By Malay Ojha | Published: 03 June 2026 at 03:38 PM
पिछले कुछ दिनों से यह चर्चा तेज थी कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच भारतीय रिजर्व बैंक ने अपने सोने के भंडार का बड़ा हिस्सा बेच दिया है। इस दावे ने आम लोगों से लेकर आर्थिक मामलों के जानकारों तक का ध्यान खींचा। हालांकि अब केंद्रीय बैंक ने खुद सामने आकर इन खबरों को पूरी तरह गलत बताया है और कहा है कि देश के सोने के भंडार में किसी प्रकार की कमी नहीं आई है।
भारतीय रिजर्व बैंक ने बुधवार को स्पष्ट किया कि उसके पास मौजूद भौतिक सोने की मात्रा में कोई गिरावट नहीं हुई है। केंद्रीय बैंक के अनुसार देश का कुल सोना भंडार 880.52 टन पर बना हुआ है। ऐसे में यह दावा कि विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए सोना बेचा गया, तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है।
आरबीआई ने लोगों से अपील की है कि आर्थिक मामलों से जुड़ी जानकारी के लिए केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करें और अपुष्ट खबरों से भ्रमित न हों।
आखिर कहां से शुरू हुई सोना बेचने की चर्चा?
सोने की बिक्री को लेकर चर्चा उस समय तेज हुई जब एक अंतरराष्ट्रीय आर्थिक रिपोर्ट में यह संभावना जताई गई कि भारतीय केंद्रीय बैंक ने विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों को सुरक्षित रखने के लिए सोने का कुछ हिस्सा बाजार में उतारा हो सकता है। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि मई महीने के दौरान अरबों डॉलर मूल्य के सोने का लेन-देन हुआ है।
यही रिपोर्ट बाद में विभिन्न माध्यमों पर तेजी से फैल गई और लोगों के बीच यह धारणा बनने लगी कि देश के सोने के भंडार में कमी आ गई है।
केंद्रीय बैंक ने आंकड़ों के साथ रखा पक्ष
आरबीआई ने अपने स्पष्टीकरण में बताया कि सोने की हिस्सेदारी विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार बढ़ रही है। सितंबर 2025 के अंत में जहां कुल विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी 13.92 प्रतिशत थी, वहीं मार्च 2026 के अंत तक यह बढ़कर 16.70 प्रतिशत पहुंच गई। इसके बाद मई 2026 तक यह हिस्सा और बढ़कर 16.85 प्रतिशत हो गया।
इन आंकड़ों से स्पष्ट संकेत मिलता है कि सोने का महत्व रिजर्व प्रबंधन में बढ़ा है, न कि कम हुआ है।
पिछले साल के मुकाबले बढ़ा है सोना भंडार
आरबीआई की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार 31 मार्च 2025 तक केंद्रीय बैंक के पास 879.58 टन सोना था। वहीं 31 मार्च 2026 तक यह बढ़कर 880.52 टन हो गया।
यानी एक वर्ष के भीतर देश के आधिकारिक सोना भंडार में लगभग 0.94 टन की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह तथ्य उन दावों को कमजोर करता है जिनमें बड़े पैमाने पर सोना बेचने की बात कही जा रही थी।
देश के भीतर भी बढ़ा सोने का भंडारण
आरबीआई की रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि देश का अधिकतर सोना अब भारत में ही रखा जा रहा है। मार्च 2026 तक कुल सोना भंडार का लगभग 77 प्रतिशत हिस्सा देश के भीतर सुरक्षित रखा गया था।
छह महीने पहले यह आंकड़ा करीब 66 प्रतिशत था। इससे यह संकेत मिलता है कि केंद्रीय बैंक घरेलू स्तर पर सोने के भंडारण को प्राथमिकता दे रहा है।
विदेशी मुद्रा भंडार को लेकर क्यों उठे सवाल?
वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और विदेशी निवेश के प्रवाह में बदलाव के कारण कई देशों के केंद्रीय बैंक अपने भंडार प्रबंधन की रणनीतियों में परिवर्तन कर रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में भारत को लेकर भी कई तरह के अनुमान लगाए गए।
कुछ रिपोर्टों में कहा गया था कि रुपया पर दबाव और चालू खाते के घाटे की चुनौतियों को देखते हुए आरबीआई नकदी आधारित विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों को प्राथमिकता दे सकता है। हालांकि केंद्रीय बैंक ने साफ कर दिया कि सोना बेचने की खबरों का वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है।
दो विभागों में रखा गया है पूरा सोना
आरबीआई के अनुसार उसके कुल 880.52 टन सोने में से 312.32 टन सोना निर्गम विभाग के अंतर्गत रखा गया है। वहीं 568.20 टन सोना बैंकिंग विभाग के अधीन सुरक्षित है।
इस विस्तृत जानकारी से यह स्पष्ट होता है कि देश का सोना भंडार सुव्यवस्थित तरीके से संरक्षित है और उसमें किसी प्रकार की असामान्य कमी नहीं आई है।
अफवाहों के बीच सामने आया वास्तविक चित्र
सोना किसी भी देश की आर्थिक मजबूती का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। यही वजह है कि उससे जुड़ी छोटी सी खबर भी व्यापक चर्चा का विषय बन जाती है। लेकिन ताजा मामले में आरबीआई और सरकारी तथ्य जांच इकाई दोनों ने स्पष्ट कर दिया है कि देश का सोना भंडार सुरक्षित है और उसमें कमी आने की खबरें भ्रामक हैं।
केंद्रीय बैंक का कहना है कि निवेशकों और आम नागरिकों को केवल आधिकारिक आंकड़ों पर भरोसा करना चाहिए, क्योंकि आर्थिक मामलों में अफवाहें भ्रम पैदा कर सकती हैं।

