By Malay Ojha | Published: 11 July 2026 at 10:19 AM
मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी द्वारा उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं मिलने से नाराज उनके समर्थकों ने राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर चक्का जाम कर दिया। देर रात शुरू हुआ प्रदर्शन तड़के हिंसक हो गया और पुलिस पर जमकर पथराव हुआ। इस घटना में दतिया के पुलिस अधीक्षक मयूर खंडेलवाल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सहित छह से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए। कई घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लेकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
विरोध प्रदर्शन की वजह से राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर करीब 15 किलोमीटर लंबा जाम लग गया। इससे दतिया ही नहीं, आसपास के जिलों की यातायात व्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित हुई। पुलिस और प्रशासन ने कई बार प्रदर्शनकारियों से रास्ता खाली करने की अपील की, लेकिन भीड़ पीछे हटने को तैयार नहीं हुई। हालात लगातार बिगड़ते गए और आखिरकार पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा।
सुबह चार बजे अचानक हुआ पथराव
पुलिस अधीक्षक मयूर खंडेलवाल के अनुसार, शुक्रवार शाम करीब छह बजे से ही बड़ी संख्या में लोग शहर में प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने बाजार बंद कराने की कोशिश की और बाद में राजमार्ग पर चक्का जाम कर दिया। पुलिस और प्रशासन पूरी रात स्थिति संभालने में जुटे रहे, लेकिन सुबह करीब चार बजे अचानक भीड़ ने पुलिस टीम पर पत्थर बरसाने शुरू कर दिए।
आंसू गैस के बाद भी नहीं थमा उपद्रव
पुलिस ने हालात पर काबू पाने के लिए पहले आंसू गैस के गोले छोड़े, लेकिन इसके बाद भी पथराव और तेज हो गया। इस दौरान पुलिस अधीक्षक, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक और कई जवान घायल हो गए। इसके बाद अतिरिक्त बल बुलाया गया और दोबारा आंसू गैस छोड़कर प्रदर्शनकारियों को मौके से हटाया गया। पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लिया है, जबकि अन्य की पहचान कर कार्रवाई की जा रही है।
समर्थकों का आरोप, शांतिपूर्ण आंदोलन पर हुई सख्ती
भारतीय जनता पार्टी के जिला मंत्री भानु सिंह ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पार्टी कार्यकर्ता शांतिपूर्ण तरीके से शीर्ष नेतृत्व से नरोत्तम मिश्रा को टिकट देने की मांग कर रहे थे। पूरी रात रामधुन गाकर विरोध दर्ज कराया गया, लेकिन पुलिस ने कार्यकर्ताओं के साथ सख्ती की और उन्हें पार्टी कार्यालय में रोक दिया। उन्होंने कहा कि जब तक नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं मिलेगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
टिकट घोषित होते ही बदल गया पूरा माहौल
दरअसल, भारतीय जनता पार्टी ने शुक्रवार को दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया। मिश्रा और उनके समर्थकों को उम्मीद थी कि पार्टी एक बार फिर उन पर भरोसा जताएगी। उन्होंने नामांकन की तैयारी भी कर ली थी। लेकिन जैसे ही उम्मीदवार के रूप में आशुतोष तिवारी के नाम की घोषणा हुई, समर्थकों का गुस्सा सड़कों पर दिखाई देने लगा।
सड़क पर लेटकर किया विरोध
प्रदर्शन के दौरान कई समर्थक शर्ट उतारकर सड़क पर लेट गए और पार्टी नेतृत्व के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। कुछ लोगों ने खुले तौर पर चेतावनी दी कि यदि नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं दिया गया तो वे पार्टी छोड़ने पर भी विचार करेंगे। इस पूरे घटनाक्रम ने दतिया की राजनीति को अचानक गरमा दिया है।
आशुतोष तिवारी ने कही मेल-मिलाप की बात
उम्मीदवार बनाए जाने के बाद आशुतोष तिवारी ने विवाद को शांत करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि नरोत्तम मिश्रा उनके वरिष्ठ और अभिभावक समान हैं। उनके अनुसार, मिश्रा ने चुनाव में पूरा सहयोग देने और प्रचार करने का भरोसा भी दिलाया है। हालांकि, समर्थकों का विरोध फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है।
उपचुनाव की वजह क्या है?
दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव इसलिए हो रहा है क्योंकि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने नरोत्तम मिश्रा को करीब साढ़े सात हजार मतों से हराया था। इसी वर्ष अप्रैल में धोखाधड़ी से जुड़े एक मामले में अदालत ने राजेंद्र भारती को तीन वर्ष की सजा सुनाई। जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत सजा के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हो गई, जिससे यह सीट रिक्त हो गई।
कब होगा मतदान
दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए 30 जुलाई को मतदान होगा, जबकि मतगणना 3 अगस्त को की जाएगी। अब सभी की नजर इस बात पर है कि टिकट को लेकर शुरू हुआ यह विवाद चुनावी नतीजों पर कितना असर डालता है।
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