Tuesday, June 23, 2026

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135 स्टार्टअप्स, 4900 करोड़ का दांव और 41,300 करोड़ की छलांग! संजीव बिखचंदानी की निवेश रणनीति ने कैसे बदली किस्मत?

By Malay Ojha | Published: 23 June 2026 at 06:37 PM

देश में जब ज्यादातर कंपनियां सिर्फ ग्राहक बढ़ाने और विज्ञापन पर फोकस कर रही थीं, तब इन्फो एज के संस्थापक संजीव बिखचंदानी ने भविष्य के स्टार्टअप्स पर बड़ा दांव लगाया। साल 2007 से अब तक उन्होंने करीब 135 स्टार्टअप्स में लगभग 4900 करोड़ रुपये लगाए, जिनकी वैल्यू आज बढ़कर करीब 41,300 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। यानी करीब 8.4 गुना का जबरदस्त रिटर्न।

इन्फो एज ने शुरुआती दौर में ही उन कंपनियों को चुना, जो आगे चलकर लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन सकें। इनमें खाने-पीने से लेकर बीमा और टेक्नोलॉजी तक कई सेक्टर शामिल हैं। खास बात यह है कि कंपनी ने लगभग 45 कंज्यूमर टेक कंपनियों में करीब 2755 करोड़ रुपये लगाए, जो आज बढ़कर 37214 करोड़ रुपये से ज्यादा हो चुके हैं।

बिजनेस का नया मॉडल कैसे बना गेमचेंजर
संजीव बिखचंदानी की रणनीति सिर्फ मुनाफा कमाने पर नहीं, बल्कि ऐसे स्टार्टअप्स को चुनने पर रही जो बड़े बदलाव ला सकें। इसी सोच के चलते कुछ छोटी कंपनियां आज अरबों की वैल्यू वाली बड़ी कंपनियों में बदल गईं।

जोमैटो और पॉलिसी बाजार की कहानी
जिस समय जोमैटो और पॉलिसी बाजार जैसी कंपनियां बेहद शुरुआती चरण में थीं, तब उन पर बहुत कम लोग भरोसा कर रहे थे। लेकिन इन्फो एज ने शुरुआती निवेश किया और आज ये दोनों कंपनियां अपने-अपने सेक्टर में बड़ी पहचान बन चुकी हैं।

लोगों की जिंदगी पर सीधा असर
आज खाने का ऑर्डर करना हो या बीमा खरीदना, इन कंपनियों ने पूरी प्रक्रिया को आसान बना दिया है। यह बदलाव सिर्फ तकनीक का नहीं, बल्कि सही समय पर सही निवेश का नतीजा है।

AI और डीप टेक पर बड़ा फोकस
साल 2020 के बाद इन्फो एज ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीप टेक स्टार्टअप्स में तेजी से निवेश बढ़ाया। कंपनी ने 54 से ज्यादा ऐसी कंपनियों में 1000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है।

नई कंपनियों को मिल रही वैश्विक पहचान
इनमें से कई स्टार्टअप्स को अंतरराष्ट्रीय निवेशकों से भी फंडिंग मिल चुकी है, जो यह दिखाता है कि भारतीय तकनीकी क्षमता अब वैश्विक स्तर पर पहचान बना रही है।

डीप टेक और सरकारी सपोर्ट
डीप टेक सेक्टर में कई स्टार्टअप्स को सरकारी योजनाओं से भी मदद मिल रही है। वॉइस टेक्नोलॉजी से जुड़ी एक कंपनी को भारी कंप्यूट सपोर्ट मिला है, जबकि स्पेस और रोबोटिक्स से जुड़े स्टार्टअप्स को भी करोड़ों रुपये का प्रोत्साहन दिया गया है।

भारत में बन रही है नई टेक क्रांति
इस सेक्टर में शुरुआती निवेश अभी जोखिम भरा है, लेकिन इसके नतीजे आने वाले समय में बड़े बदलाव ला सकते हैं।

मजबूत बिजनेस मॉडल की असली ताकत
इन्फो एज का सबसे बड़ा फायदा उसका मजबूत कैश फ्लो है, जो उसे लगातार निवेश करने की ताकत देता है। इससे कंपनी को बाहर से बार-बार फंड जुटाने की जरूरत नहीं पड़ती।

लंबी सोच, बड़ा फायदा
कंपनी का फोकस शॉर्ट टर्म मुनाफे की जगह लॉन्ग टर्म ग्रोथ पर है। यही वजह है कि उसका निवेश पोर्टफोलियो लगातार मजबूत होता जा रहा है।

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135 स्टार्टअप्स, 4900 करोड़ का दांव और 41,300 करोड़ की छलांग! संजीव बिखचंदानी की निवेश रणनीति ने कैसे बदली किस्मत?

By Malay Ojha | Published: 23 June 2026 at 06:37 PM

देश में जब ज्यादातर कंपनियां सिर्फ ग्राहक बढ़ाने और विज्ञापन पर फोकस कर रही थीं, तब इन्फो एज के संस्थापक संजीव बिखचंदानी ने भविष्य के स्टार्टअप्स पर बड़ा दांव लगाया। साल 2007 से अब तक उन्होंने करीब 135 स्टार्टअप्स में लगभग 4900 करोड़ रुपये लगाए, जिनकी वैल्यू आज बढ़कर करीब 41,300 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। यानी करीब 8.4 गुना का जबरदस्त रिटर्न।

इन्फो एज ने शुरुआती दौर में ही उन कंपनियों को चुना, जो आगे चलकर लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन सकें। इनमें खाने-पीने से लेकर बीमा और टेक्नोलॉजी तक कई सेक्टर शामिल हैं। खास बात यह है कि कंपनी ने लगभग 45 कंज्यूमर टेक कंपनियों में करीब 2755 करोड़ रुपये लगाए, जो आज बढ़कर 37214 करोड़ रुपये से ज्यादा हो चुके हैं।

बिजनेस का नया मॉडल कैसे बना गेमचेंजर
संजीव बिखचंदानी की रणनीति सिर्फ मुनाफा कमाने पर नहीं, बल्कि ऐसे स्टार्टअप्स को चुनने पर रही जो बड़े बदलाव ला सकें। इसी सोच के चलते कुछ छोटी कंपनियां आज अरबों की वैल्यू वाली बड़ी कंपनियों में बदल गईं।

जोमैटो और पॉलिसी बाजार की कहानी
जिस समय जोमैटो और पॉलिसी बाजार जैसी कंपनियां बेहद शुरुआती चरण में थीं, तब उन पर बहुत कम लोग भरोसा कर रहे थे। लेकिन इन्फो एज ने शुरुआती निवेश किया और आज ये दोनों कंपनियां अपने-अपने सेक्टर में बड़ी पहचान बन चुकी हैं।

लोगों की जिंदगी पर सीधा असर
आज खाने का ऑर्डर करना हो या बीमा खरीदना, इन कंपनियों ने पूरी प्रक्रिया को आसान बना दिया है। यह बदलाव सिर्फ तकनीक का नहीं, बल्कि सही समय पर सही निवेश का नतीजा है।

AI और डीप टेक पर बड़ा फोकस
साल 2020 के बाद इन्फो एज ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीप टेक स्टार्टअप्स में तेजी से निवेश बढ़ाया। कंपनी ने 54 से ज्यादा ऐसी कंपनियों में 1000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है।

नई कंपनियों को मिल रही वैश्विक पहचान
इनमें से कई स्टार्टअप्स को अंतरराष्ट्रीय निवेशकों से भी फंडिंग मिल चुकी है, जो यह दिखाता है कि भारतीय तकनीकी क्षमता अब वैश्विक स्तर पर पहचान बना रही है।

डीप टेक और सरकारी सपोर्ट
डीप टेक सेक्टर में कई स्टार्टअप्स को सरकारी योजनाओं से भी मदद मिल रही है। वॉइस टेक्नोलॉजी से जुड़ी एक कंपनी को भारी कंप्यूट सपोर्ट मिला है, जबकि स्पेस और रोबोटिक्स से जुड़े स्टार्टअप्स को भी करोड़ों रुपये का प्रोत्साहन दिया गया है।

भारत में बन रही है नई टेक क्रांति
इस सेक्टर में शुरुआती निवेश अभी जोखिम भरा है, लेकिन इसके नतीजे आने वाले समय में बड़े बदलाव ला सकते हैं।

मजबूत बिजनेस मॉडल की असली ताकत
इन्फो एज का सबसे बड़ा फायदा उसका मजबूत कैश फ्लो है, जो उसे लगातार निवेश करने की ताकत देता है। इससे कंपनी को बाहर से बार-बार फंड जुटाने की जरूरत नहीं पड़ती।

लंबी सोच, बड़ा फायदा
कंपनी का फोकस शॉर्ट टर्म मुनाफे की जगह लॉन्ग टर्म ग्रोथ पर है। यही वजह है कि उसका निवेश पोर्टफोलियो लगातार मजबूत होता जा रहा है।

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