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राम मंदिर चढ़ावा चोरी: हर सुबह फोन पर बनती थी साजिश, कैमरे के सामने खड़े होकर ऐसे उड़ाए जाते थे दान के पैसे

By Malay Ojha | Published: 13 July 2026 at 08:56 AM

राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए और चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। जांच कर रही विशेष जांच टीम को मिले शुरुआती सबूतों से संकेत मिला है कि यह चोरी किसी एक व्यक्ति का काम नहीं थी, बल्कि पूरी योजना के साथ अंजाम दी जा रही थी। आरोप है कि हर दिन ड्यूटी शुरू होने से पहले फोन पर बातचीत कर जिम्मेदारियां तय की जाती थीं। कौन दान की रकम निकालेगा, कौन उसे छिपाएगा और कौन कैमरे के सामने खड़ा होकर दृश्य रोक देगा, इसकी तैयारी पहले से कर ली जाती थी।

जांच टीम को मंदिर परिसर के सीसीटीवी फुटेज की जांच के दौरान करीब 70 ऐसी घटनाएं दिखाई दी हैं, जिन्हें संदिग्ध माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि फुटेज में दिखाई गई गतिविधियां आरोपियों से पूछताछ में सामने आए बयानों से काफी हद तक मेल खाती हैं। यही वजह है कि अब जांच का दायरा और बढ़ा दिया गया है।

पूरी टीम मिलकर करती थी काम
पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी आपस में समन्वय बनाकर काम करते थे। आरोप है कि कुछ लोग दान पेटी से निकाले गए नोटों को संभालते थे, जबकि दूसरे साथी कैमरे के सामने खड़े होकर दृश्य को ढकने की कोशिश करते थे। इससे चोरी की पूरी घटना स्पष्ट रूप से रिकॉर्ड नहीं हो पाती थी। जांच एजेंसियां इस पूरे तरीके को संगठित योजना का हिस्सा मान रही हैं।

सीसीटीवी में कई आरोपी दिखाई दिए
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, कई फुटेज में अविनाश और मनीष नोटों को सीधा करते और मौका मिलते ही उन्हें अपने कपड़ों में छिपाते हुए दिखाई दिए हैं। वहीं अनुकल्प, करुणेश, लवकुश और अन्य लोगों की मौजूदगी भी कई मौकों पर दर्ज हुई है। आरोप है कि इन लोगों की भूमिका कैमरे की निगरानी को प्रभावित करने की थी, ताकि चोरी आसानी से हो सके।

पैसों के बंटवारे को लेकर भी खुलासा
पूछताछ के दौरान यह भी जानकारी सामने आई है कि चोरी के बाद दान की रकम आपस में बांटी जाती थी। हालांकि, जांच में यह दावा भी सामने आया है कि कई बार अविनाश अपने पास बाकी लोगों की तुलना में अधिक हिस्सा रख लेता था। जांच एजेंसियां इस दावे की भी अलग से पुष्टि कर रही हैं।

क्या कंट्रोल रूम तक भी थी पहुंच?
जांच का एक बड़ा पहलू अब सीसीटीवी व्यवस्था से भी जुड़ गया है। अधिकारियों को शक है कि जिन फुटेज के उपलब्ध न होने या हटाए जाने की बात सामने आई है, उसके पीछे आरोपियों की सीसीटीवी नियंत्रण कक्ष तक किसी प्रकार की पहुंच हो सकती है। इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए तकनीकी पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

दो अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के घेरे में
सीसीटीवी फुटेज में कई मौकों पर सुभाष श्रीवास्तव और टिन्नू यादव की मौजूदगी भी दिखाई देने की बात सामने आई है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या उन्हें कथित चोरी की जानकारी थी या उनकी भूमिका किसी अन्य रूप में थी। इसी आधार पर दोनों से विस्तृत पूछताछ की तैयारी की जा रही है।

आज खत्म हो रही न्यायिक हिरासत
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों की न्यायिक हिरासत सोमवार को समाप्त हो रही है। अयोध्या पुलिस उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश करेगी। माना जा रहा है कि जांच को आगे बढ़ाने के लिए पुलिस टिन्नू यादव और सुभाष श्रीवास्तव की रिमांड की मांग कर सकती है।

चार आरोपियों से पूछताछ पूरी, चार बाकी
इस मामले में अब तक अविनाश, अनुकल्प, लवकुश और करुणेश से पुलिस रिमांड के दौरान पूछताछ की जा चुकी है। जबकि टिन्नू यादव, सुभाष श्रीवास्तव, रामशंकर मिश्रा और मनीष यादव से अभी विस्तृत पूछताछ बाकी है। जांच एजेंसियों का मानना है कि इनसे पूछताछ के बाद पूरे घटनाक्रम की कई और परतें खुल सकती हैं।

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राम मंदिर चढ़ावा चोरी: हर सुबह फोन पर बनती थी साजिश, कैमरे के सामने खड़े होकर ऐसे उड़ाए जाते थे दान के पैसे

By Malay Ojha | Published: 13 July 2026 at 08:56 AM

राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए और चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। जांच कर रही विशेष जांच टीम को मिले शुरुआती सबूतों से संकेत मिला है कि यह चोरी किसी एक व्यक्ति का काम नहीं थी, बल्कि पूरी योजना के साथ अंजाम दी जा रही थी। आरोप है कि हर दिन ड्यूटी शुरू होने से पहले फोन पर बातचीत कर जिम्मेदारियां तय की जाती थीं। कौन दान की रकम निकालेगा, कौन उसे छिपाएगा और कौन कैमरे के सामने खड़ा होकर दृश्य रोक देगा, इसकी तैयारी पहले से कर ली जाती थी।

जांच टीम को मंदिर परिसर के सीसीटीवी फुटेज की जांच के दौरान करीब 70 ऐसी घटनाएं दिखाई दी हैं, जिन्हें संदिग्ध माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि फुटेज में दिखाई गई गतिविधियां आरोपियों से पूछताछ में सामने आए बयानों से काफी हद तक मेल खाती हैं। यही वजह है कि अब जांच का दायरा और बढ़ा दिया गया है।

पूरी टीम मिलकर करती थी काम
पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी आपस में समन्वय बनाकर काम करते थे। आरोप है कि कुछ लोग दान पेटी से निकाले गए नोटों को संभालते थे, जबकि दूसरे साथी कैमरे के सामने खड़े होकर दृश्य को ढकने की कोशिश करते थे। इससे चोरी की पूरी घटना स्पष्ट रूप से रिकॉर्ड नहीं हो पाती थी। जांच एजेंसियां इस पूरे तरीके को संगठित योजना का हिस्सा मान रही हैं।

सीसीटीवी में कई आरोपी दिखाई दिए
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, कई फुटेज में अविनाश और मनीष नोटों को सीधा करते और मौका मिलते ही उन्हें अपने कपड़ों में छिपाते हुए दिखाई दिए हैं। वहीं अनुकल्प, करुणेश, लवकुश और अन्य लोगों की मौजूदगी भी कई मौकों पर दर्ज हुई है। आरोप है कि इन लोगों की भूमिका कैमरे की निगरानी को प्रभावित करने की थी, ताकि चोरी आसानी से हो सके।

पैसों के बंटवारे को लेकर भी खुलासा
पूछताछ के दौरान यह भी जानकारी सामने आई है कि चोरी के बाद दान की रकम आपस में बांटी जाती थी। हालांकि, जांच में यह दावा भी सामने आया है कि कई बार अविनाश अपने पास बाकी लोगों की तुलना में अधिक हिस्सा रख लेता था। जांच एजेंसियां इस दावे की भी अलग से पुष्टि कर रही हैं।

क्या कंट्रोल रूम तक भी थी पहुंच?
जांच का एक बड़ा पहलू अब सीसीटीवी व्यवस्था से भी जुड़ गया है। अधिकारियों को शक है कि जिन फुटेज के उपलब्ध न होने या हटाए जाने की बात सामने आई है, उसके पीछे आरोपियों की सीसीटीवी नियंत्रण कक्ष तक किसी प्रकार की पहुंच हो सकती है। इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए तकनीकी पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

दो अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के घेरे में
सीसीटीवी फुटेज में कई मौकों पर सुभाष श्रीवास्तव और टिन्नू यादव की मौजूदगी भी दिखाई देने की बात सामने आई है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या उन्हें कथित चोरी की जानकारी थी या उनकी भूमिका किसी अन्य रूप में थी। इसी आधार पर दोनों से विस्तृत पूछताछ की तैयारी की जा रही है।

आज खत्म हो रही न्यायिक हिरासत
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों की न्यायिक हिरासत सोमवार को समाप्त हो रही है। अयोध्या पुलिस उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश करेगी। माना जा रहा है कि जांच को आगे बढ़ाने के लिए पुलिस टिन्नू यादव और सुभाष श्रीवास्तव की रिमांड की मांग कर सकती है।

चार आरोपियों से पूछताछ पूरी, चार बाकी
इस मामले में अब तक अविनाश, अनुकल्प, लवकुश और करुणेश से पुलिस रिमांड के दौरान पूछताछ की जा चुकी है। जबकि टिन्नू यादव, सुभाष श्रीवास्तव, रामशंकर मिश्रा और मनीष यादव से अभी विस्तृत पूछताछ बाकी है। जांच एजेंसियों का मानना है कि इनसे पूछताछ के बाद पूरे घटनाक्रम की कई और परतें खुल सकती हैं।

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