By Malay Ojha | Published: 29 June 2026 at 04:04 PM
ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल नहीं होंगे। सूत्रों के मुताबिक, भारत सरकार की ओर से बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा तेहरान में आयोजित अंतिम संस्कार समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। यह कार्यक्रम चार और पांच जुलाई को आयोजित किया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, ईरान सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को व्यक्तिगत तौर पर अंतिम संस्कार में शामिल होने का निमंत्रण भेजा था। हालांकि, प्रधानमंत्री इस कार्यक्रम में नहीं जाएंगे। उनकी जगह बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा भारत की ओर से तेहरान पहुंचेंगे।
चार जुलाई से शुरू होंगी अंतिम रस्में
खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़ी रस्मों की शुरुआत चार जुलाई को तेहरान के ग्रैंड मोसाला परिसर में होगी। यहां उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा, जहां देश-विदेश से आने वाले लोग श्रद्धांजलि देंगे।
तेहरान और कुम में निकलेगा जुलूस
अंतिम दर्शन के बाद तेहरान और कुम शहर में सार्वजनिक जुलूस निकाले जाने की तैयारी है। इसके अलावा इराक के नजफ और कर्बला में भी उनके सम्मान में विशेष दुआओं का आयोजन किया जाएगा। ईरान सरकार इस पूरे कार्यक्रम को ऐतिहासिक और राष्ट्रीय महत्व का आयोजन मान रही है।
करीब चार महीने बाद होगा अंतिम संस्कार
सूत्रों के मुताबिक, अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत इसी साल फरवरी में अमेरिकी और इजराइली हमले के दौरान हुई थी। उस समय ईरान के कई वरिष्ठ नेता और उनके परिवार के सदस्य भी हमले की चपेट में आ गए थे। हालांकि, क्षेत्रीय तनाव और लगातार जारी संघर्ष के कारण अंतिम संस्कार को तत्काल आयोजित नहीं किया जा सका।
मार्च में होना था अंतिम संस्कार
पहले खामेनेई का अंतिम संस्कार मार्च में प्रस्तावित था, लेकिन अमेरिका और इजराइल के साथ बढ़ते सैन्य तनाव के कारण कार्यक्रम को स्थगित कर दिया गया। अब जुलाई की शुरुआत में कई दिनों तक चलने वाले धार्मिक और सरकारी कार्यक्रमों के बीच अंतिम संस्कार की रस्में पूरी की जाएंगी।
ईरान की राजनीति में बड़ा नाम थे खामेनेई
साल 1989 में अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी के निधन के बाद अली खामेनेई ने ईरान की कमान संभाली थी। तीन दशक से ज्यादा समय तक उन्होंने देश की राजनीति, विदेश नीति और धार्मिक व्यवस्था पर गहरी छाप छोड़ी। उनकी गिनती दुनिया के सबसे प्रभावशाली नेताओं में होती रही।
दुनिया की नजरें तेहरान पर
खामेनेई के अंतिम संस्कार में कई देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। ऐसे में तेहरान में होने वाला यह आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक बड़ा कूटनीतिक मंच भी माना जा रहा है। भारत की ओर से भेजे जा रहे प्रतिनिधियों पर भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर रहेगी।
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