नीतियां कारोबार को जटिल बनाती हैं। कई राज्यों में प्रतिबंधात्मक नीतियां भी उद्योग के विस्तार को प्रभावित करती हैं।

नीति और बाजार के बीच संतुलन की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उद्योग को स्थिर और पारदर्शी नीतिगत वातावरण मिलता है तो भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक शराब बाजार का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। हालांकि इसके लिए उद्योग, सरकार और नियामक संस्थाओं के बीच संतुलन बनाना जरूरी होगा।

दुनिया की निगाहें अब भारत पर
एक समय था जब वैश्विक शराब उद्योग की दिशा पश्चिमी देशों की मांग तय करती थी। अब स्थिति बदल रही है। जब दुनिया के कई बड़े बाजारों में खपत घटने की आशंका है, तब भारत वह देश बनकर उभर रहा है जिस पर उद्योग की भविष्य की वृद्धि काफी हद तक निर्भर करती दिखाई दे रही है।

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