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कल्पना पटवारी का छठ गीत ‘जगत के पालक दीनानाथ’ रिलीज, पांच भाषाओं के सात गीतों से सजेगी छठ गीतमाला

By Malay Ojha | Published: 05 November 2026 at 01:38 PM

लोकगायिका कल्पना पटवारी ने छठ महापर्व से पहले अपने नए गीत ‘जगत के पालक दीनानाथ’ से छठ गीतमाला की शुरुआत की है। गीत रिलीज होते ही श्रोताओं के बीच चर्चा में आ गया है। म्यूजिक बॉक्स कल्पना पटवारी ऑफिशियल यूट्यूब चैनल पर जारी इस गीत में छठ व्रती की पीड़ा, भगवान सूर्य के प्रति अटूट विश्वास और उनसे सुख-समृद्धि की प्रार्थना को भावपूर्ण अंदाज में पेश किया गया है।

सूर्यदेव से अपनी पीड़ा सुनाती नजर आईं व्रती
भोजपुरी गीत ‘जगत के पालक दीनानाथ’ में एक छठ व्रती भगवान सूर्य को संसार का पालनकर्ता मानकर उनसे अपनी व्यथा कहती है। जीवन की परेशानियों और अंधकार के बीच वह सूर्यदेव से उम्मीद की नई किरण मांगती है। गीत का भाव यह है कि जो दीन-दुखियों की पुकार सुनते हैं, वे उसकी प्रार्थना भी जरूर स्वीकार करेंगे।

सात गीतों की श्रृंखला में पहला है यह गीत
‘ए लिविंग ट्रेडिशन’ नाम से तैयार छठ गीतमाला में कल्पना पटवारी ने अपनी आवाज दी है। इसके बोल हृदय नारायण झा ने लिखे हैं, जबकि धुन कल्पना पटवारी ने तैयार की है। संगीत संयोजन अर्जित श्रीवास्तव का है। गीत में गिटार, स्ट्रोक्स और बेस की जिम्मेदारी सुमन बागानी ने संभाली है।

कल्पना पटवारी ने बताया गीत का भाव
कल्पना पटवारी के मुताबिक, इस गीत के जरिए छठ व्रती की भक्ति, समर्पण और भगवान सूर्य के प्रति विश्वास को आवाज देने की कोशिश की गई है। गीत में व्रती खुद को असहाय महसूस करते हुए सूर्यदेव की महिमा और उनकी कृपा से जीवन में आए बदलावों को याद करती है। उसे भरोसा है कि जिस तरह सूर्यदेव ने दुखियों को सुख और निराश लोगों को उम्मीद दी है, उसी तरह उसकी पुकार भी अनसुनी नहीं रहेगी।

यूनेस्को की विरासत सूची में छठ को शामिल कराने की पहल
छठ महापर्व को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में जगह दिलाने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (इन्टैक) की ओर से तैयार डोजियर वर्ष 2026 में यूनेस्को को भेजा गया है। इसमें गीतकार हृदय नारायण झा द्वारा संकलित छठगीतों को भी शामिल किया गया है।

इन्टैक की पुस्तक ‘छठगीत (सर्व सौभाग्यदायकम्)’ में मैथिली, भोजपुरी, मगही, अंगिका और बज्जिका के पारंपरिक गीतों के साथ हृदय नारायण झा के लिखे गीत भी संकलित हैं।

पांच भाषाओं में सुनाई देगी छठ की लोकपरंपरा
इसी पुस्तक में शामिल सात गीतों को कल्पना पटवारी ने अपनी आवाज में तैयार किया है। ‘छठ गीतमाला – ए लिविंग ट्रेडिशन’ के नाम से यह संगीतमय संकलन इस साल छठ महापर्व के अवसर पर रिलीज किया जाएगा। ‘जगत के पालक दीनानाथ’ इस श्रृंखला का पहला गीत है।

इस संकलन में मैथिली के दो गीत ‘चारि पहर राति जल थल सेविलहुँ’ और ‘कातिक मास इजोरिया’, भोजपुरी का ‘दरसन माँगीला तोहार’, मगही का ‘छोटी मुटी मालिन बेटी’, अंगिका का ‘छठि मइया अइतई अंगनमा’ और बज्जिका का ‘रिमझिम बुन्दवा बरसि गेल’ शामिल हैं।

पांच भाषाओं के इन सात गीतों के जरिए छठ की अलग-अलग क्षेत्रीय परंपराओं, लोकविश्वास और आस्था को संगीत के माध्यम से सामने लाने की कोशिश की गई है। कल्पना पटवारी की आवाज में तैयार यह संकलन छठ के पारंपरिक गीतों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में भी अहम पहल है।

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कल्पना पटवारी का छठ गीत ‘जगत के पालक दीनानाथ’ रिलीज, पांच भाषाओं के सात गीतों से सजेगी छठ गीतमाला

By Malay Ojha | Published: 05 November 2026 at 01:38 PM

लोकगायिका कल्पना पटवारी ने छठ महापर्व से पहले अपने नए गीत ‘जगत के पालक दीनानाथ’ से छठ गीतमाला की शुरुआत की है। गीत रिलीज होते ही श्रोताओं के बीच चर्चा में आ गया है। म्यूजिक बॉक्स कल्पना पटवारी ऑफिशियल यूट्यूब चैनल पर जारी इस गीत में छठ व्रती की पीड़ा, भगवान सूर्य के प्रति अटूट विश्वास और उनसे सुख-समृद्धि की प्रार्थना को भावपूर्ण अंदाज में पेश किया गया है।

सूर्यदेव से अपनी पीड़ा सुनाती नजर आईं व्रती
भोजपुरी गीत ‘जगत के पालक दीनानाथ’ में एक छठ व्रती भगवान सूर्य को संसार का पालनकर्ता मानकर उनसे अपनी व्यथा कहती है। जीवन की परेशानियों और अंधकार के बीच वह सूर्यदेव से उम्मीद की नई किरण मांगती है। गीत का भाव यह है कि जो दीन-दुखियों की पुकार सुनते हैं, वे उसकी प्रार्थना भी जरूर स्वीकार करेंगे।

सात गीतों की श्रृंखला में पहला है यह गीत
‘ए लिविंग ट्रेडिशन’ नाम से तैयार छठ गीतमाला में कल्पना पटवारी ने अपनी आवाज दी है। इसके बोल हृदय नारायण झा ने लिखे हैं, जबकि धुन कल्पना पटवारी ने तैयार की है। संगीत संयोजन अर्जित श्रीवास्तव का है। गीत में गिटार, स्ट्रोक्स और बेस की जिम्मेदारी सुमन बागानी ने संभाली है।

कल्पना पटवारी ने बताया गीत का भाव
कल्पना पटवारी के मुताबिक, इस गीत के जरिए छठ व्रती की भक्ति, समर्पण और भगवान सूर्य के प्रति विश्वास को आवाज देने की कोशिश की गई है। गीत में व्रती खुद को असहाय महसूस करते हुए सूर्यदेव की महिमा और उनकी कृपा से जीवन में आए बदलावों को याद करती है। उसे भरोसा है कि जिस तरह सूर्यदेव ने दुखियों को सुख और निराश लोगों को उम्मीद दी है, उसी तरह उसकी पुकार भी अनसुनी नहीं रहेगी।

यूनेस्को की विरासत सूची में छठ को शामिल कराने की पहल
छठ महापर्व को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में जगह दिलाने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (इन्टैक) की ओर से तैयार डोजियर वर्ष 2026 में यूनेस्को को भेजा गया है। इसमें गीतकार हृदय नारायण झा द्वारा संकलित छठगीतों को भी शामिल किया गया है।

इन्टैक की पुस्तक ‘छठगीत (सर्व सौभाग्यदायकम्)’ में मैथिली, भोजपुरी, मगही, अंगिका और बज्जिका के पारंपरिक गीतों के साथ हृदय नारायण झा के लिखे गीत भी संकलित हैं।

पांच भाषाओं में सुनाई देगी छठ की लोकपरंपरा
इसी पुस्तक में शामिल सात गीतों को कल्पना पटवारी ने अपनी आवाज में तैयार किया है। ‘छठ गीतमाला – ए लिविंग ट्रेडिशन’ के नाम से यह संगीतमय संकलन इस साल छठ महापर्व के अवसर पर रिलीज किया जाएगा। ‘जगत के पालक दीनानाथ’ इस श्रृंखला का पहला गीत है।

इस संकलन में मैथिली के दो गीत ‘चारि पहर राति जल थल सेविलहुँ’ और ‘कातिक मास इजोरिया’, भोजपुरी का ‘दरसन माँगीला तोहार’, मगही का ‘छोटी मुटी मालिन बेटी’, अंगिका का ‘छठि मइया अइतई अंगनमा’ और बज्जिका का ‘रिमझिम बुन्दवा बरसि गेल’ शामिल हैं।

पांच भाषाओं के इन सात गीतों के जरिए छठ की अलग-अलग क्षेत्रीय परंपराओं, लोकविश्वास और आस्था को संगीत के माध्यम से सामने लाने की कोशिश की गई है। कल्पना पटवारी की आवाज में तैयार यह संकलन छठ के पारंपरिक गीतों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में भी अहम पहल है।

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