By aryavartalive | Published: 07 July 2026 at 09:54 AM
भाजपा का गढ़ माना जाने वाला बांकीपुर विधानसभा का लंबे समय तक नवीन सिन्हा ने प्रतिनिधित्व किया। उसके बाद उनके पुत्र नितिन नवीन 2006 से बांकीपुर का नेतृत्व करते रहे, किंतु उनके राज्यसभा सदस्य बनने के बाद अब इस सीट पर आगामी 30 जुलाई को उपचुनाव होने जा रहा है, जिसमें सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) ने नवीन कुमार तिवारी को मैदान में उतारकर चुनाव को दिलचस्प बना दिया है।
‘नवीन’ नाम को लेकर हो रही चर्चा
कुछ लोगों का कहना है कि यहां से “नवीन” नाम के व्यक्ति ही विजयी होते रहे हैं। नवीन सिन्हा के बाद नितिन नवीन, और अब नवीन कुमार तिवारी की बारी है।
ऑटो चलाने वाले ‘युवा ग्रेजुएट कॉकरोच’ बने उम्मीदवार
विदित हो कि नवीन कुमार तिवारी स्थानीय लोगों के बीच “युवा ग्रेजुएट कॉकरोच” के नाम से जाने जाते हैं। उनके अनुसार बेरोजगारी के इस दौर में ग्रेजुएट होने के बावजूद वे अपना जीवनयापन करने के लिए पटना शहर में ऑटो चलाते हैं। वे ऑटो यूनियन के पदाधिकारी भी हैं। विगत सोमवार को सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) ने बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए उनका नाम अपने अधिकृत प्रत्याशी के तौर पर घोषित किया है।
302 सदस्यों ने किया गोपनीय मतदान
पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष धनंजय कुमार सिन्हा ने बताया कि नवीन कुमार तिवारी का उम्मीदवार के रूप में चयन पार्टी सदस्यों के गोपनीय मतदान एवं पारदर्शी गिनती के माध्यम से किया गया है। उन्होंने बताया कि प्रत्याशी के लिए कुल चार आवेदन आए थे, जिसके लिए कुल 302 पार्टी सदस्यों ने गोपनीय मतदान किया, जिसमें नवीन कुमार तिवारी को 270 वोट मिले। इसलिए उन्हें बांकीपुर उपचुनाव के लिए प्रत्याशी घोषित किया गया।
पार्टी ने बताया आंतरिक लोकतंत्र का उदाहरण
पार्टी उपाध्यक्ष विनय कुमार झा ने कहा कि जो साहस कोई पार्टी नहीं कर सकी, वह जेपी वाली असली सोशलिस्ट पार्टी ने कर दिखाया। उन्होंने कहा कि अन्य पार्टियों की तरह हमारी पार्टी में शीर्ष नेतृत्व द्वारा प्रत्याशी नहीं चुने गए, बल्कि सभी पार्टी सदस्यों ने मिलकर गोपनीय वोटिंग के माध्यम से विधानसभा प्रत्याशी का चयन किया। यह प्रक्रिया पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र की मजबूती के साथ-साथ देश और दुनिया में लोकतंत्र को मजबूत करने के उद्देश्य से अपनाई गई है।
आगे भी इसी प्रक्रिया से चुने जाएंगे उम्मीदवार
उन्होंने कहा कि इसी प्रकार 2029 के लोकसभा चुनाव एवं 2030 के विधानसभा चुनाव के लिए भी उस क्षेत्र के पार्टी सदस्यों के गोपनीय मतदान एवं पारदर्शी गिनती के माध्यम से प्रत्याशियों का चयन किया जाएगा।
नितिन नवीन के राज्यसभा जाने से खाली हुई सीट
बांकीपुर विधानसभा सीट से लगातार पांच बार विधायक रहे नितिन नवीन ने 2025 के विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की थी। बाद में भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी और इसके बाद वे राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए। राज्यसभा सदस्य बनने के कारण उन्हें विधानसभा की सदस्यता छोड़नी पड़ी, जिससे बांकीपुर सीट खाली हो गई। अब 30 जुलाई को इस सीट पर उपचुनाव होना है।
बिहार को दो मुख्यमंत्री देने वाली सीट
बांकीपुर विधानसभा का राजनीतिक इतिहास काफी समृद्ध रहा है। बिहार को दो मुख्यमंत्री देने का गौरव भी इसी सीट को हासिल है। कायस्थ समाज से आने वाले कृष्ण बल्लभ सहाय और महामाया प्रसाद सिन्हा इसी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हुए मुख्यमंत्री बने थे। इसके अलावा ठाकुर प्रसाद और नवीन किशोर सिन्हा जैसे कई बड़े नेता भी इस सीट से विधायक रह चुके हैं। वर्तमान में नितिन नवीन, पूर्व विधायक नवीन किशोर सिन्हा के पुत्र हैं।
पटना पश्चिम से बांकीपुर बनने तक का सफर
आज जिस सीट को बांकीपुर विधानसभा के नाम से जाना जाता है, वह पहले पटना पश्चिम विधानसभा कहलाती थी। वर्ष 2008 में हुए परिसीमन के बाद इस विधानसभा क्षेत्र का नाम बदलकर बांकीपुर कर दिया गया। नाम बदलने के साथ-साथ क्षेत्र की सीमाओं में भी बदलाव हुआ, लेकिन इसकी राजनीतिक अहमियत पहले की तरह बनी रही।
अब तक कितनी बार हुए चुनाव?
आजादी के बाद इस क्षेत्र में कुल 18 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। इनमें से 14 चुनाव पटना वेस्ट विधानसभा के नाम से और 4 चुनाव बांकीपुर विधानसभा के नाम से कराए गए। लंबे राजनीतिक इतिहास वाली यह सीट हमेशा से राज्य की सबसे चर्चित विधानसभा सीटों में शामिल रही है।
1995 से लगातार भाजपा के कब्जे में है बांकीपुर
बांकीपुर क्षेत्र में भाजपा का मजबूत जनाधार 1995 से लगातार बना हुआ है। 1995, 2000, 2005 (फरवरी) और 2005 (अक्टूबर) के विधानसभा चुनावों में भाजपा उम्मीदवार नवीन किशोर सिन्हा ने लगातार जीत दर्ज की। वर्ष 2006 में उनके निधन के बाद पार्टी ने उनके पुत्र नितिन नवीन को उम्मीदवार बनाया। इसके बाद से नितिन नवीन लगातार इस सीट का प्रतिनिधित्व करते रहे और 2025 तक पांच बार विधायक चुने गए। अब उनके राज्यसभा जाने के बाद पहली बार इस सीट पर उपचुनाव हो रहा है, जिस पर पूरे बिहार की नजर टिकी हुई है।
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