Thursday, June 4, 2026

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आखिर उस पांच मंजिला इमारत में क्या हुआ था? चश्मदीदों ने सुनाई मौत और जिंदगी की सबसे भयावह कहानी

By Malay Ojha | Published: 03 June 2026 at 02:44 PM

दक्षिणी दिल्ली के मालवीय नगर इलाके के हौजरानी क्षेत्र में बुधवार सुबह जो कुछ हुआ, उसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। एक पांच मंजिला इमारत में लगी भीषण आग ने कुछ ही मिनटों में ऐसा भयावह रूप ले लिया कि अंदर मौजूद लोगों के पास बचने का कोई सुरक्षित रास्ता नहीं बचा। देखते ही देखते पूरा परिसर धुएं और आग की लपटों से घिर गया। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 21 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से झुलस गए।

स्थानीय लोगों के अनुसार सुबह का समय सामान्य था। लोग अपने-अपने काम में व्यस्त थे, तभी इमारत के निचले हिस्से में स्थित एक भोजनालय से धुआं निकलता दिखाई दिया। शुरुआत में किसी ने अंदाजा नहीं लगाया कि कुछ ही देर में स्थिति इतनी भयावह हो जाएगी। देखते ही देखते आग ने ऊपरी मंजिलों को भी अपनी चपेट में ले लिया और पूरी इमारत धुएं के गुबार में छिप गई।

बाहर निकलने का रास्ता बना सबसे बड़ा जाल
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि भवन के भीतर ऊपर जाने और नीचे उतरने के लिए केवल एक संकरी सीढ़ी थी। दुर्भाग्य से आग उसी हिस्से में फैल गई, जिससे अंदर फंसे लोगों का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया। धुएं के कारण लोगों को सांस लेने में परेशानी होने लगी और वे जान बचाने के लिए खिड़कियों और बालकनियों की ओर भागने लगे।

कई लोग मदद के लिए चिल्लाते हुए दिखाई दिए। कुछ लोगों ने नीचे कूदकर अपनी जान बचाने की कोशिश की, जबकि कई लोग ऊपरी मंजिलों पर ही फंस गए।

बच्चे को सीने से लगाकर कूद गई महिला
हादसे के दौरान कई ऐसे दृश्य सामने आए जिन्होंने हर किसी को भावुक कर दिया। स्थानीय लोगों के अनुसार एक महिला अपने छोटे बच्चे को सीने से चिपकाए ऊपरी मंजिल से नीचे कूद गई। इस दौरान वह गंभीर रूप से घायल हो गई और उसके पैर में फ्रैक्चर हो गया। हालांकि स्थानीय लोगों की तत्परता के कारण उसकी और बच्चे की जान बच गई।

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि उस समय लोगों में सिर्फ एक ही चिंता थी—किसी तरह अधिक से अधिक लोगों को जिंदा बाहर निकाला जाए।

गद्दों ने बचाईं कई जिंदगियां
जब लोगों ने देखा कि फंसे हुए लोग ऊपर से कूदने को मजबूर हो रहे हैं, तब आसपास के नागरिकों ने बिना समय गंवाए राहत कार्य शुरू कर दिया। एक स्थानीय गद्दा व्यापारी ने तुरंत सड़क पर गद्दे बिछवा दिए ताकि ऊपर से कूदने वालों को कम चोट पहुंचे।

स्थानीय लोगों की इस सूझबूझ ने कई लोगों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इलाके के निवासियों का कहना है कि यदि यह कदम समय रहते नहीं उठाया जाता, तो मृतकों की संख्या और अधिक हो सकती थी।

अपनी जान जोखिम में डालकर अंदर घुसे लोग
जब आग तेजी से फैल रही थी, तब कई स्थानीय युवक अपनी जान की परवाह किए बिना भवन के अंदर घुस गए। लोगों ने इमारत के निचले हिस्से को तोड़कर भीतर फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश की। कई लोगों को धुएं से बेहोशी की हालत में बाहर निकाला गया।

स्थानीय नागरिकों का दावा है कि उन्होंने कई लोगों को प्राथमिक उपचार दिया और कुछ लोगों को कृत्रिम श्वास देकर उनकी जान बचाने में सफलता हासिल की। राहत दल के पहुंचने से पहले आम नागरिकों ने जिस साहस का परिचय दिया, उसकी पूरे इलाके में चर्चा हो रही है।

अस्पताल के मरीजों के परिजन भी बने हादसे का शिकार
स्थानीय लोगों के अनुसार इस भवन में बड़ी संख्या में बाहर से आए लोग ठहरे हुए थे। पास में स्थित एक बड़े अस्पताल के कारण यहां अक्सर मरीजों के परिजन और दूसरे राज्यों तथा देशों से आए लोग ठहरते थे। हादसे के समय भी भवन में करीब 50 लोगों की मौजूदगी बताई जा रही है।

इसी वजह से कई परिवार अचानक इस त्रासदी की चपेट में आ गए और उन्हें संभलने का मौका तक नहीं मिला।

बाथरूम में मिली कई लोगों की लाशें
जब लोगों को बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिला तो उन्होंने बाथरूम और बंद कमरों में शरण लेने की कोशिश की। लेकिन धुएं का दबाव इतना अधिक था कि कई लोगों का दम घुट गया। बचाव अभियान के दौरान कई शव बाथरूम और कमरों से बरामद किए गए।

राहत कार्य में शामिल लोगों का कहना है कि यह दृश्य इतना दर्दनाक था कि उसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है। कई परिवारों की खुशियां कुछ ही मिनटों में उजड़ गईं।

हादसे ने खड़े किए कई बड़े सवाल
इस दर्दनाक अग्निकांड के बाद भवन की सुरक्षा व्यवस्था, अग्निशमन उपायों और प्रशासनिक निगरानी को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि सुरक्षा मानकों का सही तरीके से पालन किया गया होता, तो इतनी बड़ी जनहानि को रोका जा सकता था।

फिलहाल राहत और बचाव कार्य पूरा कर लिया गया है तथा हादसे के कारणों की जांच जारी है। पूरे इलाके में शोक का माहौल है और लोग उन भयावह पलों को याद कर सिहर उठ रहे हैं।

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आखिर उस पांच मंजिला इमारत में क्या हुआ था? चश्मदीदों ने सुनाई मौत और जिंदगी की सबसे भयावह कहानी

By Malay Ojha | Published: 03 June 2026 at 02:44 PM

दक्षिणी दिल्ली के मालवीय नगर इलाके के हौजरानी क्षेत्र में बुधवार सुबह जो कुछ हुआ, उसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। एक पांच मंजिला इमारत में लगी भीषण आग ने कुछ ही मिनटों में ऐसा भयावह रूप ले लिया कि अंदर मौजूद लोगों के पास बचने का कोई सुरक्षित रास्ता नहीं बचा। देखते ही देखते पूरा परिसर धुएं और आग की लपटों से घिर गया। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 21 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से झुलस गए।

स्थानीय लोगों के अनुसार सुबह का समय सामान्य था। लोग अपने-अपने काम में व्यस्त थे, तभी इमारत के निचले हिस्से में स्थित एक भोजनालय से धुआं निकलता दिखाई दिया। शुरुआत में किसी ने अंदाजा नहीं लगाया कि कुछ ही देर में स्थिति इतनी भयावह हो जाएगी। देखते ही देखते आग ने ऊपरी मंजिलों को भी अपनी चपेट में ले लिया और पूरी इमारत धुएं के गुबार में छिप गई।

बाहर निकलने का रास्ता बना सबसे बड़ा जाल
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि भवन के भीतर ऊपर जाने और नीचे उतरने के लिए केवल एक संकरी सीढ़ी थी। दुर्भाग्य से आग उसी हिस्से में फैल गई, जिससे अंदर फंसे लोगों का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया। धुएं के कारण लोगों को सांस लेने में परेशानी होने लगी और वे जान बचाने के लिए खिड़कियों और बालकनियों की ओर भागने लगे।

कई लोग मदद के लिए चिल्लाते हुए दिखाई दिए। कुछ लोगों ने नीचे कूदकर अपनी जान बचाने की कोशिश की, जबकि कई लोग ऊपरी मंजिलों पर ही फंस गए।

बच्चे को सीने से लगाकर कूद गई महिला
हादसे के दौरान कई ऐसे दृश्य सामने आए जिन्होंने हर किसी को भावुक कर दिया। स्थानीय लोगों के अनुसार एक महिला अपने छोटे बच्चे को सीने से चिपकाए ऊपरी मंजिल से नीचे कूद गई। इस दौरान वह गंभीर रूप से घायल हो गई और उसके पैर में फ्रैक्चर हो गया। हालांकि स्थानीय लोगों की तत्परता के कारण उसकी और बच्चे की जान बच गई।

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि उस समय लोगों में सिर्फ एक ही चिंता थी—किसी तरह अधिक से अधिक लोगों को जिंदा बाहर निकाला जाए।

गद्दों ने बचाईं कई जिंदगियां
जब लोगों ने देखा कि फंसे हुए लोग ऊपर से कूदने को मजबूर हो रहे हैं, तब आसपास के नागरिकों ने बिना समय गंवाए राहत कार्य शुरू कर दिया। एक स्थानीय गद्दा व्यापारी ने तुरंत सड़क पर गद्दे बिछवा दिए ताकि ऊपर से कूदने वालों को कम चोट पहुंचे।

स्थानीय लोगों की इस सूझबूझ ने कई लोगों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इलाके के निवासियों का कहना है कि यदि यह कदम समय रहते नहीं उठाया जाता, तो मृतकों की संख्या और अधिक हो सकती थी।

अपनी जान जोखिम में डालकर अंदर घुसे लोग
जब आग तेजी से फैल रही थी, तब कई स्थानीय युवक अपनी जान की परवाह किए बिना भवन के अंदर घुस गए। लोगों ने इमारत के निचले हिस्से को तोड़कर भीतर फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश की। कई लोगों को धुएं से बेहोशी की हालत में बाहर निकाला गया।

स्थानीय नागरिकों का दावा है कि उन्होंने कई लोगों को प्राथमिक उपचार दिया और कुछ लोगों को कृत्रिम श्वास देकर उनकी जान बचाने में सफलता हासिल की। राहत दल के पहुंचने से पहले आम नागरिकों ने जिस साहस का परिचय दिया, उसकी पूरे इलाके में चर्चा हो रही है।

अस्पताल के मरीजों के परिजन भी बने हादसे का शिकार
स्थानीय लोगों के अनुसार इस भवन में बड़ी संख्या में बाहर से आए लोग ठहरे हुए थे। पास में स्थित एक बड़े अस्पताल के कारण यहां अक्सर मरीजों के परिजन और दूसरे राज्यों तथा देशों से आए लोग ठहरते थे। हादसे के समय भी भवन में करीब 50 लोगों की मौजूदगी बताई जा रही है।

इसी वजह से कई परिवार अचानक इस त्रासदी की चपेट में आ गए और उन्हें संभलने का मौका तक नहीं मिला।

बाथरूम में मिली कई लोगों की लाशें
जब लोगों को बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिला तो उन्होंने बाथरूम और बंद कमरों में शरण लेने की कोशिश की। लेकिन धुएं का दबाव इतना अधिक था कि कई लोगों का दम घुट गया। बचाव अभियान के दौरान कई शव बाथरूम और कमरों से बरामद किए गए।

राहत कार्य में शामिल लोगों का कहना है कि यह दृश्य इतना दर्दनाक था कि उसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है। कई परिवारों की खुशियां कुछ ही मिनटों में उजड़ गईं।

हादसे ने खड़े किए कई बड़े सवाल
इस दर्दनाक अग्निकांड के बाद भवन की सुरक्षा व्यवस्था, अग्निशमन उपायों और प्रशासनिक निगरानी को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि सुरक्षा मानकों का सही तरीके से पालन किया गया होता, तो इतनी बड़ी जनहानि को रोका जा सकता था।

फिलहाल राहत और बचाव कार्य पूरा कर लिया गया है तथा हादसे के कारणों की जांच जारी है। पूरे इलाके में शोक का माहौल है और लोग उन भयावह पलों को याद कर सिहर उठ रहे हैं।

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