By Malay Ojha | Published: 01 July 2026 at 07:42 PM
अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जांच आगे बढ़ने के साथ लगातार नए खुलासे हो रहे हैं। अब इस मामले में सबसे बड़ा सबूत एक ऐसा संदूक माना जा रहा है, जिस पर ‘राम राज्य कोष’ लिखा मिला है। इसी के साथ लाखों रुपये, विदेशी मुद्रा और सोने के आभूषण बरामद होने का दावा किया गया है। दूसरी ओर, इस पूरे मामले में मंदिर ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल तेज हो गए हैं और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग उठने लगी है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला के किराए के कमरे से एक बंद संदूक मिला है, जिस पर ‘राम राज्य कोष’ लिखा हुआ था। इस संदूक पर ऑनलाइन दान लेने के लिए भुगतान का बार कोड भी लगा मिला। शुरुआती जांच में इसे पूरे मामले का अहम सबूत माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि इसी कमरे से चोरी की गई दानराशि का बड़ा हिस्सा बरामद हुआ है।
आरोपियों के पास से करोड़ों के करीब नकदी और कीमती सामान
जांच में सामने आया है कि आठ आरोपियों में से सात के पास से बड़ी मात्रा में नकदी और अन्य कीमती सामान बरामद किया गया है। अविनाश शुक्ला के पास से करीब 20 लाख 39 हजार रुपये, एक हजार से अधिक विदेशी डॉलर, सोने की चेन और अंगूठी मिलने की बात सामने आई है। पुलिस ने उसके प्रतापगढ़ स्थित घर पर भी तलाशी ली थी।
दूसरे आरोपियों से भी बड़ी रकम बरामद
जांच में लवकुश मिश्रा के पास से 14 लाख 25 हजार रुपये, करुणेश पांडे के पास से 18 लाख 7 हजार 63 रुपये, टिन्नू यादव से एक लाख रुपये, रामशंकर मिश्रा से 7 लाख 32 हजार 170 रुपये, अनुकल्प मिश्रा से 16 लाख 82 हजार 40 रुपये और मनीष कुमार यादव से 2 लाख रुपये बरामद होने की जानकारी सामने आई है। बरामदगी का यह ब्योरा जांच को और गंभीर बना रहा है।
अब ट्रस्ट पदाधिकारियों पर भी उठ रहे सवाल
मामले में अब सिर्फ आरोपियों की गिरफ्तारी ही चर्चा का विषय नहीं है, बल्कि मंदिर ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों की भूमिका को लेकर भी बहस तेज हो गई है। जानकारी के मुताबिक, बड़ी संख्या में वकील जन्मभूमि थाने पहुंचकर ट्रस्ट के कुछ जिम्मेदार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग कर सकते हैं। वकीलों का कहना है कि दान व्यवस्था में इतनी बड़ी गड़बड़ी आखिर कैसे हुई, इसकी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।
कोषाध्यक्ष से होगी अहम पूछताछ
जांच एजेंसियां ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी से भी पूछताछ की तैयारी में हैं। पूछताछ के दौरान दानराशि के प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था, वित्तीय निगरानी और पूरी प्रक्रिया को लेकर कई सवाल पूछे जा सकते हैं। जांच का उद्देश्य यह समझना है कि इतनी बड़ी कथित चोरी के बावजूद निगरानी व्यवस्था में चूक कैसे हुई।
इन सवालों के जवाब तलाश रही जांच
जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि दानपात्रों की सुरक्षा व्यवस्था कितनी मजबूत थी और कथित गड़बड़ी समय रहते क्यों नहीं पकड़ी जा सकी। इसके अलावा यह भी पूछा जा सकता है कि विवाद सामने आने के बाद विस्तृत जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की गई, प्राथमिकी दर्ज करने में देरी क्यों हुई और अब तक कुल दान, कथित नुकसान तथा बरामद रकम का पूरा विवरण सार्वजनिक क्यों नहीं रखा गया।
ऑडिट और निगरानी व्यवस्था भी जांच के दायरे में
जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश करेंगी कि क्या पहले किसी ऑडिट में वित्तीय गड़बड़ी के संकेत मिले थे। यदि ऐसा हुआ था तो उस समय क्या कार्रवाई की गई। साथ ही दान गिनने वाले कर्मचारियों की निगरानी, बोर्ड को जानकारी देने की प्रक्रिया और मीडिया के सामने पूरी स्थिति स्पष्ट करने में देरी जैसे मुद्दे भी जांच का हिस्सा बन सकते हैं।
कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी क्या होती है?
किसी भी धार्मिक ट्रस्ट में कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। उनके जिम्मे दानराशि का सुरक्षित रखरखाव, बैंक खातों की निगरानी, आय-व्यय का रिकॉर्ड, नियमित ऑडिट, निर्माण कार्यों के लिए वित्तीय मंजूरी, कर्मचारियों की निगरानी और किसी भी वित्तीय अनियमितता की जानकारी मिलते ही तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करना शामिल होता है। यही कारण है कि इस मामले में उनकी भूमिका को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं।
जांच से सामने आ सकते हैं और बड़े खुलासे
फिलहाल पुलिस और जांच एजेंसियां पूरे मामले की अलग-अलग पहलुओं से जांच कर रही हैं। बरामद नकदी, विदेशी मुद्रा और सोने के आभूषणों के बाद यह मामला और गंभीर हो गया है। आने वाले दिनों में पूछताछ और जांच रिपोर्ट के आधार पर इस प्रकरण में कई और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
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