By Malay Ojha | Published: 29 October 2026 at 10:51 PM
पटना: बिहार में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए राज्य सरकार सौर ऊर्जा और बैटरी स्टोरेज की क्षमता बढ़ाने की तैयारी में है। राज्य में बिजली की पीक मांग 2014 में 2,800 मेगावाट थी, जो 2026 में बढ़कर 9,475 मेगावाट तक पहुंच गई है। अनुमान है कि 2030 तक यह मांग करीब 12,000 मेगावाट हो जाएगी। इस जरूरत को देखते हुए सरकार ने बिजली उत्पादन से लेकर पारेषण, वितरण और ऊर्जा भंडारण तक की व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया है।
बिजली की मांग बढ़ी तो सोलर एनर्जी पर फोकस
पटना में आयोजित ग्रीन एनर्जी कॉन्क्लेव-2026 में ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल ने कहा कि बिहार की ऊर्जा जरूरतें लगातार बढ़ रही हैं। बढ़ती आबादी, शहरीकरण और औद्योगिक गतिविधियों के बीच अक्षय ऊर्जा राज्य की ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लिए अहम होगी। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा, बैटरी स्टोरेज, पंप्ड स्टोरेज और ग्रीन हाइड्रोजन जैसी तकनीकों में निवेश की व्यापक संभावनाएं हैं।
2029-30 तक 24 गीगावाट अक्षय ऊर्जा का लक्ष्य
बिहार सरकार की रिन्यूएबल एनर्जी पॉलिसी-2025 और पंप्ड स्टोरेज नीति के तहत वित्तीय वर्ष 2029-30 तक करीब 24 गीगावाट अक्षय ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ 6.1 गीगावाट-घंटा ऊर्जा भंडारण क्षमता तैयार करने की भी योजना है। सरकार रूफटॉप सोलर, कृषि फीडरों के सोलराइजेशन और सोलर-प्लस-स्टोरेज परियोजनाओं के जरिए इस लक्ष्य को हासिल करना चाहती है।
2.5 लाख BPL परिवारों तक रूफटॉप सोलर पहुंचाने की तैयारी
ऊर्जा मंत्री ने बताया कि राज्य में करीब 2.5 लाख पात्र गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले परिवारों को रूफटॉप सोलर योजना से जोड़ने की दिशा में काम हो रहा है। पीएम सूर्य घर योजना के जरिए घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाने को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे बिजली की जरूरत पूरी करने में मदद मिलने के साथ पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता घटाने का भी प्रयास है।
2,554 कृषि फीडरों के सोलराइजेशन को मंजूरी
कृषि क्षेत्र में बिजली की जरूरत पूरी करने के लिए प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम) के तहत बिहार के 2,554 कृषि फीडरों के सोलराइजेशन को मंजूरी दी गई है। इसके अंतर्गत 2,585 मेगावाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। सरकार दिन के समय सौर ऊर्जा का अधिकतम इस्तेमाल करने और शाम को बढ़ने वाली बिजली की मांग को पूरा करने के लिए बैटरी स्टोरेज पर भी ध्यान दे रही है।
कजरा में सौर ऊर्जा और बैटरी स्टोरेज परियोजना का विस्तार
लखीसराय जिले के कजरा में सौर ऊर्जा और बैटरी स्टोरेज की बड़ी परियोजना विकसित की जा रही है। इसके पहले चरण में 185 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता और 282 मेगावाट-घंटा बैटरी स्टोरेज प्रणाली चालू है। दूसरे चरण में 116 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता और 241 मेगावाट-घंटा भंडारण प्रणाली का काम चल रहा है। इसके अलावा तीसरे चरण में 500 मेगावाट-घंटा बैटरी स्टोरेज क्षमता विकसित करने की दिशा में पहल की जा रही है।
बिजली वितरण सुधार के लिए 11,096 करोड़ रुपये मंजूर
बिहार राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में बिजली वितरण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए तीन साल की कार्ययोजना के तहत 11,096.55 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी गई। इसके तहत लो टेंशन विद्युत प्रणाली और केबल नेटवर्क का विस्तार, ओवरलोड ट्रांसफॉर्मरों की क्षमता बढ़ाने और वितरण व्यवस्था को दुरुस्त करने जैसे काम किए जाएंगे।
इसके अलावा बिहार स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड के दरभंगा और खगौल स्थित ग्रिड उपकेंद्रों में 200 एमवीए क्षमता के दो पावर ट्रांसफॉर्मर लगाने के लिए 33.44 करोड़ रुपये की योजना को भी स्वीकृति दी गई है। इन योजनाओं का उद्देश्य बिजली आपूर्ति को अधिक भरोसेमंद बनाना है।
उद्योगों को बेहतर बिजली देने की तैयारी
ग्रीन एनर्जी कॉन्क्लेव के पहले प्लेनरी सत्र में ऊर्जा विभाग के सचिव अजय यादव और उद्योग विभाग के सचिव कुंदन कुमार ने हिस्सा लिया। चर्चा में औद्योगिक इकाइयों, MSME और औद्योगिक क्लस्टर में सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ाने पर जोर दिया गया। निवेश को बढ़ावा देने और परियोजनाओं को जमीन पर उतारने के लिए सरकार, उद्योग जगत और विकास साझेदारों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत भी बताई गई।
ऊर्जा सचिव अजय यादव के मुताबिक, राज्य में सोलर पार्क, बायोमास, ग्रीन हाइड्रोजन, बैटरी स्टोरेज, पंप्ड स्टोरेज और ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर के साथ सोलर उपकरण निर्माण के क्षेत्र में भी निवेश की संभावनाएं हैं। ग्रीन हाइड्रोजन नीति-2026 और औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज-2025 के जरिए भी निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक विकास पर सरकार की नजर
ग्रीन एनर्जी कॉन्क्लेव-2026 का मुख्य उद्देश्य बिहार में स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार के साथ औद्योगिक सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना है। बढ़ती बिजली मांग, ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक विकास की जरूरतों को देखते हुए सरकार उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ बिजली नेटवर्क और ऊर्जा भंडारण को मजबूत करना चाहती है। इन योजनाओं का असर आने वाले वर्षों में बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता और राज्य में निवेश की संभावनाओं पर पड़ सकता है।
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