Monday, June 8, 2026

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बीजेपी विधायक राजू सिंह दोषी करार, अब जा सकती है बिहार विधानसभा सदस्यता; अदालत के फैसले के बाद बढ़ी सियासी मुश्किलें

By Malay Ojha | Published: 08 June 2026 at 01:01 PM

बिहार के साहेबगंज विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के विधायक और पूर्व मंत्री राजू कुमार सिंह की राजनीतिक मुश्किलें बढ़ गई हैं। नई दिल्ली की एक अदालत ने वर्ष 2018 में फार्महाउस पर हुई गोलीबारी के दौरान एक महिला की मौत के मामले में उन्हें गैर-इरादतन हत्या का दोषी ठहराया है। अब सबकी नजर सजा पर टिकी है, क्योंकि यदि उन्हें दो वर्ष से अधिक की सजा सुनाई जाती है तो उनकी विधानसभा सदस्यता भी समाप्त हो सकती है।

अदालत ने राजू कुमार सिंह को गैर-इरादतन हत्या और हथियार संबंधी नियमों के उल्लंघन का दोषी माना है। फैसले के बाद उन्हें हिरासत में लेने का आदेश भी दिया गया। अब आगामी सुनवाई में सजा की अवधि तय की जाएगी, जिससे उनके राजनीतिक भविष्य पर बड़ा असर पड़ सकता है।

सदस्यता बचाने की चुनौती
जनप्रतिनिधियों से जुड़े कानून के अनुसार यदि किसी विधायक या सांसद को दो वर्ष या उससे अधिक की सजा होती है तो उसकी सदस्यता समाप्त हो सकती है। ऐसे में सजा का फैसला राजू सिंह के राजनीतिक करियर के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। हालांकि उन्हें उच्च न्यायालय में चुनौती देने का कानूनी अधिकार प्राप्त रहेगा।

क्या था पूरा मामला?
यह मामला वर्ष 2018 की नववर्ष पार्टी से जुड़ा है। दक्षिणी दिल्ली के फतेहपुर बेरी इलाके में स्थित फार्महाउस में आयोजित समारोह के दौरान कथित रूप से हुई फायरिंग में डॉ. अर्चना गुप्ता की मौत हो गई थी। घटना के बाद मामला अदालत पहुंचा और लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद अब फैसला सामने आया है।

अन्य आरोपियों को मिली राहत
मामले में विधायक की पत्नी रेनू सिंह के अलावा राणा राजेश सिंह और रामेंद्र सिंह भी आरोपी बनाए गए थे। इन पर सबूत मिटाने से जुड़े आरोप लगाए गए थे। हालांकि अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तीनों को बरी कर दिया।

किन धाराओं में दोषी ठहराए गए विधायक?
अदालत ने राजू कुमार सिंह को भारतीय दंड संहिता की धारा 304 (भाग-2) और शस्त्र अधिनियम की धारा 30 के तहत दोषी माना है। दोनों धाराओं के तहत सजा का प्रावधान अलग-अलग है और अदालत सजा तय करते समय मामले की परिस्थितियों को ध्यान में रखेगी।

गैर-इरादतन हत्या की धारा में कितनी सजा?
धारा 304 (भाग-2) ऐसे मामलों पर लागू होती है, जहां आरोपी को यह जानकारी होती है कि उसके कृत्य से किसी की जान जा सकती है, लेकिन हत्या करने का स्पष्ट इरादा साबित नहीं होता। इस अपराध में अधिकतम दस वर्ष तक कारावास, जुर्माना या दोनों सजाएं दी जा सकती हैं।

शस्त्र अधिनियम की धारा क्या कहती है?
शस्त्र लाइसेंस की शर्तों या नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामलों में धारा 30 लागू होती है। इस धारा के तहत छह महीने तक की कैद, आर्थिक दंड या दोनों प्रकार की सजा का प्रावधान है।

आगे क्या होगा?
अब अदालत सजा के बिंदु पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनेगी। इसके बाद तय होगा कि राजू सिंह को कितनी सजा दी जाएगी। यदि सजा दो वर्ष से अधिक हुई तो उनकी विधानसभा सदस्यता पर संकट लगभग तय माना जा रहा है। ऐसे में आने वाला फैसला केवल कानूनी ही नहीं बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण होगा।

बिहार की राजनीति पर असर
राजू सिंह बिहार की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं और मंत्री पद भी संभाल चुके हैं। ऐसे में अदालत का यह फैसला विपक्ष और सत्तापक्ष दोनों के लिए चर्चा का विषय बन गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सजा का अंतिम निर्णय क्षेत्रीय राजनीति के समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।

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बीजेपी विधायक राजू सिंह दोषी करार, अब जा सकती है बिहार विधानसभा सदस्यता; अदालत के फैसले के बाद बढ़ी सियासी मुश्किलें

By Malay Ojha | Published: 08 June 2026 at 01:01 PM

बिहार के साहेबगंज विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के विधायक और पूर्व मंत्री राजू कुमार सिंह की राजनीतिक मुश्किलें बढ़ गई हैं। नई दिल्ली की एक अदालत ने वर्ष 2018 में फार्महाउस पर हुई गोलीबारी के दौरान एक महिला की मौत के मामले में उन्हें गैर-इरादतन हत्या का दोषी ठहराया है। अब सबकी नजर सजा पर टिकी है, क्योंकि यदि उन्हें दो वर्ष से अधिक की सजा सुनाई जाती है तो उनकी विधानसभा सदस्यता भी समाप्त हो सकती है।

अदालत ने राजू कुमार सिंह को गैर-इरादतन हत्या और हथियार संबंधी नियमों के उल्लंघन का दोषी माना है। फैसले के बाद उन्हें हिरासत में लेने का आदेश भी दिया गया। अब आगामी सुनवाई में सजा की अवधि तय की जाएगी, जिससे उनके राजनीतिक भविष्य पर बड़ा असर पड़ सकता है।

सदस्यता बचाने की चुनौती
जनप्रतिनिधियों से जुड़े कानून के अनुसार यदि किसी विधायक या सांसद को दो वर्ष या उससे अधिक की सजा होती है तो उसकी सदस्यता समाप्त हो सकती है। ऐसे में सजा का फैसला राजू सिंह के राजनीतिक करियर के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। हालांकि उन्हें उच्च न्यायालय में चुनौती देने का कानूनी अधिकार प्राप्त रहेगा।

क्या था पूरा मामला?
यह मामला वर्ष 2018 की नववर्ष पार्टी से जुड़ा है। दक्षिणी दिल्ली के फतेहपुर बेरी इलाके में स्थित फार्महाउस में आयोजित समारोह के दौरान कथित रूप से हुई फायरिंग में डॉ. अर्चना गुप्ता की मौत हो गई थी। घटना के बाद मामला अदालत पहुंचा और लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद अब फैसला सामने आया है।

अन्य आरोपियों को मिली राहत
मामले में विधायक की पत्नी रेनू सिंह के अलावा राणा राजेश सिंह और रामेंद्र सिंह भी आरोपी बनाए गए थे। इन पर सबूत मिटाने से जुड़े आरोप लगाए गए थे। हालांकि अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तीनों को बरी कर दिया।

किन धाराओं में दोषी ठहराए गए विधायक?
अदालत ने राजू कुमार सिंह को भारतीय दंड संहिता की धारा 304 (भाग-2) और शस्त्र अधिनियम की धारा 30 के तहत दोषी माना है। दोनों धाराओं के तहत सजा का प्रावधान अलग-अलग है और अदालत सजा तय करते समय मामले की परिस्थितियों को ध्यान में रखेगी।

गैर-इरादतन हत्या की धारा में कितनी सजा?
धारा 304 (भाग-2) ऐसे मामलों पर लागू होती है, जहां आरोपी को यह जानकारी होती है कि उसके कृत्य से किसी की जान जा सकती है, लेकिन हत्या करने का स्पष्ट इरादा साबित नहीं होता। इस अपराध में अधिकतम दस वर्ष तक कारावास, जुर्माना या दोनों सजाएं दी जा सकती हैं।

शस्त्र अधिनियम की धारा क्या कहती है?
शस्त्र लाइसेंस की शर्तों या नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामलों में धारा 30 लागू होती है। इस धारा के तहत छह महीने तक की कैद, आर्थिक दंड या दोनों प्रकार की सजा का प्रावधान है।

आगे क्या होगा?
अब अदालत सजा के बिंदु पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनेगी। इसके बाद तय होगा कि राजू सिंह को कितनी सजा दी जाएगी। यदि सजा दो वर्ष से अधिक हुई तो उनकी विधानसभा सदस्यता पर संकट लगभग तय माना जा रहा है। ऐसे में आने वाला फैसला केवल कानूनी ही नहीं बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण होगा।

बिहार की राजनीति पर असर
राजू सिंह बिहार की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं और मंत्री पद भी संभाल चुके हैं। ऐसे में अदालत का यह फैसला विपक्ष और सत्तापक्ष दोनों के लिए चर्चा का विषय बन गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सजा का अंतिम निर्णय क्षेत्रीय राजनीति के समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।

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