By Malay Ojha | Published: 29 October 2026 at 12:06 PM
उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव के नतीजों ने प्रदेश की सियासत में नई बहस छेड़ दी है। चुनाव में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के छह उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की, जबकि समाजवादी पार्टी के चार प्रत्याशी सफल रहे। नतीजों के बाद कांग्रेस और सपा के नेताओं ने इसे बीजेपी के खिलाफ बढ़ते जन असंतोष से जोड़ते हुए 2027 के विधानसभा चुनाव में सत्ता परिवर्तन का दावा किया। वहीं, बीजेपी ने सपा की जीत को पार्टी की लोकप्रियता के बजाय उम्मीदवारों की व्यक्तिगत मेहनत का परिणाम बताया।
फैजाबाद से समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने चुनाव नतीजों को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के प्रति बढ़ते भरोसे का संकेत बताया। उनका कहना है कि लोगों का बीजेपी से विश्वास कम हो रहा है और प्रदेश में बदलाव की भावना मजबूत हो रही है। उन्होंने दावा किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को बड़ी हार का सामना करना पड़ेगा।
इमरान मसूद बोले- MLC चुनाव से जनता का मूड नहीं समझ सकते
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने विधान परिषद चुनाव के नतीजों को जनता के वास्तविक जनादेश का पैमाना मानने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि एमएलसी चुनाव के आधार पर प्रदेश या देश के लोगों का मूड नहीं समझा जा सकता। मसूद ने दावा किया कि देश का माहौल बीजेपी के खिलाफ है और जनता का रुख उसके विरोध में है।
अनुराग भदौरिया ने काशी-मथुरा का किया जिक्र
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अनुराग भदौरिया ने चुनाव परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए पार्टी की जीत को भगवान के आशीर्वाद से जोड़ा। उन्होंने कहा कि समाजवादियों के साथ प्रभु का आशीर्वाद है। अयोध्या के बाद अब काशी, मथुरा और प्रयागराज में भी जीत मिलने की बात कहकर उन्होंने सपा के चुनावी प्रदर्शन को लेकर उत्साह जताया।
सुरेश खन्ना बोले- सपा को जीत पर ज्यादा खुश नहीं होना चाहिए
उत्तर प्रदेश के राज्य मंत्री सुरेश खन्ना ने चुनाव परिणामों की अलग व्याख्या की। उन्होंने कहा कि एनडीए के छह और सपा के चार उम्मीदवार जीते हैं। उनके मुताबिक, सपा को इन नतीजों को अपनी नीतियों की जीत नहीं मानना चाहिए, क्योंकि उम्मीदवारों की व्यक्तिगत लोकप्रियता और मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की क्षमता ने अहम भूमिका निभाई।
MLC नतीजों के बाद 2027 की सियासत पर नजर
विधान परिषद चुनाव के परिणामों को लेकर बीजेपी और विपक्ष के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं। विपक्ष जहां इन नतीजों को बीजेपी के खिलाफ माहौल बनने के संकेत के रूप में पेश कर रहा है, वहीं बीजेपी इसे उम्मीदवारों के व्यक्तिगत प्रभाव से जोड़ रही है। अब देखना होगा कि इन नतीजों का असर 2027 के विधानसभा चुनाव की रणनीति और सियासी समीकरणों पर कितना पड़ता है।
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