By Malay Ojha | Published: 03 June 2026 at 10:19 PM
हर व्यक्ति अपने जीवन में एक ऐसा घर बनाना चाहता है जहां परिवार के साथ सुख, शांति और समृद्धि के साथ जीवन बिताया जा सके। अपना आशियाना बनाने के लिए लोग वर्षों तक मेहनत करते हैं और बड़ी पूंजी खर्च करते हैं। लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार केवल सुंदर मकान बनवा लेना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि जिस भूमि पर घर बनाया जा रहा है उसकी प्रकृति भी उतनी ही महत्वपूर्ण मानी जाती है।
वास्तु विशेषज्ञों का मानना है कि जमीन की बनावट, दिशा और आकार का प्रभाव घर में रहने वाले लोगों के जीवन पर पड़ता है। यदि भूमि का चयन सोच-समझकर नहीं किया जाए तो भविष्य में कई प्रकार की परेशानियां सामने आ सकती हैं। यही वजह है कि घर निर्माण शुरू करने से पहले भूमि की जांच को विशेष महत्व दिया जाता है।
अधम भूमि को क्यों माना जाता है अशुभ?
वास्तु शास्त्र में कुछ प्रकार की भूमि को घर निर्माण के लिए उपयुक्त नहीं माना गया है। इनमें अधम भूमि का नाम प्रमुख रूप से लिया जाता है। ऐसी जमीन को नकारात्मक प्रभाव वाली भूमि माना जाता है, जिस पर मकान बनाने से जीवन में बाधाएं आने की आशंका बताई जाती है।
ऐसे की जाती है अधम भूमि की पहचान
वास्तु ग्रंथों में अधम भूमि की पहचान करने का एक पारंपरिक तरीका बताया गया है। इसके अनुसार जमीन के उत्तरी हिस्से में लगभग एक से डेढ़ फुट गहरा गड्ढा खोदा जाता है। इसके बाद उसी गड्ढे से निकाली गई मिट्टी को दोबारा उसमें भर दिया जाता है। यदि गड्ढा भरने के बाद मिट्टी बच जाए तो भूमि को शुभ माना जाता है। वहीं यदि गड्ढा पूरी तरह भरने के लिए मिट्टी कम पड़ जाए तो ऐसी जमीन को अधम भूमि कहा जाता है।
भूमि का आकार भी माना जाता है महत्वपूर्ण
केवल जमीन की गुणवत्ता ही नहीं बल्कि उसका आकार भी वास्तु शास्त्र में विशेष महत्व रखता है। माना जाता है कि जमीन की आकृति घर में रहने वाले लोगों के मानसिक और आर्थिक जीवन को प्रभावित कर सकती है। इसलिए जमीन खरीदते समय उसके आकार पर भी ध्यान देना चाहिए।
सिंहमुखी भूमि को लेकर क्या है मान्यता?
जो भूमि सामने की ओर चौड़ी और पीछे की ओर संकरी होती है, उसे सिंहमुखी भूमि कहा जाता है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार ऐसी भूमि व्यापारिक गतिविधियों के लिए कुछ परिस्थितियों में उपयुक्त मानी जा सकती है, लेकिन आवासीय मकान के लिए इसे शुभ नहीं माना जाता।
घर बनाने पर क्यों बरतनी चाहिए सावधानी?
वास्तु के जानकारों का कहना है कि सिंहमुखी भूमि पर घर बनाने से परिवार में मानसिक तनाव, अस्थिरता और अनावश्यक विवाद बढ़ने की संभावना बताई जाती है। हालांकि इन मान्यताओं का वैज्ञानिक आधार स्पष्ट नहीं है, लेकिन परंपरागत वास्तु सिद्धांतों में इसका विशेष उल्लेख मिलता है।
किन स्थानों के पास घर बनाने से बचना चाहिए?
वास्तु शास्त्र में कुछ स्थानों के आसपास मकान बनाने को भी उचित नहीं माना गया है। श्मशान स्थल, लंबे समय से वीरान पड़ी जगहें या पूरी तरह जर्जर और खंडहर बन चुकी इमारतों के आसपास घर बनाने से बचने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि ऐसे क्षेत्रों का वातावरण सकारात्मक ऊर्जा को प्रभावित कर सकता है।
गौमुखी भूमि को क्यों माना जाता है शुभ?
वास्तु शास्त्र में गौमुखी भूमि को सबसे शुभ आकृतियों में से एक माना गया है। ऐसी भूमि आगे की ओर संकरी और पीछे की ओर चौड़ी होती है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इस प्रकार की जमीन पर बना मकान परिवार में स्थिरता, सुख और समृद्धि लाने वाला माना जाता है।
घर खरीदने से पहले क्या रखें ध्यान?
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी जमीन को खरीदने से पहले उसकी कानूनी स्थिति, स्थान, आसपास का वातावरण और उपयोगिता की जांच करना सबसे जरूरी है। यदि कोई व्यक्ति वास्तु सिद्धांतों में विश्वास रखता है तो भूमि की दिशा और आकार की भी जांच कर सकता है। सही जानकारी और सावधानी के साथ लिया गया निर्णय भविष्य में कई परेशानियों से बचा सकता है।
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