By Malay Ojha | Published: 19 August 2026 at 08:03 AM
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही मानसूनी बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर ने बाढ़ की चिंता बढ़ा दी है। राज्य के 13 जिलों के करीब 173 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इन इलाकों में करीब 84,362 लोग और 13,058 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ है। हालांकि, राहत आयुक्त ने साफ किया है कि फिलहाल प्रदेश में स्थिति नियंत्रण में है और प्रशासन को पूरी तरह सतर्क रखा गया है।
राज्य राहत आयुक्त कार्यालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, बाढ़ का असर बदायूं, बहराइच, बलिया, बाराबंकी, बिजनौर, फर्रुखाबाद, गौतम बुद्ध नगर, गोंडा, कासगंज, लखीमपुर खीरी, मुजफ्फरनगर, सीतापुर और उन्नाव में देखा गया है। इन जिलों में निचले इलाकों पर प्रशासन की खास नजर है और हालात बिगड़ने की स्थिति में लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने की तैयारी की गई है।
प्रभावित लोगों को सुरक्षित पहुंचाने पर जोर
राज्य राहत आयुक्त ऋषिकेश भास्कर यशोदा ने मंगलवार को बाढ़ की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को प्रभावित इलाकों में लगातार निगरानी रखने और जरूरत पड़ने पर तत्काल राहत पहुंचाने के निर्देश दिए। प्रशासन की प्राथमिकता बाढ़ प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के साथ भोजन, स्वास्थ्य और दूसरी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
1,589 बाढ़ चौकियां, 1,263 आश्रय गृह तैयार
बाढ़ से निपटने के लिए पूरे प्रदेश में 1,589 बाढ़ चौकियां बनाई गई हैं। इसके अलावा 1,263 बाढ़ आश्रय गृह तैयार रखे गए हैं। इनमें से 41 आश्रय गृह फिलहाल सक्रिय हैं, जहां 1,045 लोग रह रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि जरूरत बढ़ने पर दूसरे आश्रय गृयों को भी तत्काल सक्रिय किया जा सकता है।
अब तक 4,845 लोगों को सुरक्षित निकाला
बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान लगातार चल रहा है। प्रशासन के अनुसार, अब तक 4,845 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। गांवों और जलभराव वाले क्षेत्रों में फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए 428 नाव और मोटर बोट लगाई गई हैं। इनके साथ 1,101 स्थानीय गोताखोरों को भी राहत कार्य में लगाया गया है।
हजारों परिवारों तक पहुंचा खाना
बाढ़ के बीच प्रभावित परिवारों के लिए खाने की व्यवस्था भी की जा रही है। अब तक 15,238 खाद्यान्न पैकेट और 30,316 लंच पैकेट लोगों के बीच बांटे जा चुके हैं। प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि जिन इलाकों में लोगों को घरों से बाहर निकलने में परेशानी हो रही है, वहां राहत सामग्री पहुंचाने में देरी न हो।
16 एनडीआरएफ टीमें तैनात
किसी भी बड़ी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रदेश में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की 16 टीमें तैनात की गई हैं। इसके अलावा राज्य आपदा मोचन बल और प्रांतीय सशस्त्र बल की टीमों को 52 जिलों में तैयार रखा गया है। अधिकारियों को स्थानीय स्तर पर भी संसाधनों और बचाव दलों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
कंट्रोल रूम से जिलों पर लगातार नजर
बाढ़ की स्थिति पर नजर रखने के लिए राज्य राहत आयुक्त कार्यालय का नियंत्रण कक्ष लगातार जिलों के संपर्क में है। अलग-अलग जिलों से मिलने वाली सूचनाओं के आधार पर राहत और बचाव कार्यों को आगे बढ़ाया जा रहा है। बाढ़ या आपदा से जुड़ी शिकायत और मदद के लिए 1070 हेल्पलाइन पर संपर्क किया जा सकता है। यहां मिलने वाली सूचनाओं पर तत्काल कार्रवाई का दावा किया गया है।
मौसम की चेतावनी सीधे लोगों तक पहुंचाई जा रही
प्रशासन ने मौसम विभाग की चेतावनियों को समय पर लोगों तक पहुंचाने के लिए मोबाइल संदेशों का भी सहारा लिया है। 1 अगस्त से 18 अगस्त 2026 के बीच प्रदेश में 140.52 करोड़ से अधिक संदेश भेजे जाने की जानकारी दी गई है। इसके साथ ही सोशल मीडिया के जरिए भी लोगों को बाढ़ से बचाव और आपदा के दौरान जरूरी सावधानियों की जानकारी लगातार दी जा रही है।
प्रशासन का दावा-स्थिति नियंत्रण में
फिलहाल सरकार का कहना है कि प्रदेश में बाढ़ की स्थिति नियंत्रण में है। इसके बावजूद नदियों के जलस्तर, बारिश और मौसम के पूर्वानुमान को देखते हुए जिला प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा गया है। खासकर निचले इलाकों और पहले से प्रभावित गांवों में निगरानी बढ़ाई गई है। प्रशासन की कोशिश है कि अगर आने वाले दिनों में बारिश या नदियों का जलस्तर बढ़ता है तो लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके।
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