Thursday, June 4, 2026

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PM Surya Ghar Yojana: सरकारी भवनों पर सौर ऊर्जा लगाने में बिहार अव्वल, मिला राष्ट्रीय सम्मान

By aryavartalive | Published: 04 June 2026 at 08:28 PM

प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने में उल्लेखनीय काम करने के लिए बिहार को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। जिला पदाधिकारियों के कार्यालयों और सरकारी आवासों की छतों पर सौर ऊर्जा प्रणालियां स्थापित करने की पहल के लिए राज्य को प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किया गया। यह सम्मान देशभर में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के प्रयासों के बीच बिहार की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

यह सम्मान राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान प्रदान किया गया, जिसमें देशभर में सौर ऊर्जा विस्तार की उपलब्धियों की समीक्षा की गई। समारोह में बिहार की ओर से उत्तर बिहार विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध निदेशक एवं राज्य अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी के निदेशक राहुल कुमार ने पुरस्कार ग्रहण किया।

सरकारी भवनों पर सौर ऊर्जा का बड़ा नेटवर्क
राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे जल-जीवन-हरियाली अभियान के अंतर्गत सरकारी भवनों को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। इसी अभियान के तहत हजारों सरकारी कार्यालयों, विद्यालयों और अन्य भवनों की छतों पर सौर ऊर्जा प्रणालियां स्थापित की गई हैं। इसका लाभ ऊर्जा बचत और पर्यावरण संरक्षण दोनों रूपों में दिखाई दे रहा है।

12 हजार से अधिक भवनों का हुआ सौर ऊर्जाकरण
सरकारी आंकड़ों के अनुसार राज्य में लगभग 12 हजार सरकारी भवनों पर सौर ऊर्जा प्रणाली स्थापित की जा चुकी है। इससे पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम हुई है और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिला है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल आने वाले वर्षों में ऊर्जा खर्च को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

ऊर्जा विभाग ने बताया सामूहिक प्रयास का परिणाम
ऊर्जा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस उपलब्धि को राज्य सरकार की दूरदर्शी सोच और विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयासों का परिणाम बताया है। अधिकारियों का कहना है कि सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए कई स्तरों पर लगातार काम किया गया, जिसके सकारात्मक नतीजे अब राष्ट्रीय स्तर पर दिखाई दे रहे हैं।

मुख्यमंत्री के नेतृत्व का किया उल्लेख
ऊर्जा विभाग की ओर से कहा गया कि यह उपलब्धि राज्य के नेतृत्व, प्रशासनिक इच्छाशक्ति और अधिकारियों की मेहनत का प्रतिफल है। विभाग का मानना है कि सौर ऊर्जा के क्षेत्र में राज्य ने जो मॉडल विकसित किया है, वह अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।

स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में बढ़ रही भागीदारी
पिछले कुछ वर्षों में राज्य में अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं पर विशेष जोर दिया गया है। सरकारी भवनों के अलावा आम नागरिकों को भी सौर ऊर्जा अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ बिजली उत्पादन के वैकल्पिक स्रोतों को मजबूती मिल रही है।

आने वाले समय में और बढ़ेगा विस्तार
ऊर्जा विभाग का लक्ष्य आने वाले वर्षों में और अधिक सरकारी भवनों को सौर ऊर्जा से जोड़ना है। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में भी रूफटॉप सोलर प्रणाली के विस्तार की योजना पर काम किया जा रहा है। विभाग का दावा है कि इससे स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में राज्य नई ऊंचाइयों को छू सकेगा।

हरित विकास की दिशा में अहम कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि सौर ऊर्जा का बढ़ता उपयोग केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण, कार्बन उत्सर्जन में कमी और टिकाऊ विकास के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। राष्ट्रीय सम्मान मिलने से राज्य की इस पहल को नई पहचान मिली है।

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PM Surya Ghar Yojana: सरकारी भवनों पर सौर ऊर्जा लगाने में बिहार अव्वल, मिला राष्ट्रीय सम्मान

By aryavartalive | Published: 04 June 2026 at 08:28 PM

प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने में उल्लेखनीय काम करने के लिए बिहार को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। जिला पदाधिकारियों के कार्यालयों और सरकारी आवासों की छतों पर सौर ऊर्जा प्रणालियां स्थापित करने की पहल के लिए राज्य को प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किया गया। यह सम्मान देशभर में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के प्रयासों के बीच बिहार की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

यह सम्मान राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान प्रदान किया गया, जिसमें देशभर में सौर ऊर्जा विस्तार की उपलब्धियों की समीक्षा की गई। समारोह में बिहार की ओर से उत्तर बिहार विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध निदेशक एवं राज्य अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी के निदेशक राहुल कुमार ने पुरस्कार ग्रहण किया।

सरकारी भवनों पर सौर ऊर्जा का बड़ा नेटवर्क
राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे जल-जीवन-हरियाली अभियान के अंतर्गत सरकारी भवनों को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। इसी अभियान के तहत हजारों सरकारी कार्यालयों, विद्यालयों और अन्य भवनों की छतों पर सौर ऊर्जा प्रणालियां स्थापित की गई हैं। इसका लाभ ऊर्जा बचत और पर्यावरण संरक्षण दोनों रूपों में दिखाई दे रहा है।

12 हजार से अधिक भवनों का हुआ सौर ऊर्जाकरण
सरकारी आंकड़ों के अनुसार राज्य में लगभग 12 हजार सरकारी भवनों पर सौर ऊर्जा प्रणाली स्थापित की जा चुकी है। इससे पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम हुई है और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिला है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल आने वाले वर्षों में ऊर्जा खर्च को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

ऊर्जा विभाग ने बताया सामूहिक प्रयास का परिणाम
ऊर्जा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस उपलब्धि को राज्य सरकार की दूरदर्शी सोच और विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयासों का परिणाम बताया है। अधिकारियों का कहना है कि सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए कई स्तरों पर लगातार काम किया गया, जिसके सकारात्मक नतीजे अब राष्ट्रीय स्तर पर दिखाई दे रहे हैं।

मुख्यमंत्री के नेतृत्व का किया उल्लेख
ऊर्जा विभाग की ओर से कहा गया कि यह उपलब्धि राज्य के नेतृत्व, प्रशासनिक इच्छाशक्ति और अधिकारियों की मेहनत का प्रतिफल है। विभाग का मानना है कि सौर ऊर्जा के क्षेत्र में राज्य ने जो मॉडल विकसित किया है, वह अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है।

स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में बढ़ रही भागीदारी
पिछले कुछ वर्षों में राज्य में अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं पर विशेष जोर दिया गया है। सरकारी भवनों के अलावा आम नागरिकों को भी सौर ऊर्जा अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ बिजली उत्पादन के वैकल्पिक स्रोतों को मजबूती मिल रही है।

आने वाले समय में और बढ़ेगा विस्तार
ऊर्जा विभाग का लक्ष्य आने वाले वर्षों में और अधिक सरकारी भवनों को सौर ऊर्जा से जोड़ना है। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में भी रूफटॉप सोलर प्रणाली के विस्तार की योजना पर काम किया जा रहा है। विभाग का दावा है कि इससे स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में राज्य नई ऊंचाइयों को छू सकेगा।

हरित विकास की दिशा में अहम कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि सौर ऊर्जा का बढ़ता उपयोग केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण, कार्बन उत्सर्जन में कमी और टिकाऊ विकास के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। राष्ट्रीय सम्मान मिलने से राज्य की इस पहल को नई पहचान मिली है।

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