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छात्र-युवाओं से शपथ पत्र लें कि उकसावे के बावजूद नहीं करेंगे हिंसा, अभिजीत दीपके से धनंजय ने कहा

By aryavartalive | Published: 23 July 2026 at 08:56 AM

दिल्ली और पटना में छात्र-युवा आंदोलनों के दौरान सामने आई हिंसा और झड़प की घटनाओं पर सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) ने चिंता जताई है। पार्टी के बिहार प्रदेश अध्यक्ष धनंजय कुमार सिन्हा ने प्रदर्शनकारियों से हिंसा से पूरी तरह दूर रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि किसी भी परिस्थिति में आंदोलनकारियों की ओर से होने वाली हिंसा पूरे आंदोलन को कमजोर कर सकती है।

जंतर-मंतर और पटना में झड़प की खबरों पर चिंता
धनंजय कुमार सिन्हा ने एक पोस्टर जारी कर कहा कि बुधवार रात जंतर-मंतर के आसपास पुलिस और छात्रों के बीच झड़प की खबरें सामने आई हैं। वहीं, पटना में भी छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हिंसा की सूचना मिली है। उन्होंने कहा कि आंदोलन चाहे कितनी भी मुश्किल परिस्थिति में क्यों न हो, प्रदर्शनकारियों को हिंसा का रास्ता नहीं अपनाना चाहिए।

‘हिंसा से आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश’ का दावा
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के बिहार प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार के निर्देश पर छात्र-युवाओं को हिंसा के लिए उकसाने की कोशिश की जा रही है, जिससे आंदोलन को कमजोर किया जा सके। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में प्रदर्शनकारियों को संयम बनाए रखना होगा और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को उठाना होगा।

सोनम वांगचुक से की खास अपील
धनंजय सिन्हा ने सोनम वांगचुक, अभिजीत दीपके और उनकी टीम से अपील की कि जंतर-मंतर पर आंदोलन के समर्थन में पहुंचने वाले छात्र-युवाओं से शपथ पत्र लिया जाए। इसमें प्रदर्शनकारी यह संकल्प लें कि वे किसी भी परिस्थिति में अपनी ओर से हिंसा नहीं करेंगे, चाहे उनके खिलाफ लाठीचार्ज ही क्यों न किया जाए।

हिंसा नहीं रुकी तो आंदोलन वापस लेने का सुझाव
उन्होंने कहा कि अगर इसके बावजूद हिंसा और झड़प की घटनाओं पर रोक नहीं लगती है तो आंदोलन को फिलहाल वापस लेने पर विचार किया जाना चाहिए। इसके बाद देशभर में भ्रमण कर छात्र-युवा प्रतिनिधियों और समर्थकों को गांव-गांव तक पहुंचने की रणनीति बनाई जा सकती है।

गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करने की अपील
धनंजय सिन्हा के मुताबिक, छात्र-युवा प्रतिनिधि देश के अलग-अलग हिस्सों में जाकर लोगों को आंदोलन के मुद्दों और सरकार के कथित तानाशाही रवैये के बारे में जानकारी दे सकते हैं। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण और व्यापक जनसमर्थन के जरिए आंदोलन को ज्यादा मजबूत बनाया जा सकता है।

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छात्र-युवाओं से शपथ पत्र लें कि उकसावे के बावजूद नहीं करेंगे हिंसा, अभिजीत दीपके से धनंजय ने कहा

By aryavartalive | Published: 23 July 2026 at 08:56 AM

दिल्ली और पटना में छात्र-युवा आंदोलनों के दौरान सामने आई हिंसा और झड़प की घटनाओं पर सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) ने चिंता जताई है। पार्टी के बिहार प्रदेश अध्यक्ष धनंजय कुमार सिन्हा ने प्रदर्शनकारियों से हिंसा से पूरी तरह दूर रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि किसी भी परिस्थिति में आंदोलनकारियों की ओर से होने वाली हिंसा पूरे आंदोलन को कमजोर कर सकती है।

जंतर-मंतर और पटना में झड़प की खबरों पर चिंता
धनंजय कुमार सिन्हा ने एक पोस्टर जारी कर कहा कि बुधवार रात जंतर-मंतर के आसपास पुलिस और छात्रों के बीच झड़प की खबरें सामने आई हैं। वहीं, पटना में भी छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हिंसा की सूचना मिली है। उन्होंने कहा कि आंदोलन चाहे कितनी भी मुश्किल परिस्थिति में क्यों न हो, प्रदर्शनकारियों को हिंसा का रास्ता नहीं अपनाना चाहिए।

‘हिंसा से आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश’ का दावा
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के बिहार प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार के निर्देश पर छात्र-युवाओं को हिंसा के लिए उकसाने की कोशिश की जा रही है, जिससे आंदोलन को कमजोर किया जा सके। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में प्रदर्शनकारियों को संयम बनाए रखना होगा और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को उठाना होगा।

सोनम वांगचुक से की खास अपील
धनंजय सिन्हा ने सोनम वांगचुक, अभिजीत दीपके और उनकी टीम से अपील की कि जंतर-मंतर पर आंदोलन के समर्थन में पहुंचने वाले छात्र-युवाओं से शपथ पत्र लिया जाए। इसमें प्रदर्शनकारी यह संकल्प लें कि वे किसी भी परिस्थिति में अपनी ओर से हिंसा नहीं करेंगे, चाहे उनके खिलाफ लाठीचार्ज ही क्यों न किया जाए।

हिंसा नहीं रुकी तो आंदोलन वापस लेने का सुझाव
उन्होंने कहा कि अगर इसके बावजूद हिंसा और झड़प की घटनाओं पर रोक नहीं लगती है तो आंदोलन को फिलहाल वापस लेने पर विचार किया जाना चाहिए। इसके बाद देशभर में भ्रमण कर छात्र-युवा प्रतिनिधियों और समर्थकों को गांव-गांव तक पहुंचने की रणनीति बनाई जा सकती है।

गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करने की अपील
धनंजय सिन्हा के मुताबिक, छात्र-युवा प्रतिनिधि देश के अलग-अलग हिस्सों में जाकर लोगों को आंदोलन के मुद्दों और सरकार के कथित तानाशाही रवैये के बारे में जानकारी दे सकते हैं। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण और व्यापक जनसमर्थन के जरिए आंदोलन को ज्यादा मजबूत बनाया जा सकता है।

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