By Malay Ojha | Published: 24 August 2026 at 09:54 AM
महाराष्ट्र के अमरावती में सोमवार तड़के एक सरकारी अस्पताल के नवजात गहन चिकित्सा कक्ष में ऐसा हादसा हुआ, जिसने हर किसी को झकझोर दिया। जिला महिला अस्पताल की तीसरी मंजिल पर सुबह करीब 3:30 बजे वेंटिलेटर में अचानक धमाका हुआ और देखते ही देखते वार्ड में आग फैल गई। हादसे के वक्त वहां 39 नवजात भर्ती थे। आग और धुएं की चपेट में आने से तीन नवजातों की मौत हो गई, जबकि छह गंभीर रूप से प्रभावित बच्चों को दूसरे अस्पताल में भेजा गया।
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, आग की शुरुआत एक वेंटिलेटर में हुए विस्फोट के बाद हुई। धमाका होते ही वार्ड में अफरा-तफरी मच गई। नवजात बच्चों से भरे कक्ष में आग तेजी से फैलने लगी और कुछ ही देर में वहां धुआं भर गया। उस समय ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों और नर्सों ने स्थिति संभालते हुए बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश शुरू कर दी।
39 नवजातों की जान बचाने में जुटा अस्पताल स्टाफ
आग लगने के समय नवजात गहन चिकित्सा कक्ष में कुल 39 बच्चे भर्ती थे। हादसे के बाद डॉक्टर, नर्स और दूसरे कर्मचारी तुरंत हरकत में आए। कर्मचारियों ने जरूरी उपकरण हटाए और बच्चों को एक-एक कर प्रभावित वार्ड से बाहर निकालना शुरू किया। इस तेजी से की गई बचाव कोशिश के चलते बड़ी संख्या में नवजातों को सुरक्षित निकाल लिया गया।
छह बच्चों को दूसरे अस्पताल भेजा गया
आग से गंभीर रूप से प्रभावित छह नवजातों को तत्काल पास के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में भेजा गया। वहां उन्हें आगे का इलाज दिया जा रहा है। हादसे के बाद अस्पताल प्रशासन ने प्रभावित बच्चों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने और उपचार उपलब्ध कराने पर प्राथमिकता दी।
तीन मासूमों की नहीं बच सकी जान
बचाव दल और अस्पताल कर्मचारियों की कोशिशों के बावजूद तीन नवजातों को नहीं बचाया जा सका। शुरुआती जानकारी में उनकी मौत का कारण गंभीर रूप से जलना और धुएं के कारण दम घुटना बताया गया है। इन बच्चों की मौत ने अस्पताल में मौजूद परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया।
आग बुझाने के लिए पहुंची दमकल की गाड़ियां
वार्ड से आग की लपटें और धुआं निकलने के बाद दमकल विभाग को सूचना दी गई। दमकल की टीम ने मौके पर पहुंचकर आग बुझाने का काम शुरू किया। आग पर काबू पाने के बाद प्रभावित हिस्से को सुरक्षित किया गया और वहां मौजूद बच्चों को दूसरे स्थान पर ले जाने की प्रक्रिया पूरी की गई।
जल गईं मशीनें, राख में बदल गया सामान
आग कितनी तेज थी, इसका अंदाजा नवजात कक्ष की हालत देखकर लगाया जा सकता है। आग की चपेट में आने से वहां रखे कई उपकरण और दूसरी जरूरी चीजें क्षतिग्रस्त हो गईं। बेड और आसपास का सामान भी बुरी तरह जल गया। वार्ड में फैले धुएं के कारण बचाव अभियान भी बेहद चुनौतीपूर्ण रहा।
अब हादसे की वजह की होगी जांच
इस घटना के बाद अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि वेंटिलेटर में ऐसा क्या हुआ, जिससे अचानक विस्फोट हुआ और आग भड़क गई। प्रशासन की ओर से हादसे के कारणों की जांच की बात कही गई है। जांच में यह भी देखा जाएगा कि अस्पताल में आग से बचाव के इंतजाम कितने प्रभावी थे और आपात स्थिति में बच्चों को बाहर निकालने की व्यवस्था कैसी थी।
डॉक्टरों और नर्सों ने संभाला मोर्चा
हादसे के दौरान सबसे बड़ी चुनौती ऐसे नवजातों को बाहर निकालना था, जो खुद चलने या किसी तरह अपनी सुरक्षा करने की स्थिति में नहीं थे। ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों, नर्सों और कर्मचारियों ने बिना समय गंवाए बच्चों को वार्ड से बाहर निकालने का काम शुरू किया। कई बच्चों को उपकरणों से अलग कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया।
अस्पतालों में नवजात सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
अमरावती की घटना ने नवजात गहन चिकित्सा कक्षों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे वार्डों में भर्ती बच्चों को लगातार मशीनों और जीवन रक्षक उपकरणों की जरूरत होती है। ऐसे में किसी उपकरण में खराबी या आग लगने की स्थिति में कुछ ही मिनट बेहद अहम हो जाते हैं। इस हादसे के बाद अस्पतालों में उपकरणों की नियमित जांच और अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चर्चा तेज होना तय है।
जांच के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर
फिलहाल हादसे की शुरुआती वजह वेंटिलेटर में हुआ विस्फोट बताई जा रही है। हालांकि, आग लगने के पीछे तकनीकी खराबी थी या कोई दूसरी वजह, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। प्रशासन की जांच में अस्पताल के सुरक्षा इंतजाम, उपकरणों की स्थिति और घटना के दौरान अपनाई गई बचाव प्रक्रिया की भी पड़ताल की जाएगी। तीन नवजातों की मौत के बाद अब परिवारों को जांच के नतीजों और जिम्मेदारी तय होने का इंतजार है।
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