By Malay Ojha | Published: 24 August 2026 at 07:51 AM
मुजफ्फरपुर में लैपटॉप कारोबारी मनोज भगत और उनकी पत्नी मीनू देवी की गुमशुदगी की गुत्थी तीन महीने बाद सुलझ गई है। पुलिस ने दोनों की हत्या के आरोप में मनोज के छोटे भाई अविनाश कुमार उर्फ अनुज को बनारस से गिरफ्तार किया है। उसकी निशानदेही पर बोचहां में दरभंगा फोरलेन के किनारे झाड़ियों से दोनों के शवों के अवशेष बरामद किए गए। पुलिस के मुताबिक, वारदात की वजह पैतृक संपत्ति को लेकर चल रहा विवाद था।
ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र के भगत मार्केट से मनोज भगत और उनकी पत्नी मीनू देवी के अचानक लापता होने के बाद से पुलिस लगातार मामले की जांच कर रही थी। जांच के दौरान शक की सुई परिवार के ही एक सदस्य पर गई। पुलिस ने तकनीकी जांच और दूसरे साक्ष्यों के आधार पर मनोज के छोटे भाई अविनाश उर्फ अनुज की तलाश तेज की। बाद में उसे बनारस से पकड़ा गया। पूछताछ में पुलिस के अनुसार उसने दोनों की हत्या करने की बात स्वीकार की।
बोचहां की झाड़ियों में मिला सुराग
आरोपी से पूछताछ के बाद पुलिस टीम उसे लेकर बोचहां पहुंची। उसकी निशानदेही पर दरभंगा फोरलेन के किनारे मुरादपुर चौक के पास झाड़ियों में दोनों के शवों के अवशेष मिले। रिपोर्टों के मुताबिक शवों को कंबल और बेडशीट में लपेटकर वहां फेंका गया था। शव बरामद होने के बाद मौके पर पहुंची विधि विज्ञान की टीम ने जरूरी साक्ष्य जुटाए।
पैतृक जमीन को लेकर था विवाद
पुलिस जांच में सामने आया है कि मनोज भगत और उनके छोटे भाई अविनाश के बीच पैतृक जमीन और भगत मार्केट की संपत्ति को लेकर विवाद चल रहा था। पुलिस के अनुसार इसी विवाद ने खूनी रूप ले लिया। पूछताछ में आरोपी ने वारदात को अंजाम देने और बाद में शवों को ठिकाने लगाने की बात बताई है।
घर में मिले खून के निशान से गहराया शक
दंपती के लापता होने के बाद पुलिस ने उनके घर की जांच की तो कमरे और छत पर खून के संदिग्ध छींटे मिले थे। बाद में जांच में यह खून इंसानी होने की पुष्टि हुई। इसके बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तकनीकी साक्ष्यों, मोबाइल से जुड़ी जानकारी और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की।
बेटी ने शुरू से चाचा पर जताया था शक
मनोज भगत और मीनू देवी की इकलौती बेटी शेफाली ने माता-पिता के अचानक गायब होने के बाद अपने चाचा पर शक जताया था। उसका कहना था कि परिवार में जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। शुरुआती जांच के दौरान भी पुलिस ने परिवार के सदस्यों से पूछताछ की और घर के आसपास की गतिविधियों की पड़ताल की थी। बाद में जांच आगे बढ़ने के साथ अविनाश पुलिस के शक के घेरे में आता गया।
सीसीटीवी और तकनीकी जांच से मिली अहम कड़ी
पुलिस ने दंपती के गायब होने के बाद आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली थी। जांच के दौरान अविनाश की गतिविधियां पुलिस के लिए अहम कड़ी बनीं। पहले भी वह पुलिस की पूछताछ के दायरे में आया था, लेकिन बाद में वह फरार हो गया। पुलिस ने उसकी तलाश जारी रखी और आखिरकार उसे बनारस से गिरफ्तार कर लिया।
शवों की पहचान की प्रक्रिया जारी
दोनों शवों के अवशेष बरामद होने के बाद पुलिस ने उन्हें पोस्टमार्टम के लिए एसकेएमसीएच भेज दिया है। पहचान की औपचारिक पुष्टि के लिए डीएनए जांच समेत दूसरी कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा रही है। पुलिस अब हत्या के पीछे की पूरी वजह, वारदात के तरीके और शवों को ठिकाने लगाने में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका रही या नहीं, इसकी भी जांच कर रही है।
तीन महीने बाद खुला रहस्य
मनोज भगत और मीनू देवी के अचानक गायब होने के बाद यह मामला लंबे समय तक पुलिस के लिए पहेली बना रहा। घर से मिले खून के निशान, परिवार में चल रहा संपत्ति विवाद और संदिग्ध गतिविधियों ने जांच को अलग दिशा दी। अब आरोपी भाई की गिरफ्तारी और उसकी निशानदेही पर शवों के अवशेष मिलने के बाद मामले की सबसे अहम कड़ी सामने आ गई है। हालांकि पुलिस की जांच अभी पूरी नहीं हुई है और हत्या से जुड़े सभी पहलुओं को जोड़ा जाना बाकी है।
Aryavarta Live के WhatsApp Channel से जुड़ें और हर महत्वपूर्ण अपडेट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।
WhatsApp चैनल जॉइन करें

