By Malay Ojha | Published: 29 October 2026 at 03:10 PM
उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी के लिए चरित्र सत्यापन के नियम सख्त किए जाने पर सियासी विवाद शुरू हो गया है। हिंसक प्रदर्शन और आंदोलनों में शामिल रहे अभ्यर्थियों को नौकरी मिलने में मुश्किल होने के प्रावधान पर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने सवाल उठाए हैं। दोनों दलों ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए इसे युवाओं को डराने वाला कदम बताया है।
कांग्रेस बोली- आंदोलन करने से युवाओं को देशद्रोही न ठहराएं
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने आरोप लगाया कि चुनाव में हार के डर से बीजेपी युवाओं को आंदोलन और हिंसा के नाम पर निशाना बना रही है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से युवाओं को यह संदेश दिया जा रहा है कि अगर वे किसी आंदोलन में शामिल हुए तो उन्हें जेल भेजा जा सकता है और सरकारी नौकरी से भी वंचित होना पड़ सकता है।
‘अंग्रेज नहीं डरा सके तो आप क्या डराएंगे’
सुरेंद्र राजपूत ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जब अंग्रेज भारतीयों को डरा नहीं सके, तो मौजूदा सरकार भी युवाओं को डराकर उनके आंदोलनों को नहीं रोक सकती। उन्होंने कहा कि जेन-जी यानी नई पीढ़ी को देशद्रोही ठहराने की कोशिश का कांग्रेस विरोध करेगी। राजपूत के मुताबिक, सरकार की ऐसी कोशिशों के बावजूद आंदोलन बंद नहीं होंगे।
चरित्र सत्यापन के नियमों को लेकर बढ़ा विवाद
सरकारी नौकरी की भर्ती प्रक्रिया में अभ्यर्थियों से चरित्र प्रमाण पत्र और संबंधित जानकारी मांगी जाती है। उत्तर प्रदेश में चरित्र सत्यापन से जुड़े नियम सख्त किए जाने के बाद हिंसक प्रदर्शन या आंदोलनों में शामिल रहे युवाओं की पात्रता को लेकर बहस तेज हो गई है। ऐसे मामलों में नौकरी मिलने पर असर पड़ सकता है। हालांकि, किसी आंदोलन में शामिल होने और हिंसा में शामिल होने के बीच अंतर करना इस विवाद का अहम पहलू है।
सपा ने आदेश की तुलना ब्रिटिश राज से की
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता उदयवीर ने भी सरकार के फैसले की आलोचना की। उन्होंने कहा कि इस तरह के आदेश ब्रिटिश शासन के दौर की याद दिलाते हैं, जब विरोध करने वालों पर कार्रवाई की जाती थी। उदयवीर ने कहा कि स्वतंत्र भारत में विरोध करना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है और सत्ता में बदलाव चुनाव जैसी स्थापित लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिए होता है।
सरकार की मंशा पर उठाए सवाल
उदयवीर ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार डराने-धमकाने की मानसिकता के साथ काम कर रही है। उनके मुताबिक, ऐसे आदेश लोकतांत्रिक व्यवस्था और विरोध के अधिकार को लेकर सवाल खड़े करते हैं। चरित्र सत्यापन के नियमों को लेकर अब राजनीतिक बहस तेज हो गई है। इस मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि सरकारी नौकरी के लिए तय मानकों को लागू करते समय शांतिपूर्ण विरोध और हिंसक गतिविधियों के बीच किस तरह अंतर किया जाएगा।
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