By Malay Ojha | Published: 22 July 2026 at 12:48 PM
पटना के गांधी मैदान में बुधवार को राजभवन मार्च से पहले उस समय हंगामा हो गया, जब प्रदर्शन के लिए जुटे छात्रों और पुलिस के बीच झड़प हो गई। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए बल प्रयोग किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। पुलिस कार्रवाई के बाद छात्रों का गुस्सा बढ़ गया और मौके पर तनाव की स्थिति बन गई। बड़ी संख्या में छात्र गांधी मैदान के गेट नंबर 10 के पास जुटे हुए हैं।
राजभवन मार्च का आयोजन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन यानी आइसा के बैनर तले किया गया है। तय कार्यक्रम के अनुसार दोपहर 12 बजे छात्रों को गांधी मैदान से राजभवन की ओर मार्च करना था। हालांकि, मार्च शुरू होने से पहले ही पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को गांधी मैदान के पास रोक दिया। इसी दौरान छात्रों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की और झड़प की स्थिति बन गई।
पुलिस कार्रवाई के बाद बढ़ा छात्रों का गुस्सा
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने छात्रों को रोकने के दौरान लाठीचार्ज किया। इसके बाद स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। पुलिस की ओर से भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े जाने की बात सामने आई है। कार्रवाई के बाद प्रदर्शनकारी छात्र और अधिक आक्रोशित नजर आए। मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है और प्रशासन की ओर से पूरे घटनाक्रम पर नजर रखी जा रही है।
कई विश्वविद्यालयों के छात्र प्रदर्शन में शामिल
प्रदर्शन में पटना विश्वविद्यालय सहित बिहार के अलग-अलग विश्वविद्यालयों और कॉलेजों से छात्र पहुंचे हैं। कई छात्र संगठनों के प्रतिनिधि भी प्रदर्शन में शामिल बताए जा रहे हैं। सुबह से ही गांधी मैदान के गेट नंबर 10 के आसपास छात्रों की आवाजाही जारी रही। प्रदर्शन में शामिल छात्र हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर पहुंचे, जिन पर शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार, परीक्षा में गड़बड़ी, पेपर लीक, फीस बढ़ोतरी और शिक्षा के निजीकरण के खिलाफ नारे लिखे हैं।
दिल्ली की घटना के विरोध में प्रदर्शन
आइसा ने इस प्रदर्शन को दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के साथ हुई कथित पुलिस कार्रवाई के विरोध से जोड़ते हुए आयोजित किया है। संगठन का कहना है कि शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन है। इसी के विरोध में बिहार के छात्र और युवा पटना में राजभवन मार्च के जरिए अपना विरोध दर्ज कराना चाहते हैं।
शिक्षा नीति के खिलाफ भी उठेगी आवाज
आयोजकों का कहना है कि प्रदर्शन सिर्फ दिल्ली की घटना तक सीमित नहीं है। इसके जरिए केंद्र और राज्य सरकार की शिक्षा नीतियों को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। छात्रों का आरोप है कि शिक्षा के क्षेत्र में लगातार ऐसी नीतियां लागू की जा रही हैं, जिनका सीधा असर विद्यार्थियों और शोधार्थियों पर पड़ रहा है। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा को आम छात्रों के लिए सुलभ बनाने और विश्वविद्यालयों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है।
पेपर लीक की जांच तेज करने की मांग
प्रदर्शन में शामिल छात्र संगठनों की प्रमुख मांगों में सभी पेपर लीक मामलों की फास्ट ट्रैक जांच शामिल है। छात्रों का कहना है कि प्रतियोगी और विश्वविद्यालय परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं से मेहनत करने वाले विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित होता है। ऐसे मामलों की जल्द जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि परीक्षा व्यवस्था में छात्रों का भरोसा कायम रह सके।
7.5 सीजीपीए की अनिवार्यता खत्म करने की मांग
प्रदर्शनकारियों ने 7.5 सीजीपीए की अनिवार्यता को समाप्त करने की भी मांग उठाई है। उनका कहना है कि अलग-अलग विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों की मूल्यांकन व्यवस्था और अंक देने का तरीका अलग हो सकता है। ऐसे में किसी एक तय मानक को सभी विद्यार्थियों पर लागू करना उचित नहीं है। छात्रों ने सभी विद्यार्थियों को समान डिग्री देने की मांग भी उठाई है।
बढ़ी फीस वापस लेने की मांग
छात्र संगठनों ने स्नातक, परास्नातक और पीएचडी पाठ्यक्रमों की बढ़ी हुई फीस वापस लेने की मांग भी की है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उच्च शिक्षा लगातार महंगी होती जा रही है और इसका सबसे ज्यादा असर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आने वाले छात्रों पर पड़ता है। उनका कहना है कि शिक्षा को कारोबार बनाने के बजाय हर वर्ग के विद्यार्थियों की पहुंच में रखा जाना चाहिए।
शोधार्थियों के लिए फेलोशिप की मांग
प्रदर्शन के दौरान शोधार्थियों के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया गया। आइसा की ओर से सभी विश्वविद्यालयों में पीएचडी शोधार्थियों के लिए नॉन-नेट फेलोशिप लागू करने की मांग की गई है। संगठन का कहना है कि शोध के क्षेत्र में काम करने वाले विद्यार्थियों को आर्थिक मदद मिलना जरूरी है, ताकि वे बिना आर्थिक दबाव के अपना शोध पूरा कर सकें।
शिक्षा के निजीकरण का भी विरोध
राजभवन मार्च के जरिए शिक्षा के निजीकरण के खिलाफ भी आवाज उठाने की तैयारी है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकारी शिक्षण संस्थानों को मजबूत करने के बजाय निजी संस्थानों को बढ़ावा देने से शिक्षा आम लोगों की पहुंच से दूर हो सकती है। छात्रों ने सरकारी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।
विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता बनाए रखने पर जोर
प्रदर्शन में विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता बनाए रखने की मांग भी उठाई जा रही है। छात्र संगठनों का कहना है कि विश्वविद्यालयों को शैक्षणिक और प्रशासनिक मामलों में स्वतंत्र रूप से काम करने का अधिकार मिलना चाहिए। उनका आरोप है कि विश्वविद्यालयों के कामकाज में बढ़ते हस्तक्षेप से शिक्षा और शोध की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
प्रदर्शन में शिक्षक और शोधार्थी भी पहुंचे
आयोजकों के मुताबिक, मार्च में अलग-अलग विश्वविद्यालयों के छात्र-छात्राओं के अलावा शोधार्थी, शिक्षक, कर्मचारी और कई लोकतांत्रिक संगठनों से जुड़े लोग भी शामिल हुए हैं। संगठन का दावा है कि समय बढ़ने के साथ प्रदर्शनकारियों की संख्या और बढ़ सकती है। यही वजह है कि प्रशासन ने गांधी मैदान और आसपास के इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की है।
प्रशासन की निगरानी में पूरा इलाका
छात्रों के प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई के बाद गांधी मैदान के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। पुलिस की कोशिश है कि प्रदर्शनकारी निर्धारित क्षेत्र से आगे न बढ़ें और स्थिति नियंत्रण से बाहर न जाए। वहीं, प्रदर्शनकारी राजभवन तक मार्च निकालने की मांग पर कायम हैं। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच बढ़े तनाव के बीच राजभवन मार्च निकल पाएगा या नहीं।
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