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चारा घोटाला: सुप्रीम कोर्ट से लालू प्रसाद यादव को बड़ी राहत, जमानत बरकरार; 6 महीने में अपील पर फैसला होगा

By Malay Ojha | Published: 14 July 2026 at 04:36 PM

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को चारा घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सर्वोच्च अदालत ने उनकी जमानत रद्द करने और सजा पर लगी रोक हटाने की मांग खारिज कर दी है। अदालत ने साफ कहा कि कई वर्षों से प्रभावी जमानत में इस समय हस्तक्षेप करने की जरूरत नहीं है। हालांकि, अदालत ने झारखंड उच्च न्यायालय को निर्देश दिया है कि लालू यादव और अन्य दोषियों की अपीलों की सुनवाई अगले छह महीने के भीतर पूरी की जाए। इस आदेश के बाद फिलहाल लालू यादव को मिली राहत बरकरार रहेगी, जबकि मामले के अंतिम नतीजे की दिशा में सुनवाई तेज होने की उम्मीद है।

यह मामला उस याचिका से जुड़ा था, जिसे प्रवर्तन निदेशालय ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया था। एजेंसी का कहना था कि लालू प्रसाद यादव को मिली जमानत समाप्त की जाए और उनकी सजा पर लगी रोक भी हटाई जाए। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील से सहमति नहीं जताई।

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि जब किसी आरोपी को लंबे समय से जमानत मिली हुई है और वह न्यायिक प्रक्रिया का पालन कर रहा है, तब केवल लंबित अपील के आधार पर जमानत रद्द करना उचित नहीं माना जा सकता। इसी कारण अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय की मांग अस्वीकार कर दी।

उच्च न्यायालय को तय समय में सुनवाई पूरी करने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी माना कि अपील का वर्षों तक लंबित रहना न्यायिक प्रक्रिया के लिहाज से उचित नहीं है। इसी वजह से अदालत ने झारखंड उच्च न्यायालय को निर्देश दिया कि लालू प्रसाद यादव और अन्य दोषियों की अपीलों का निस्तारण छह महीने के भीतर किया जाए। अदालत के इस निर्देश का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लंबे समय से लंबित मामले का अंतिम फैसला जल्द सामने आए और सभी पक्षों को न्यायिक प्रक्रिया का समयबद्ध परिणाम मिल सके।

साल 2021 में मिली थी जमानत
चारा घोटाला मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद लालू प्रसाद यादव ने अपनी सजा के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील दाखिल की थी। हालांकि, अपील पर सुनवाई पूरी नहीं हो सकी और मामला लगातार लंबित रहा। इसी स्थिति को देखते हुए वर्ष 2021 में उन्हें जमानत दी गई थी। उस समय अदालत ने कहा था कि जब तक अपील पर अंतिम फैसला नहीं हो जाता, तब तक उन्हें जमानत पर रहने की अनुमति रहेगी। इसके बाद से लालू यादव जमानत की शर्तों का पालन करते हुए बाहर हैं।

क्या है पूरा चारा घोटाला मामला?
चारा घोटाला देश के सबसे चर्चित भ्रष्टाचार मामलों में से एक माना जाता है। आरोप है कि पशुपालन विभाग से फर्जी बिलों और कागजी दस्तावेजों के जरिए सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये की अवैध निकासी की गई थी। इस मामले की जांच के बाद कई अधिकारियों, कर्मचारियों और नेताओं के खिलाफ मुकदमे चले। अलग-अलग कोषागारों से जुड़ी निकासी को अलग-अलग मामलों में विभाजित किया गया। इन्हीं मामलों में लालू प्रसाद यादव को भी दोषी ठहराया गया था और उन्हें सजा सुनाई गई थी।

आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद लालू प्रसाद यादव की जमानत फिलहाल जारी रहेगी। अब सबकी नजर झारखंड उच्च न्यायालय पर होगी, जहां उनकी सजा के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई तय समयसीमा के भीतर पूरी की जानी है। यदि उच्च न्यायालय अपील पर फैसला सुनाता है तो उसी के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने यह स्पष्ट कर दिया है कि लंबित अपील के दौरान दी गई जमानत में तत्काल हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा, लेकिन मामले के अंतिम निपटारे में अब और देरी नहीं होनी चाहिए।

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चारा घोटाला: सुप्रीम कोर्ट से लालू प्रसाद यादव को बड़ी राहत, जमानत बरकरार; 6 महीने में अपील पर फैसला होगा

By Malay Ojha | Published: 14 July 2026 at 04:36 PM

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को चारा घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सर्वोच्च अदालत ने उनकी जमानत रद्द करने और सजा पर लगी रोक हटाने की मांग खारिज कर दी है। अदालत ने साफ कहा कि कई वर्षों से प्रभावी जमानत में इस समय हस्तक्षेप करने की जरूरत नहीं है। हालांकि, अदालत ने झारखंड उच्च न्यायालय को निर्देश दिया है कि लालू यादव और अन्य दोषियों की अपीलों की सुनवाई अगले छह महीने के भीतर पूरी की जाए। इस आदेश के बाद फिलहाल लालू यादव को मिली राहत बरकरार रहेगी, जबकि मामले के अंतिम नतीजे की दिशा में सुनवाई तेज होने की उम्मीद है।

यह मामला उस याचिका से जुड़ा था, जिसे प्रवर्तन निदेशालय ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया था। एजेंसी का कहना था कि लालू प्रसाद यादव को मिली जमानत समाप्त की जाए और उनकी सजा पर लगी रोक भी हटाई जाए। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील से सहमति नहीं जताई।

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि जब किसी आरोपी को लंबे समय से जमानत मिली हुई है और वह न्यायिक प्रक्रिया का पालन कर रहा है, तब केवल लंबित अपील के आधार पर जमानत रद्द करना उचित नहीं माना जा सकता। इसी कारण अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय की मांग अस्वीकार कर दी।

उच्च न्यायालय को तय समय में सुनवाई पूरी करने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी माना कि अपील का वर्षों तक लंबित रहना न्यायिक प्रक्रिया के लिहाज से उचित नहीं है। इसी वजह से अदालत ने झारखंड उच्च न्यायालय को निर्देश दिया कि लालू प्रसाद यादव और अन्य दोषियों की अपीलों का निस्तारण छह महीने के भीतर किया जाए। अदालत के इस निर्देश का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लंबे समय से लंबित मामले का अंतिम फैसला जल्द सामने आए और सभी पक्षों को न्यायिक प्रक्रिया का समयबद्ध परिणाम मिल सके।

साल 2021 में मिली थी जमानत
चारा घोटाला मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद लालू प्रसाद यादव ने अपनी सजा के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील दाखिल की थी। हालांकि, अपील पर सुनवाई पूरी नहीं हो सकी और मामला लगातार लंबित रहा। इसी स्थिति को देखते हुए वर्ष 2021 में उन्हें जमानत दी गई थी। उस समय अदालत ने कहा था कि जब तक अपील पर अंतिम फैसला नहीं हो जाता, तब तक उन्हें जमानत पर रहने की अनुमति रहेगी। इसके बाद से लालू यादव जमानत की शर्तों का पालन करते हुए बाहर हैं।

क्या है पूरा चारा घोटाला मामला?
चारा घोटाला देश के सबसे चर्चित भ्रष्टाचार मामलों में से एक माना जाता है। आरोप है कि पशुपालन विभाग से फर्जी बिलों और कागजी दस्तावेजों के जरिए सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये की अवैध निकासी की गई थी। इस मामले की जांच के बाद कई अधिकारियों, कर्मचारियों और नेताओं के खिलाफ मुकदमे चले। अलग-अलग कोषागारों से जुड़ी निकासी को अलग-अलग मामलों में विभाजित किया गया। इन्हीं मामलों में लालू प्रसाद यादव को भी दोषी ठहराया गया था और उन्हें सजा सुनाई गई थी।

आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद लालू प्रसाद यादव की जमानत फिलहाल जारी रहेगी। अब सबकी नजर झारखंड उच्च न्यायालय पर होगी, जहां उनकी सजा के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई तय समयसीमा के भीतर पूरी की जानी है। यदि उच्च न्यायालय अपील पर फैसला सुनाता है तो उसी के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने यह स्पष्ट कर दिया है कि लंबित अपील के दौरान दी गई जमानत में तत्काल हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा, लेकिन मामले के अंतिम निपटारे में अब और देरी नहीं होनी चाहिए।

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