By aryavartalive | Published: 07 June 2026 at 02:25 PM
नालंदा जिले के एक 18 वर्षीय युवक को खेलकूद के दौरान लगी गंभीर घुटने की चोट से बड़ी राहत मिली है। घुटने के अंदर मौजूद महत्वपूर्ण लिगामेंट के क्षतिग्रस्त होने के बाद उसका सफल ऑपरेशन किया गया है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में हुई इस सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति पूरी तरह सामान्य बताई जा रही है और वह जल्द ही सामान्य गतिविधियों में लौट सकेगा।
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार युवक के दाहिने घुटने का एसीएल रिकंस्ट्रक्शन ऑपरेशन किया गया। करीब दो घंटे तक चली इस जटिल प्रक्रिया को हड्डी रोग विशेषज्ञों की टीम ने सफलतापूर्वक पूरा किया। ऑपरेशन के बाद मरीज को निगरानी में रखा गया, जहां उसकी स्थिति लगातार स्थिर बनी हुई है। चिकित्सकों का कहना है कि उपचार की प्रक्रिया सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है।
जांच में सामने आई गंभीर चोट
परिजनों के अनुसार युवक को स्थानीय खेल प्रतियोगिता के दौरान दाहिने पैर में गंभीर चोट लगी थी। शुरुआत में सामान्य चोट समझकर इलाज कराया गया, लेकिन समय बीतने के साथ घुटने में दर्द और अस्थिरता बढ़ती चली गई। स्थिति ऐसी हो गई कि चलते समय शरीर का संतुलन बनाए रखना भी मुश्किल हो रहा था।
चलने-फिरने में आने लगी थी परेशानी
घुटने की चोट के कारण युवक को दैनिक कार्यों में भी दिक्कत होने लगी थी। सीढ़ियां चढ़ना, दौड़ना और लंबे समय तक खड़े रहना मुश्किल हो गया था। लगातार बढ़ रही परेशानी के बाद विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श लिया गया, जिसके बाद विस्तृत जांच कराई गई।
एमआरआई जांच में हुआ खुलासा
चिकित्सकीय परीक्षण और एमआरआई रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि युवक के घुटने का एसीएल पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है। एसीएल घुटने के अंदर मौजूद एक महत्वपूर्ण लिगामेंट होता है, जो पैर की स्थिरता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। इसके क्षतिग्रस्त होने पर व्यक्ति को चलने और दौड़ने में गंभीर समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने किया उपचार
अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञों की टीम ने मामले का मूल्यांकन करने के बाद ऑपरेशन का निर्णय लिया। आधुनिक तकनीक की सहायता से एसीएल रिकंस्ट्रक्शन प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया। चिकित्सकों का कहना है कि इस तरह की सर्जरी में क्षतिग्रस्त लिगामेंट की जगह नया लिगामेंट स्थापित किया जाता है, जिससे घुटने की कार्यक्षमता दोबारा बहाल हो सके।
युवाओं और खिलाड़ियों में बढ़ रही समस्या
विशेषज्ञों का कहना है कि एसीएल की चोट अक्सर खेल गतिविधियों में हिस्सा लेने वाले युवाओं और खिलाड़ियों में देखने को मिलती है। अचानक दिशा बदलने, कूदने या तेज गति से दौड़ने के दौरान घुटने पर अधिक दबाव पड़ने से यह चोट लग सकती है। समय पर जांच और उपचार नहीं होने पर यह समस्या लंबे समय तक बनी रह सकती है।
समय पर इलाज से मिलती है राहत
हड्डी रोग विशेषज्ञों के अनुसार एसीएल की चोट को नजरअंदाज करना भविष्य में गंभीर परेशानी का कारण बन सकता है। समय रहते उचित जांच और आधुनिक सर्जरी की मदद से मरीज पूरी तरह स्वस्थ होकर सामान्य जीवन और खेल गतिविधियों में वापसी कर सकता है।
फिलहाल चल रही है फिजियोथेरेपी
ऑपरेशन के बाद मरीज को पुनर्वास प्रक्रिया के तहत फिजियोथेरेपी दी जा रही है। चिकित्सकों का कहना है कि नियमित व्यायाम और चिकित्सकीय सलाह का पालन करने से घुटने की ताकत और संतुलन तेजी से वापस आएगा। उम्मीद है कि कुछ समय बाद युवक पहले की तरह सामान्य रूप से चल-फिर और खेलकूद में हिस्सा ले सकेगा।

