By Malay Ojha | Published: 29 October 2026 at 11:29 AM
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में विधान परिषद चुनाव के नतीजे भाजपा के लिए बड़ा झटका साबित होते दिख रहे हैं। वाराणसी खंड स्नातक सीट पर समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी आशुतोष सिन्हा ने भाजपा के केदारनाथ सिंह के मुकाबले 16,984 मतों की बढ़त बना ली है। वहीं, भाजपा प्रत्याशी केदारनाथ सिंह ने चुनाव में अपेक्षित सफलता नहीं मिलने की बात स्वीकार करते हुए मतदाताओं का आभार जताया है। इससे स्नातक सीट पर भी भाजपा की हार लगभग तय मानी जा रही है।
वाराणसी की दोनों MLC सीटों पर सपा का दबदबा
वाराणसी खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में सपा प्रत्याशी लाल बिहारी यादव पहले ही जीत दर्ज कर चुके हैं। अब स्नातक सीट पर भी आशुतोष सिन्हा की मजबूत बढ़त ने सपा खेमे में जीत की उम्मीद बढ़ा दी है। हालांकि, स्नातक सीट का अंतिम परिणाम दूसरी वरीयता के मतों की गिनती पूरी होने और निर्वाचन प्रक्रिया के अनुसार ही तय होगा।
केदारनाथ सिंह ने स्वीकार किया जनादेश
भाजपा प्रत्याशी केदारनाथ सिंह ने सोशल मीडिया पर संदेश साझा कर समर्थकों और मतदाताओं का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने उन पर भरोसा जताया और समर्थन दिया, उनका स्नेह उनके लिए अनमोल है। उन्होंने जनादेश को लोकतांत्रिक मर्यादा के साथ स्वीकार करने की बात भी कही।
केदारनाथ सिंह ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और शुभचिंतकों के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि राजनीति उनके लिए केवल पद हासिल करने का जरिया नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने और जनसेवा का माध्यम है। चुनाव में परिणाम चाहे जो हो, जनसेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता बनी रहेगी।
आशुतोष सिन्हा को 16,984 वोटों की बढ़त
29 अक्टूबर की सुबह तक सामने आए मतगणना के आंकड़ों के अनुसार, प्रथम वरीयता के मतों की नौवें चक्र तक की गिनती में सपा प्रत्याशी आशुतोष सिन्हा को 50,462 वोट मिले थे। वहीं, भाजपा के केदारनाथ सिंह के खाते में 33,478 मत आए थे। इस तरह आशुतोष सिन्हा 16,984 मतों से आगे चल रहे थे।
आठवें चक्र तक सपा प्रत्याशी की बढ़त 16,261 मतों की थी। अगले चक्र में यह अंतर और बढ़ गया। इसके बावजूद प्रथम वरीयता के मतों की गिनती के बाद भी जीत का फैसला नहीं हो सका, क्योंकि किसी प्रत्याशी ने निर्धारित कोटा हासिल नहीं किया था।
मतगणना में देरी की क्या है वजह?
वाराणसी खंड स्नातक सीट के लिए 27 अक्टूबर से मतगणना जारी है। लंबी चुनावी प्रक्रिया के साथ मतगणना के दौरान उठे सवालों ने भी परिणाम में देरी की। रिपोर्टों के मुताबिक, पांचवें चक्र की गिनती को लेकर भाजपा प्रत्याशी और उनके समर्थकों ने आपत्ति जताई थी।
भाजपा पक्ष का आरोप था कि संबंधित दौर की मतगणना के समय उसका एजेंट मौजूद नहीं था। इसके बाद दोबारा गिनती कराने की मांग को लेकर विरोध भी हुआ। हालांकि, मतगणना में गड़बड़ी के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि के बिना उन्हें प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।
दूसरी वरीयता के वोटों से होगा अंतिम फैसला
स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में मतगणना का तरीका सामान्य चुनावों से अलग होता है। इसमें मतदाता उम्मीदवारों को अपनी पसंद के क्रम में वरीयता देते हैं। यदि प्रथम वरीयता के मतों से कोई प्रत्याशी निर्धारित कोटा हासिल नहीं कर पाता, तो नियमों के अनुसार अगली वरीयता के मतों की गिनती की जाती है।
वाराणसी खंड स्नातक सीट पर भी प्रथम वरीयता के मतों की गिनती पूरी होने के बाद दूसरी वरीयता के मतों की गणना शुरू की गई। अंतिम नतीजा इसी प्रक्रिया के पूरा होने पर स्पष्ट होना था। आशुतोष सिन्हा की बड़ी बढ़त से सपा समर्थकों में उत्साह है, जबकि भाजपा प्रत्याशी के हार स्वीकार करने वाले संदेश ने चुनावी मुकाबले को और चर्चा में ला दिया है।
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