By Malay Ojha | Published: 08 June 2026 at 11:00 AM
राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (स्नातक) के री-एग्जाम को लेकर इस बार अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। प्रश्नपत्र की गोपनीयता बनाए रखने के लिए प्रश्नपत्र तैयार करने वाले विशेषज्ञों, अनुवादकों और अन्य संवेदनशील जिम्मेदारियों से जुड़े कर्मचारियों को विशेष सुरक्षित स्थानों पर रखा गया है। परीक्षा पूरी होने तक उनके बाहरी संपर्क पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी ताकि किसी भी प्रकार की सूचना लीक होने की आशंका को समाप्त किया जा सके।
शिक्षा मंत्रालय और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने री-एग्जाम की तैयारियों को लेकर बहुस्तरीय सुरक्षा ढांचा तैयार किया है। अधिकारियों के अनुसार परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण कर्मियों के लिए मोबाइल फोन, लैपटॉप, स्मार्ट घड़ी और अन्य संचार उपकरणों के उपयोग पर रोक लगा दी गई है। इसके साथ ही इंटरनेट सुविधा को भी बेहद सीमित कर दिया गया है।
अधिकृत लोगों को ही मिलेगी प्रवेश की अनुमति
परीक्षा से जुड़े संवेदनशील परिसरों में आने-जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति का विस्तृत रिकॉर्ड रखा जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में केवल अधिकृत व्यक्तियों को ही प्रवेश दिया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि इस व्यवस्था से परीक्षा की गोपनीयता को और अधिक मजबूत बनाया जा सकेगा।
कड़ी निगरानी
सुरक्षा व्यवस्था के तहत कई स्तरों पर पहचान सत्यापन और निगरानी तंत्र को सक्रिय किया गया है। परीक्षा प्रक्रिया में शामिल हर व्यक्ति की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता की संभावना को समय रहते रोका जा सके।
पेपर लीक विवाद के बाद बढ़ी थी चिंता
गौरतलब है कि मई में आयोजित परीक्षा पेपर लीक विवाद के कारण विवादों में घिर गई थी। इस घटनाक्रम ने देशभर के लाखों अभ्यर्थियों और उनके परिवारों की चिंता बढ़ा दी थी। परीक्षा की विश्वसनीयता पर उठे सवालों के बाद री-एग्जाम कराने का निर्णय लिया गया था।
विवाद की पृष्ठभूमि
पिछली परीक्षा से जुड़े घटनाक्रम ने प्रतियोगी परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए थे। इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए इस बार प्रशासन किसी भी प्रकार की चूक की गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहता।
पूरी प्रक्रिया को कई हिस्सों में बांटा गया
अधिकारियों के अनुसार प्रश्नपत्र निर्माण, अनुवाद, मुद्रण, पैकेजिंग, भंडारण, परिवहन और वितरण जैसी प्रक्रियाओं को अलग-अलग चरणों में विभाजित किया गया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी एक व्यक्ति या समूह के पास पूरी प्रक्रिया की जानकारी उपलब्ध न हो।
सुरक्षा का नया मॉडल
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रक्रिया के विभाजन से गोपनीय जानकारी के दुरुपयोग की संभावना काफी कम हो जाती है। यही कारण है कि इस बार परीक्षा संचालन में ‘जानकारी की सीमित पहुंच’ का सिद्धांत अपनाया गया है।
प्रश्नपत्रों के परिवहन पर भी विशेष फोकस
सूत्रों के अनुसार प्रश्नपत्रों के सुरक्षित परिवहन के लिए विशेष व्यवस्थाओं पर विचार किया जा रहा है। परीक्षा सामग्री को निर्धारित केंद्रों तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया को उच्च स्तरीय निगरानी में रखा जाएगा ताकि किसी भी चरण में सुरक्षा से समझौता न हो।
परिवहन सुरक्षा
प्रश्नपत्रों की आवाजाही के दौरान निगरानी तंत्र को मजबूत करने के लिए कई एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित किया गया है। इससे संवेदनशील सामग्री की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
सामाजिक माध्यमों पर चौबीसों घंटे नजर
परीक्षा से पहले और परीक्षा के दौरान सामाजिक माध्यम मंचों, संदेश साझा करने वाले अनुप्रयोगों और विभिन्न ऑनलाइन मंचों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। किसी भी संदिग्ध संदेश, कथित प्रश्नपत्र या अफवाह की तत्काल जांच की जाएगी।
अफवाहों पर सख्ती
अधिकारियों का कहना है कि गलत सूचना फैलाने वालों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की जाएगी। अभ्यर्थियों से भी केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की गई है।
पिछली कमियों को दूर करने के निर्देश
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि पिछली परीक्षा के दौरान सामने आई सभी कमजोरियों का विश्लेषण कर उन्हें दूर किया जाए। उनका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि पुनर्परीक्षण निष्पक्ष, पारदर्शी और विश्वसनीय तरीके से संपन्न हो।
अंतिम तैयारी
परीक्षा से पहले सभी व्यवस्थाओं की समीक्षा की जा रही है। अधिकारियों का दावा है कि इस बार सुरक्षा के ऐसे इंतजाम किए गए हैं जिनसे अभ्यर्थियों का भरोसा बहाल होगा और परीक्षा प्रक्रिया की साख मजबूत होगी।

