By Malay Ojha | Published: 24 July 2026 at 04:46 PM
पटना: बिहार की राजनीति में राष्ट्रीय जनता दल को शुक्रवार को बड़ा झटका लगा, जब पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। लंबे समय तक लालू प्रसाद यादव और राजद का खुलकर पक्ष रखने वाले तिवारी ने पार्टी छोड़ने के कुछ ही दिनों बाद भाजपा का दामन थाम लिया। भाजपा में शामिल होने से पहले उन्होंने पटना के हनुमान मंदिर में पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने नई पार्टी के प्रति अपनी पूरी निष्ठा जताते हुए कहा कि भाजपा ने उन पर जो भरोसा किया है, वह उसका पूरा मान रखेंगे।
मृत्युंजय तिवारी ने भाजपा में शामिल होने से पहले पटना के हनुमान मंदिर में पूजा की। इस दौरान उन्होंने खुद को राम भक्त बताते हुए कहा कि वह हर मंगलवार को मंदिर आते हैं और नियमित रूप से सुंदरकांड का पाठ भी करते हैं। इसके बाद भाजपा में शामिल होने के बाद उन्होंने पार्टी नेतृत्व का आभार जताया और कहा कि अब वह पूरी ईमानदारी के साथ भाजपा के लिए काम करेंगे।
उन्होंने ने कहा कि पार्टी ने उन पर जो भरोसा जताया है, वह उस भरोसे को पूरी निष्ठा के साथ बनाए रखेंगे। उन्होंने यहां तक कहा कि उनके खून का एक-एक कतरा भाजपा के लिए समर्पित रहेगा। उनके इस बयान को राजद छोड़ने के बाद उनकी नई राजनीतिक पारी की स्पष्ट घोषणा के तौर पर देखा जा रहा है।
राजद छोड़ने के एक हफ्ते के भीतर बदली राजनीतिक पारी
मृत्युंजय तिवारी ने 16 जुलाई को राजद से इस्तीफा दिया था। पार्टी छोड़ते समय उन्होंने नेतृत्व पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। उनका कहना था कि पिछले कुछ महीनों से पार्टी में उनकी लगातार अनदेखी हो रही थी और उन्हें अपमान का सामना करना पड़ रहा था। उन्होंने यह भी दावा किया था कि उन्होंने अपनी नाराजगी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं तक पहुंचाई और तेजस्वी यादव को भी अपनी बात बताई, लेकिन उनकी शिकायतों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
तिवारी के इस्तीफे के बाद राजद की ओर से उन्हें मनाने की कोशिश किए जाने की भी खबर सामने आई थी। पार्टी नेतृत्व की ओर से उनसे बातचीत कर मामले को सुलझाने की उम्मीद जताई गई थी, लेकिन तिवारी अपने फैसले पर कायम रहे। इसके बाद भाजपा में उनके जाने की अटकलें तेज हो गईं और अब उन्होंने औपचारिक रूप से भाजपा की सदस्यता ले ली है।
लालू यादव के पुराने भरोसेमंद नेताओं में रही पहचान
मृत्युंजय तिवारी लंबे समय तक राजद के प्रमुख प्रवक्ताओं में शामिल रहे। पार्टी के कठिन दौर में भी वह सार्वजनिक मंचों और समाचार माध्यमों के सामने राजद का पक्ष मजबूती से रखते रहे। उन्होंने अपने इस्तीफे के दौरान वर्ष 2014 का भी जिक्र किया था। उनके मुताबिक, उस समय जब राजद मुश्किल दौर से गुजर रही थी, तब लालू प्रसाद यादव ने उन्हें राष्ट्रीय प्रवक्ता और मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी थी।
तिवारी ने कहा था कि उन्होंने पार्टी की ओर से मिली जिम्मेदारियों को पूरी ईमानदारी से निभाया और लगातार राजद की विचारधारा को जनता तक पहुंचाने का काम किया। यही वजह है कि उनका पार्टी छोड़ना केवल एक नेता का इस्तीफा नहीं, बल्कि राजद के लिए राजनीतिक रूप से अहम घटनाक्रम माना गया।
तेजस्वी यादव और पार्टी नेतृत्व पर उठाए थे सवाल
राजद छोड़ते समय मृत्युंजय तिवारी ने पार्टी की मौजूदा स्थिति पर भी सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि वह आज भी लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी का सम्मान करते हैं, लेकिन पार्टी के भीतर जिस तरह से काम हो रहा है, उससे वह संतुष्ट नहीं थे।
उन्होंने आरोप लगाया था कि पार्टी में कुछ लोगों का प्रभाव इतना बढ़ गया है कि उनकी बात को ही अंतिम माना जा रहा है, जबकि लंबे समय से समर्पित होकर काम करने वाले कार्यकर्ताओं की अनदेखी हो रही है। तिवारी के मुताबिक, उन्होंने कई स्तरों पर अपनी बात रखने की कोशिश की, लेकिन जब उन्हें लगा कि उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है, तो उन्होंने राजद से अलग होने का फैसला किया।
भाजपा में शामिल होने के बाद पुराने दल पर फिर साधा निशाना
भाजपा की सदस्यता लेने के बाद मृत्युंजय तिवारी ने अपनी पुरानी पार्टी पर सीधे तौर पर हमला तो किया ही, साथ ही भाजपा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी साफ कर दी। उन्होंने कहा कि अब वह भाजपा नेतृत्व के भरोसे पर खरा उतरने के लिए पूरी ताकत से काम करेंगे।
उनके बयान से यह भी साफ है कि राजद से अलग होने के बाद उन्होंने अपनी राजनीतिक दिशा पूरी तरह बदल ली है। एक समय तक लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव के पक्ष में जोरदार तरीके से आवाज उठाने वाले तिवारी अब भाजपा के मंच से अपनी बात रखते नजर आएंगे। बिहार की राजनीति में उनका यह बदलाव इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि वह लंबे समय तक राजद के सार्वजनिक चेहरों में शामिल रहे हैं।
भाजपा में दूसरे दलों के नेताओं के आने का सिलसिला जारी
मृत्युंजय तिवारी के भाजपा में शामिल होने का घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब बिहार में अलग-अलग राजनीतिक दलों से नेताओं के भाजपा में आने की चर्चा लगातार बनी हुई है। हाल के दिनों में जन सुराज से जुड़े कई नेताओं के भाजपा में शामिल होने की खबरें भी सामने आई हैं। इनमें शिक्षाविद के.सी. सिन्हा, रितेश रंजन उर्फ बिट्टू सिंह और सुधीर शर्मा जैसे नाम शामिल हैं।
इससे पहले राजद की रितु जायसवाल के भी भाजपा में शामिल होने का मामला सामने आया था। अब मृत्युंजय तिवारी के भाजपा में जाने से बिहार की राजनीति में दल बदल का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। हालांकि, हर नेता के भाजपा में शामिल होने के पीछे अलग राजनीतिक वजहें हैं, लेकिन चुनावी माहौल में ऐसे बदलावों को राजनीतिक दल अपने-अपने तरीके से देख रहे हैं।
अब भाजपा में क्या होगी मृत्युंजय तिवारी की भूमिका?
मृत्युंजय तिवारी की सबसे बड़ी पहचान एक मुखर प्रवक्ता और राजनीतिक मुद्दों पर पार्टी का पक्ष मजबूती से रखने वाले नेता की रही है। राजद में रहते हुए वह लंबे समय तक पार्टी की आवाज बनकर सामने आते रहे। ऐसे में भाजपा में शामिल होने के बाद उनकी भूमिका को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है।
फिलहाल भाजपा में उनकी जिम्मेदारी को लेकर किसी बड़ी भूमिका की आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है। लेकिन इतना तय है कि जिस तरह वह पहले राजद के लिए सार्वजनिक मंचों पर मजबूती से बोलते थे, उसी तरह अब भाजपा के पक्ष को जनता तक पहुंचाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
मृत्युंजय तिवारी का भाजपा में जाना राजद के लिए इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि वह पार्टी के पुराने और सक्रिय चेहरों में रहे हैं। वहीं भाजपा के लिए यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है कि उसे ऐसा नेता मिला है, जो लंबे समय तक बिहार की राजनीति और राजद की अंदरूनी कार्यप्रणाली को करीब से देखता रहा है। आने वाले दिनों में तिवारी की नई राजनीतिक भूमिका और उनके बयानों पर बिहार की सियासत की नजर बनी रह सकती है।
Aryavarta Live के WhatsApp Channel से जुड़ें और हर महत्वपूर्ण अपडेट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।
WhatsApp चैनल जॉइन करें

