By Malay Ojha | Published: 03 October 2026 at 06:02 AM
दिल्ली में महिला सुरक्षा को लेकर छात्राओं के विरोध प्रदर्शन के बीच एक चुटीला नारा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। प्रदर्शन में सुनाई दे रहा है- ‘एक कचौड़ी, दो समोसा, इन मर्दों का क्या भरोसा’। नारे की तुकबंदी भले ही लोगों को मजेदार लग रही हो, लेकिन इसके पीछे छात्राओं का मुद्दा गंभीर है। वे सुरक्षित सार्वजनिक जगहों और महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर जवाबदेही की मांग कर रही हैं।
दिल्ली विश्वविद्यालय के अलग-अलग कॉलेजों की छात्राएं हाल के दिनों में कई मार्च निकाल चुकी हैं। इनमें लेडी श्रीराम कॉलेज, गार्गी कॉलेज, मिरांडा हाउस और दूसरे संस्थानों की छात्राएं शामिल रहीं। प्रदर्शनों में करीब 200 छात्रों की भागीदारी की रिपोर्ट सामने आई है। छात्राओं ने बेहतर स्ट्रीट लाइटिंग, सुरक्षित पब्लिक ट्रांसपोर्ट और सार्वजनिक जगहों पर सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है।0
‘कचौड़ी-समोसा’ नारे की कहानी
इस नारे की खास बात यह है कि इसकी तुकबंदी का संबंध लोकप्रिय टीवी शो ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ के पुराने एक एपिसोड से जोड़ा जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, गोकुलधाम प्रीमियर लीग से जुड़े एक सीन में ‘एक कचौड़ी, दो समोसा’ वाली लाइन सुनाई देती है। सोशल मीडिया यूजर्स ने इसी पुराने डायलॉग और मौजूदा प्रदर्शन के नारे के बीच समानता पकड़ी, जिसके बाद यह कनेक्शन भी चर्चा में आ गया।
मीम कल्चर से प्रदर्शन तक
सोशल मीडिया के दौर में विरोध प्रदर्शन के तरीके भी बदल रहे हैं। गंभीर मुद्दों के साथ मीम, तुकबंदी और इंटरनेट की भाषा इस्तेमाल करने का चलन युवाओं के बीच बढ़ा है। दिल्ली के हालिया महिला सुरक्षा प्रदर्शनों में भी हाथ से बनाए पोस्टर, इंटरनेट स्लैंग और अलग-अलग तरह के नारे देखने को मिले। इसका मकसद प्रदर्शन के संदेश को ज्यादा लोगों तक पहुंचाना भी है।
नारे के पीछे क्या संदेश?
‘एक कचौड़ी, दो समोसा’ वाला नारा महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा और छेड़छाड़ जैसे मुद्दों पर व्यंग्य के जरिए सवाल उठाता है। प्रदर्शनकारी छात्राएं यह मुद्दा भी उठा रही हैं कि किसी अपराध के बाद महिलाओं की आवाजाही पर पाबंदी, हॉस्टल कर्फ्यू या घर में रहने की सलाह को सुरक्षा का एकमात्र रास्ता नहीं माना जाना चाहिए। उनका जोर सुरक्षित माहौल और सार्वजनिक जगहों तक महिलाओं की बराबर पहुंच पर है।
कालकाजी की घटना के बाद तेज हुआ आंदोलन
इन प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में दक्षिण दिल्ली के कालकाजी इलाके में 17 वर्षीय लड़की से कथित सामूहिक दुष्कर्म की घटना है। इसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के कई कॉलेजों की छात्राओं ने विरोध मार्च निकाले। छात्रों ने आसपास की सड़कों, पार्कों और कॉलेजों के पास रोशनी, पुलिस गश्त और सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल उठाए।
सुरक्षा के नाम पर पाबंदी पर भी सवाल
छात्राओं की मांग सिर्फ सुरक्षा बढ़ाने तक सीमित नहीं है। प्रदर्शनों में इस बात पर भी सवाल उठाया गया कि अपराध के बाद लड़कियों की आजादी और आवाजाही पर रोक लगाने के बजाय उन जगहों और व्यवस्थाओं को सुरक्षित किया जाए, जहां वे पढ़ाई, काम या रोजमर्रा की जिंदगी के लिए जाती हैं। इसी वजह से ‘सुरक्षित सड़क, सुरक्षित सार्वजनिक जगह और खुलकर जीने का अधिकार’ प्रदर्शन के प्रमुख मुद्दों में शामिल है।
Aryavarta Live के WhatsApp Channel से जुड़ें और हर महत्वपूर्ण अपडेट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।
WhatsApp चैनल जॉइन करें

