By Malay Ojha | Published: 01 July 2026 at 04:35 PM
पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने भारतीय जनता पार्टी के समर्थकों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि कालीगंज स्थित पार्टी कार्यालय को निशाना बनाकर अंडे और बैंगन फेंके गए। महुआ मोइत्रा ने यह भी आरोप लगाया कि मौके पर मौजूद पुलिस ने समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब हाल ही में कलकत्ता हाईकोर्ट ने राज्य में बढ़ रही ऐसी घटनाओं को लेकर सख्त रुख अपनाया है।
महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया और फेसबुक लाइव के जरिए पूरी घटना की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कालीगंज स्थित तृणमूल कांग्रेस कार्यालय की तीसरी मंजिल को लगातार निशाना बनाया गया और वहां अंडे तथा बैंगन फेंके गए। उनके मुताबिक यह सब कुछ काफी देर तक चलता रहा, जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं में नाराजगी फैल गई।
पुलिस पर लगाए लापरवाही के आरोप
सांसद ने आरोप लगाया कि सूचना मिलने के बावजूद पुलिस समय पर प्रभावी कार्रवाई नहीं कर सकी। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मी मौके पर मौजूद थे, लेकिन उन्होंने स्थिति को नियंत्रित करने या आरोपियों के खिलाफ तत्काल कदम उठाने की कोशिश नहीं की। महुआ मोइत्रा ने सवाल उठाया कि यदि कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाली एजेंसी ही निष्क्रिय रहेगी तो ऐसी घटनाओं पर कैसे रोक लगेगी।
भाजपा की ओर से अभी नहीं आया जवाब
महुआ मोइत्रा के आरोपों के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, खबर लिखे जाने तक भारतीय जनता पार्टी की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, पुलिस ने भी सार्वजनिक रूप से घटना को लेकर कोई विस्तृत बयान जारी नहीं किया है। ऐसे में पूरे मामले को लेकर कई सवाल बने हुए हैं।
हाईकोर्ट की टिप्पणी के बीच सामने आई घटना
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब हाल ही में कलकत्ता हाईकोर्ट ने राजनीतिक विरोधियों या विभिन्न मामलों के आरोपियों पर अंडे फेंकने की घटनाओं पर कड़ी टिप्पणी की थी। अदालत ने साफ कहा था कि किसी भी व्यक्ति के साथ इस तरह का व्यवहार कानून के दायरे से बाहर है और इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता।
हर मामले में एफआईआर दर्ज करने का निर्देश
मंगलवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तपब्रत चक्रवर्ती और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी चटर्जी की खंडपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि अंडे फेंकने की हर घटना में अनिवार्य रूप से प्राथमिकी दर्ज की जाए। अदालत ने कहा कि ऐसी घटनाओं पर सख्त कार्रवाई जरूरी है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लग सके।
अदालत ने मौलिक अधिकारों पर भी दिया जोर
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति पर आरोप लग जाने से उसके मौलिक अधिकार समाप्त नहीं हो जाते। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति पुलिस हिरासत में है या राज्य की सुरक्षा में है तो उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार और पुलिस की जिम्मेदारी है। कानून के शासन में किसी को भी भीड़ या विरोध के नाम पर निशाना नहीं बनाया जा सकता।
सरकार से मांगा गया जवाब
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 20 जुलाई तक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने पूछा है कि अंडे फेंकने जैसी घटनाओं को रोकने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और ऐसे मामलों में कितनी प्राथमिकी दर्ज हुई हैं। साथ ही भविष्य के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार करने को भी कहा गया है।
सरकार ने अदालत में रखा अपना पक्ष
राज्य सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि सरकार किसी भी व्यक्ति को कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं देती। उन्होंने कहा कि जबरन वसूली और अन्य मामलों के आरोपियों पर अंडे फेंकने की कुछ घटनाओं में पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार भी किया है। सरकार ने भरोसा दिलाया कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
राजनीतिक माहौल फिर गरमाने के आसार
महुआ मोइत्रा के आरोपों और हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि पुलिस इस मामले में क्या कार्रवाई करती है और क्या भाजपा इन आरोपों का आधिकारिक जवाब देती है। आने वाले दिनों में यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तर पर चर्चा का विषय बना रह सकता है।
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