By Malay Ojha | Published: 09 July 2026 at 09:37 PM
बिहार में सोलर ऊर्जा को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है। राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का दायरा बढ़ाकर करीब 10 लाख उपभोक्ताओं तक पहुंचाने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया है। इसके साथ ही राज्य में करीब 1.35 लाख करोड़ रुपये की लागत वाली हरित ऊर्जा परियोजनाओं को तेज रफ्तार से आगे बढ़ाने का रोडमैप तैयार किया गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी की मौजूदगी में हुई उच्चस्तरीय बैठक में योजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन पर जोर दिया गया।
एक अणे मार्ग स्थित संकल्प भवन में आयोजित समीक्षा बैठक में प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम), फ्लोटिंग सोलर, बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली, ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं की विस्तार से समीक्षा की गई। बैठक में बताया गया कि राज्य सरकार ने केंद्र के समक्ष सूर्य घर योजना का दायरा बढ़ाकर लगभग 10 लाख उपभोक्ताओं तक ले जाने का प्रस्ताव रखा है।
बिना अग्रिम खर्च मिलेगा रूफटॉप सोलर
बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि यूटिलिटी आधारित एग्रीगेशन मॉडल के तहत फिलहाल ढाई लाख कुटीर ज्योति उपभोक्ताओं के लिए रूफटॉप सोलर लगाने की मंजूरी मिल चुकी है। इस योजना के तहत सेवा प्रदाता मॉडल अपनाया जाएगा, जिससे उपभोक्ताओं को शुरुआती निवेश किए बिना ही अपने घरों की छत पर सोलर संयंत्र लगाने की सुविधा मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने युद्धस्तर पर काम करने के दिए निर्देश
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी नवीकरणीय ऊर्जा योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक समय पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर नियमित निगरानी, बैंकों के साथ बेहतर समन्वय और व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए ताकि पात्र परिवार योजनाओं का लाभ लेने से वंचित न रहें।
गांवों में महिलाओं की भूमिका बढ़ाने की तैयारी
मुख्यमंत्री ने ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए “सोलर दीदी” जैसी पहल शुरू करने का सुझाव दिया। उनका कहना था कि यदि महिलाओं को प्रशिक्षण देकर सोलर अभियान से जोड़ा जाए तो गांवों में लोगों के बीच जागरूकता बढ़ेगी और रूफटॉप सोलर अपनाने की रफ्तार भी तेज होगी।
केंद्र ने तेज काम पर दिया बड़ा भरोसा
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बिहार के यूटिलिटी आधारित मॉडल की सराहना करते हुए कहा कि यदि पहले चरण में ढाई लाख उपभोक्ताओं के बीच योजना का काम संतोषजनक गति से पूरा होता है तो अतिरिक्त ढाई लाख उपभोक्ताओं के लिए भी मंजूरी देने पर सकारात्मक विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के पास योजनाओं के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं और जो राज्य तेजी से काम करेंगे उन्हें प्राथमिकता मिलेगी।
हरित ऊर्जा परियोजनाओं में 1.35 लाख करोड़ रुपये का निवेश
बैठक में बताया गया कि बिहार में लगभग 1.35 लाख करोड़ रुपये की लागत वाली विभिन्न हरित ऊर्जा परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इन परियोजनाओं के पूरा होने से बिजली उत्पादन बढ़ेगा, स्वच्छ ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ेगा और राज्य की ऊर्जा व्यवस्था पहले से अधिक मजबूत होगी।
कृषि क्षेत्र में भी मिलेगा बड़ा फायदा
प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान योजना की समीक्षा के दौरान कृषि फीडरों के सोलरीकरण पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों का कहना था कि इससे खेती के लिए स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध होगी, किसानों की लागत कम होगी और बिजली सब्सिडी का बोझ भी धीरे-धीरे घटेगा। भविष्य में उद्योगों को भी प्रतिस्पर्धी दरों पर बिजली उपलब्ध कराने में यह योजना मददगार साबित हो सकती है।
फ्लोटिंग सोलर और बैटरी परियोजनाओं पर भी रहेगा फोकस
केंद्रीय मंत्री ने बिहार को फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं, बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली, लघु जल विद्युत परियोजनाओं और ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर जैसे उभरते क्षेत्रों में भी तेजी से काम करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए समय पर प्रस्ताव तैयार करना और परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाना जरूरी है।
केंद्र ने हरसंभव सहयोग का दिया भरोसा
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव संतोष कुमार सारंगी ने कहा कि बिहार में हरित ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ी संभावनाएं हैं। केंद्र सरकार राज्य को तकनीकी, नीतिगत और वित्तीय सहयोग देने के लिए पूरी तरह तैयार है। मंत्रालय और बिहार सरकार मिलकर सभी परियोजनाओं को तय समय में पूरा कराने की दिशा में लगातार काम कर रहे हैं।
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