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महिला पत्रकार से यौन उत्पीड़न मामले में ट्रंप को बड़ा झटका, अदालत ने 50 लाख डॉलर मुआवजा देने का आदेश दिया

By Malay Ojha | Published: 09 July 2026 at 09:18 AM

महिला पत्रकार ई. जीन कैरोल के यौन उत्पीड़न मामले में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा कानूनी झटका लगा है। अमेरिकी अदालत ने कैरोल को 50 लाख डॉलर (करीब 43 करोड़ रुपये) की मुआवजा राशि जारी करने का आदेश दे दिया है। सर्वोच्च अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद अब ट्रंप की ओर से जमा कराई गई रकम कैरोल को दी जाएगी और उस पर ब्याज का भी भुगतान करना होगा। अदालत ने कहा है कि ट्रंप की ओर से पहले से जमा कराई गई रकम अब कैरोल को दी जाए। इसके साथ ही इस राशि पर बनने वाला ब्याज भी चुकाना होगा। हाल ही में सर्वोच्च अदालत ने भी ट्रंप की अपील पर सुनवाई से इनकार कर दिया था, जिसके बाद यह फैसला प्रभावी हो गया।

अदालत के ताजा आदेश के बाद अब मुआवजे की रकम कैरोल को मिलने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। ट्रंप ने इस फैसले को चुनौती देते हुए सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन वहां से राहत नहीं मिली। इसके बाद निचली अदालत ने पहले से जमा 50 लाख डॉलर की राशि जारी करने का निर्देश दे दिया। अदालत ने अपने आदेश में साफ किया है कि केवल मूल राशि ही नहीं, बल्कि उस पर लागू होने वाला ब्याज भी कैरोल को दिया जाएगा। हालांकि आदेश में ब्याज की अंतिम रकम का उल्लेख नहीं किया गया है। माना जा रहा है कि ब्याज जोड़ने के बाद ट्रंप पर कुल भुगतान का बोझ और बढ़ सकता है।

क्या था पूरा मामला?
यह मामला कई वर्षों पुराना है। लेखिका और पूर्व पत्रकार ई. जीन कैरोल ने आरोप लगाया था कि वर्ष 1996 में न्यूयॉर्क के एक बड़े स्टोर के ड्रेसिंग रूम में ट्रंप ने उनके साथ यौन उत्पीड़न किया था। कई साल बाद उन्होंने अपनी पुस्तक में इस घटना का विस्तार से जिक्र किया। पुस्तक प्रकाशित होने के बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया।

ट्रंप ने लगातार नकारे आरोप
कैरोल के आरोप सामने आने के बाद ट्रंप ने शुरू से ही इन्हें झूठा बताया। उनका कहना था कि यह कहानी पूरी तरह मनगढ़ंत है और उनकी छवि खराब करने के उद्देश्य से गढ़ी गई है। इसी बयान को लेकर बाद में मानहानि का मामला भी अदालत पहुंचा।

जूरी ने ट्रंप को ठहराया जिम्मेदार
मई 2023 में सिविल जूरी ने अपने फैसले में माना कि ट्रंप यौन उत्पीड़न और बाद में दिए गए मानहानिकारक बयानों के लिए जिम्मेदार हैं। इसके आधार पर अदालत ने 20 लाख डॉलर यौन उत्पीड़न और 30 लाख डॉलर मानहानि के लिए देने का आदेश दिया था। कुल मिलाकर ट्रंप को 50 लाख डॉलर का मुआवजा भरने के लिए कहा गया।

एक और बड़े मुआवजे का मामला भी लंबित
ट्रंप और कैरोल के बीच कानूनी लड़ाई केवल इसी मामले तक सीमित नहीं है। एक अलग मानहानि मामले में न्यूयॉर्क की अदालत पहले ही ट्रंप को 8.33 करोड़ डॉलर का भुगतान करने का आदेश दे चुकी है। उस फैसले के खिलाफ अपील की गई थी, लेकिन आदेश बरकरार रखा गया। फिलहाल उस पर अंतिम अमल रुका हुआ है।

कैरोल भी जांच के दायरे में
इधर हाल के दिनों में अमेरिकी मीडिया में ऐसी रिपोर्टें भी सामने आई हैं कि कैरोल के कुछ बयानों की जांच की जा रही है। बताया गया कि अभियोजन पक्ष यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि क्या ट्रंप से जुड़े मामलों में उन्होंने शपथ के दौरान कोई गलत जानकारी दी थी।

हालांकि अभी तक इस जांच में किसी तरह का आरोप तय नहीं किया गया है और न ही किसी आधिकारिक एजेंसी ने यह कहा है कि कैरोल के खिलाफ कोई अपराध साबित हुआ है। इसलिए जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं माना जा रहा।

राजनीतिक और कानूनी असर
यह मामला केवल एक कानूनी विवाद नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर अमेरिकी राजनीति पर भी लगातार दिखाई दे रहा है। राष्ट्रपति रहते हुए और उसके बाद भी ट्रंप कई कानूनी चुनौतियों का सामना कर चुके हैं। ऐसे में अदालत का यह नया आदेश उनके लिए एक और बड़ा झटका माना जा रहा है। दूसरी ओर, कैरोल के लिए यह फैसला लंबे समय से चल रही कानूनी लड़ाई में अहम जीत के रूप में देखा जा रहा है।

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महिला पत्रकार से यौन उत्पीड़न मामले में ट्रंप को बड़ा झटका, अदालत ने 50 लाख डॉलर मुआवजा देने का आदेश दिया

By Malay Ojha | Published: 09 July 2026 at 09:18 AM

महिला पत्रकार ई. जीन कैरोल के यौन उत्पीड़न मामले में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा कानूनी झटका लगा है। अमेरिकी अदालत ने कैरोल को 50 लाख डॉलर (करीब 43 करोड़ रुपये) की मुआवजा राशि जारी करने का आदेश दे दिया है। सर्वोच्च अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद अब ट्रंप की ओर से जमा कराई गई रकम कैरोल को दी जाएगी और उस पर ब्याज का भी भुगतान करना होगा। अदालत ने कहा है कि ट्रंप की ओर से पहले से जमा कराई गई रकम अब कैरोल को दी जाए। इसके साथ ही इस राशि पर बनने वाला ब्याज भी चुकाना होगा। हाल ही में सर्वोच्च अदालत ने भी ट्रंप की अपील पर सुनवाई से इनकार कर दिया था, जिसके बाद यह फैसला प्रभावी हो गया।

अदालत के ताजा आदेश के बाद अब मुआवजे की रकम कैरोल को मिलने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। ट्रंप ने इस फैसले को चुनौती देते हुए सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन वहां से राहत नहीं मिली। इसके बाद निचली अदालत ने पहले से जमा 50 लाख डॉलर की राशि जारी करने का निर्देश दे दिया। अदालत ने अपने आदेश में साफ किया है कि केवल मूल राशि ही नहीं, बल्कि उस पर लागू होने वाला ब्याज भी कैरोल को दिया जाएगा। हालांकि आदेश में ब्याज की अंतिम रकम का उल्लेख नहीं किया गया है। माना जा रहा है कि ब्याज जोड़ने के बाद ट्रंप पर कुल भुगतान का बोझ और बढ़ सकता है।

क्या था पूरा मामला?
यह मामला कई वर्षों पुराना है। लेखिका और पूर्व पत्रकार ई. जीन कैरोल ने आरोप लगाया था कि वर्ष 1996 में न्यूयॉर्क के एक बड़े स्टोर के ड्रेसिंग रूम में ट्रंप ने उनके साथ यौन उत्पीड़न किया था। कई साल बाद उन्होंने अपनी पुस्तक में इस घटना का विस्तार से जिक्र किया। पुस्तक प्रकाशित होने के बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया।

ट्रंप ने लगातार नकारे आरोप
कैरोल के आरोप सामने आने के बाद ट्रंप ने शुरू से ही इन्हें झूठा बताया। उनका कहना था कि यह कहानी पूरी तरह मनगढ़ंत है और उनकी छवि खराब करने के उद्देश्य से गढ़ी गई है। इसी बयान को लेकर बाद में मानहानि का मामला भी अदालत पहुंचा।

जूरी ने ट्रंप को ठहराया जिम्मेदार
मई 2023 में सिविल जूरी ने अपने फैसले में माना कि ट्रंप यौन उत्पीड़न और बाद में दिए गए मानहानिकारक बयानों के लिए जिम्मेदार हैं। इसके आधार पर अदालत ने 20 लाख डॉलर यौन उत्पीड़न और 30 लाख डॉलर मानहानि के लिए देने का आदेश दिया था। कुल मिलाकर ट्रंप को 50 लाख डॉलर का मुआवजा भरने के लिए कहा गया।

एक और बड़े मुआवजे का मामला भी लंबित
ट्रंप और कैरोल के बीच कानूनी लड़ाई केवल इसी मामले तक सीमित नहीं है। एक अलग मानहानि मामले में न्यूयॉर्क की अदालत पहले ही ट्रंप को 8.33 करोड़ डॉलर का भुगतान करने का आदेश दे चुकी है। उस फैसले के खिलाफ अपील की गई थी, लेकिन आदेश बरकरार रखा गया। फिलहाल उस पर अंतिम अमल रुका हुआ है।

कैरोल भी जांच के दायरे में
इधर हाल के दिनों में अमेरिकी मीडिया में ऐसी रिपोर्टें भी सामने आई हैं कि कैरोल के कुछ बयानों की जांच की जा रही है। बताया गया कि अभियोजन पक्ष यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि क्या ट्रंप से जुड़े मामलों में उन्होंने शपथ के दौरान कोई गलत जानकारी दी थी।

हालांकि अभी तक इस जांच में किसी तरह का आरोप तय नहीं किया गया है और न ही किसी आधिकारिक एजेंसी ने यह कहा है कि कैरोल के खिलाफ कोई अपराध साबित हुआ है। इसलिए जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं माना जा रहा।

राजनीतिक और कानूनी असर
यह मामला केवल एक कानूनी विवाद नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर अमेरिकी राजनीति पर भी लगातार दिखाई दे रहा है। राष्ट्रपति रहते हुए और उसके बाद भी ट्रंप कई कानूनी चुनौतियों का सामना कर चुके हैं। ऐसे में अदालत का यह नया आदेश उनके लिए एक और बड़ा झटका माना जा रहा है। दूसरी ओर, कैरोल के लिए यह फैसला लंबे समय से चल रही कानूनी लड़ाई में अहम जीत के रूप में देखा जा रहा है।

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