By Malay Ojha | Published: 28 June 2026 at 05:19 PM
भरत भूषण तिवारी के एनकाउंटर को लेकर अब बिहार के पूर्व पुलिस महानिदेशक अभयानंद ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने पूरे घटनाक्रम पर हैरानी जताते हुए पूछा है कि जब पुलिस सिर्फ एक आरोपी को पकड़ने गई थी, तब मौके पर उपसमाहर्ता (एसडीएम) की मौजूदगी क्यों थी। उनका कहना है कि इस तरह की कार्रवाई पूरी तरह अपराध नियंत्रण से जुड़ी होती है और इसमें किसी मजिस्ट्रेट की भूमिका सामान्य तौर पर नहीं होती।
अभयानंद का यह बयान ऐसे समय आया है जब भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर पहले से ही कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। पूर्व डीजीपी ने कहा कि पुलिस की कार्रवाई दो तरह की परिस्थितियों में होती है। पहली स्थिति तब होती है जब किसी इलाके में भीड़ जुटी हो, कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका हो या तनावपूर्ण माहौल हो। ऐसे मामलों में पुलिस के साथ मजिस्ट्रेट की तैनाती की जाती है।
‘यह भीड़ नियंत्रण का मामला नहीं था’
उन्होंने साफ कहा कि भरत तिवारी के मामले में ऐसी कोई स्थिति नहीं थी। पुलिस एक व्यक्ति को पकड़ने के लिए गई थी और यह पूरी तरह अपराध से जुड़ा मामला था। इसलिए मौके पर एसडीएम की मौजूदगी कई सवाल पैदा करती है।
अभयानंद ने कहा कि जिलाधिकारी का हस्तक्षेप प्रशासनिक स्तर तक सीमित होता है, लेकिन किसी अपराधी को पकड़ने की कार्रवाई में एसडीएम की प्रत्यक्ष मौजूदगी समझ से परे है। उन्होंने इसे ऐसा मुद्दा बताया जो उनके मन में गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
जानकारी के मुताबिक, 17 जून को बिलौटी गांव में पुलिस टीम छापेमारी करने पहुंची थी। इसी दौरान पुलिस और भरत भूषण तिवारी के बीच मुठभेड़ हो गई। पुलिस का दावा है कि उसकी ओर से पांच राउंड फायरिंग की गई, जबकि भरत तिवारी की तरफ से 10 से 15 राउंड गोलियां चलाई गईं।
हालांकि इस पूरी मुठभेड़ में पुलिस का कोई भी जवान घायल नहीं हुआ। इसी वजह से घटना को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
घायल होने के बाद पीएमसीएच में हुई मौत
मुठभेड़ में गंभीर रूप से घायल भरत भूषण तिवारी को इलाज के लिए पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजा गया था। वहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। मौत के बाद उसी रात दंडाधिकारी की निगरानी में उसका पोस्टमार्टम कराया गया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आए कई अहम तथ्य
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक, भरत तिवारी को कई गोलियां लगी थीं। रिपोर्ट में बताया गया है कि एक गोली दाहिनी जांघ के अंदरूनी हिस्से में लगी, दूसरी दाहिनी जांघ के बाहरी हिस्से में और एक गोली बाएं पैर के पिछले हिस्से में लगी थी।
रिपोर्ट के अनुसार, शरीर में लगी चार गोलियां आर-पार निकल गई थीं, जबकि एक गोली शरीर के अंदर ही मिली। उस गोली को जांच के लिए सुरक्षित रख लिया गया है।
पूर्व डीजीपी अभयानंद के बयान के बाद इस पूरे एनकाउंटर को लेकर नए सिरे से बहस शुरू हो गई है। सवाल उठ रहा है कि अगर यह केवल एक अपराधी को पकड़ने की कार्रवाई थी तो फिर प्रशासनिक अधिकारी की मौजूदगी क्यों जरूरी समझी गई। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी सवाल उठ सकते हैं और जांच की मांग तेज हो सकती है।
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