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आधी रात होटल पहुंची पुलिस, मुकेश सहनी ने अफसर को सुनाई खरी-खरी; बोले- कार्यक्रम रोका तो कोर्ट जाऊंगा

By Malay Ojha | Published: 10 July 2026 at 01:37 PM

उत्तर प्रदेश के महाराजगंज में प्रस्तावित रात्रि प्रवास कार्यक्रम से पहले विकासशील इंसान पार्टी के संस्थापक और बिहार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सहनी का कहना है कि देर रात पुलिस अधिकारी होटल पहुंचकर उनके कार्यक्रम और अनुमति को लेकर सवाल पूछने लगे, जबकि यह कोई सार्वजनिक सभा नहीं थी। उन्होंने इसे अनावश्यक हस्तक्षेप बताते हुए चेतावनी दी कि यदि शांतिपूर्ण कार्यक्रम में बाधा डाली गई तो वे न्यायालय का रुख करेंगे।

मुकेश सहनी ने दावा किया कि वे पिछले कई दिनों से उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों का दौरा कर रहे हैं। इसी क्रम में महाराजगंज में उनका रात्रि प्रवास तय था। उनके अनुसार रात करीब डेढ़ बजे पुलिस अधिकारी होटल पहुंचे और कार्यक्रम की अनुमति समेत कई सवाल पूछने लगे। इस दौरान उनकी एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से फोन पर तीखी बहस भी हुई।

यह सार्वजनिक सभा नहीं, फिर अनुमति क्यों?
सहनी ने कहा कि उनके रात्रि प्रवास के दौरान केवल पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से मुलाकात तथा संगठनात्मक चर्चा होती है। इसमें आम जनता की भीड़ नहीं जुटाई जाती और न ही कोई सार्वजनिक सभा आयोजित होती है। ऐसे कार्यक्रम के लिए अनुमति लेने की जरूरत नहीं होती, इसलिए पुलिस की पूछताछ पूरी तरह बेवजह थी।

चार दिन पहले भेजा था पूरा कार्यक्रम
वीआईपी प्रमुख ने बताया कि उनके दौरे का पूरा कार्यक्रम और प्रोटोकॉल चार दिन पहले ही संबंधित प्रशासन को भेज दिया गया था। इसके बावजूद देर रात पुलिस अधिकारियों का होटल पहुंचना उन्हें हैरान करने वाला लगा। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन के पास पहले से पूरी जानकारी थी तो फिर इस तरह की कार्रवाई का कोई औचित्य नहीं था।

‘हर नागरिक को कहीं भी जाने का अधिकार’
मुकेश सहनी ने कहा कि देश का संविधान हर नागरिक को किसी भी राज्य और जिले में आने-जाने तथा ठहरने का अधिकार देता है। किसी व्यक्ति को बिना उचित कारण उसके संवैधानिक अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि उनका कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण था और उसमें कानून-व्यवस्था बिगड़ने जैसी कोई आशंका नहीं थी।

सरकार के इशारे पर कार्रवाई का आरोप
सहनी ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश सरकार के इशारे पर पुलिस उनके संगठनात्मक कार्यक्रमों में व्यवधान डालने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों को किसी राजनीतिक दल के दबाव में नहीं बल्कि कानून और संविधान के अनुसार काम करना चाहिए। लोकतांत्रिक व्यवस्था में सभी राजनीतिक दलों को समान अधिकार मिलना चाहिए।

कोर्ट जाने की दी चेतावनी
पूर्व मंत्री ने साफ कहा कि यदि उनके कार्यक्रमों में भविष्य में भी इस तरह की बाधा उत्पन्न की गई तो वे कानूनी रास्ता अपनाएंगे। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाएगा ताकि संवैधानिक अधिकारों की रक्षा हो सके।

अधिकारियों को दी निष्पक्ष रहने की सलाह
मुकेश सहनी ने कहा कि सरकारें स्थायी नहीं होतीं और समय के साथ सत्ता बदलती रहती है। ऐसे में प्रशासनिक अधिकारियों को किसी भी राजनीतिक दबाव से दूर रहकर निष्पक्ष तरीके से अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि कानून का पालन करना ही प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

मामले पर राजनीतिक नजरें
मुकेश सहनी के इन आरोपों के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि पुलिस प्रशासन की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि प्रशासन इस मामले पर क्या स्पष्टीकरण देता है और आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

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आधी रात होटल पहुंची पुलिस, मुकेश सहनी ने अफसर को सुनाई खरी-खरी; बोले- कार्यक्रम रोका तो कोर्ट जाऊंगा

By Malay Ojha | Published: 10 July 2026 at 01:37 PM

उत्तर प्रदेश के महाराजगंज में प्रस्तावित रात्रि प्रवास कार्यक्रम से पहले विकासशील इंसान पार्टी के संस्थापक और बिहार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सहनी का कहना है कि देर रात पुलिस अधिकारी होटल पहुंचकर उनके कार्यक्रम और अनुमति को लेकर सवाल पूछने लगे, जबकि यह कोई सार्वजनिक सभा नहीं थी। उन्होंने इसे अनावश्यक हस्तक्षेप बताते हुए चेतावनी दी कि यदि शांतिपूर्ण कार्यक्रम में बाधा डाली गई तो वे न्यायालय का रुख करेंगे।

मुकेश सहनी ने दावा किया कि वे पिछले कई दिनों से उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों का दौरा कर रहे हैं। इसी क्रम में महाराजगंज में उनका रात्रि प्रवास तय था। उनके अनुसार रात करीब डेढ़ बजे पुलिस अधिकारी होटल पहुंचे और कार्यक्रम की अनुमति समेत कई सवाल पूछने लगे। इस दौरान उनकी एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से फोन पर तीखी बहस भी हुई।

यह सार्वजनिक सभा नहीं, फिर अनुमति क्यों?
सहनी ने कहा कि उनके रात्रि प्रवास के दौरान केवल पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से मुलाकात तथा संगठनात्मक चर्चा होती है। इसमें आम जनता की भीड़ नहीं जुटाई जाती और न ही कोई सार्वजनिक सभा आयोजित होती है। ऐसे कार्यक्रम के लिए अनुमति लेने की जरूरत नहीं होती, इसलिए पुलिस की पूछताछ पूरी तरह बेवजह थी।

चार दिन पहले भेजा था पूरा कार्यक्रम
वीआईपी प्रमुख ने बताया कि उनके दौरे का पूरा कार्यक्रम और प्रोटोकॉल चार दिन पहले ही संबंधित प्रशासन को भेज दिया गया था। इसके बावजूद देर रात पुलिस अधिकारियों का होटल पहुंचना उन्हें हैरान करने वाला लगा। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन के पास पहले से पूरी जानकारी थी तो फिर इस तरह की कार्रवाई का कोई औचित्य नहीं था।

‘हर नागरिक को कहीं भी जाने का अधिकार’
मुकेश सहनी ने कहा कि देश का संविधान हर नागरिक को किसी भी राज्य और जिले में आने-जाने तथा ठहरने का अधिकार देता है। किसी व्यक्ति को बिना उचित कारण उसके संवैधानिक अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि उनका कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण था और उसमें कानून-व्यवस्था बिगड़ने जैसी कोई आशंका नहीं थी।

सरकार के इशारे पर कार्रवाई का आरोप
सहनी ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश सरकार के इशारे पर पुलिस उनके संगठनात्मक कार्यक्रमों में व्यवधान डालने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों को किसी राजनीतिक दल के दबाव में नहीं बल्कि कानून और संविधान के अनुसार काम करना चाहिए। लोकतांत्रिक व्यवस्था में सभी राजनीतिक दलों को समान अधिकार मिलना चाहिए।

कोर्ट जाने की दी चेतावनी
पूर्व मंत्री ने साफ कहा कि यदि उनके कार्यक्रमों में भविष्य में भी इस तरह की बाधा उत्पन्न की गई तो वे कानूनी रास्ता अपनाएंगे। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाएगा ताकि संवैधानिक अधिकारों की रक्षा हो सके।

अधिकारियों को दी निष्पक्ष रहने की सलाह
मुकेश सहनी ने कहा कि सरकारें स्थायी नहीं होतीं और समय के साथ सत्ता बदलती रहती है। ऐसे में प्रशासनिक अधिकारियों को किसी भी राजनीतिक दबाव से दूर रहकर निष्पक्ष तरीके से अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि कानून का पालन करना ही प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

मामले पर राजनीतिक नजरें
मुकेश सहनी के इन आरोपों के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि पुलिस प्रशासन की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि प्रशासन इस मामले पर क्या स्पष्टीकरण देता है और आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

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