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बुद्धिजीवियों एवं समाजसेवियों से धनंजय ने किया अपील – अविलम्ब तुड़वाएं सोनम वांगचुक का अनशन

By aryavartalive | Published: 13 July 2026 at 07:33 AM

सोशलिस्ट नेता धनंजय कुमार सिन्हा ने समाजसेवी सोनम वांगचुक की लगातार बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए देशभर के बुद्धिजीवियों और समाजसेवियों से उनका अनशन तत्काल तुड़वाने की अपील की है। उन्होंने इस संबंध में एक खुला पत्र जारी किया है। उन्होंने बताया कि मेडिकल जांच के दौरान सोनम वांगचुक बेहद कमजोर और लगभग बेसुध दिखाई दिए, जिससे उनके स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो गई है।

  1. शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से शिक्षा व्यवस्था नहीं बदलेगी
    धनंजय कुमार सिन्हा ने कहा कि जिन युवाओं की मांग को लेकर सोनम वांगचुक अनशन कर रहे हैं, यदि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा भी दे दें तो इससे देश की शिक्षा व्यवस्था की मूल समस्याएं समाप्त नहीं होंगी।

उन्होंने कहा कि यदि उनकी जगह कोई दूसरा भाजपा नेता भी शिक्षा मंत्री बनता है तो वर्तमान शिक्षा व्यवस्था की कमियां बनी रहेंगी। इन समस्याओं के समाधान के लिए शिक्षा नीति में व्यापक बदलाव जरूरी हैं। उनके अनुसार, केवल शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग करना ऐसा है जैसे “सोने का कंगन बनाने के लिए कौड़ी मांगना।”

  1. जीवन पर जोखिम लेने का अधिकार किसी को नहीं
    अपने पत्र में उन्होंने कहा कि भारतीय दर्शन और मानवतावादी दृष्टिकोण के अनुसार किसी भी व्यक्ति को अपनी जान जोखिम में डालने का अधिकार नहीं है।

उन्होंने कहा कि मानव शरीर प्रकृति की धरोहर है, जिसे सीमित समय के लिए उपयोग हेतु मिला है। इसलिए जीवन और मृत्यु से जुड़े निर्णय प्रकृति के अधिकार क्षेत्र में रहने चाहिए, व्यक्ति के नहीं।

  1. आंदोलन के और भी लोकतांत्रिक रास्ते मौजूद हैं
    उन्होंने कहा कि जिन सामाजिक और शैक्षणिक सुधारों की मांग को लेकर सोनम वांगचुक अनशन कर रहे हैं, उन्हें लोकतांत्रिक और सामाजिक तरीकों से भी हासिल किया जा सकता है। ऐसे में एक बड़े समाजसेवी के जीवन को खतरे में डालना आवश्यक नहीं है।
  2. देश को भविष्य में भी सोनम वांगचुक की जरूरत है
    धनंजय कुमार सिन्हा ने कहा कि सोनम वांगचुक भविष्य में भी समाज और देश के लिए अनेक महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। ऐसी स्थिति में अपेक्षाकृत छोटी मांग के लिए उनके जीवन को जोखिम में डालना उचित नहीं माना जा सकता।
  3. बुद्धिजीवी आगे आएं और अनशन तुड़वाएं
    उन्होंने अपील की कि जो बुद्धिजीवी और समाजसेवी लगातार जंतर-मंतर जाकर सोनम वांगचुक से मिल रहे हैं, वे उनसे आग्रह करें कि अब अनशन समाप्त कर दें।
  4. क्या इस्तीफा, एक जीवन से बड़ा हो सकता है?
    उन्होंने सवाल उठाया कि यदि दुर्भाग्यवश सोनम वांगचुक की जान चली जाए और उसके बाद शिक्षा मंत्री इस्तीफा भी दे दें, तो क्या वह परिणाम उनके जीवन से अधिक महत्वपूर्ण होगा?
  5. बड़ा बदलाव सुनिश्चित हो तभी जोखिम उचित
    धनंजय कुमार सिन्हा ने कहा कि यदि यह निश्चित होता कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से देश की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार आ जाएगा, तब इस तरह का जोखिम किसी हद तक समझा जा सकता था। लेकिन जब ऐसा कोई निश्चित परिणाम दिखाई नहीं देता, तब किसी व्यक्ति के जीवन को खतरे में डालना उचित नहीं है।

उन्होंने पुनः देशभर के बुद्धिजीवियों और समाजसेवियों से आग्रह किया कि वे तत्काल सोनम वांगचुक के अनशन स्थल पर पहुंचकर उनसे अनशन समाप्त करने का अनुरोध करें।

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बुद्धिजीवियों एवं समाजसेवियों से धनंजय ने किया अपील – अविलम्ब तुड़वाएं सोनम वांगचुक का अनशन

By aryavartalive | Published: 13 July 2026 at 07:33 AM

सोशलिस्ट नेता धनंजय कुमार सिन्हा ने समाजसेवी सोनम वांगचुक की लगातार बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए देशभर के बुद्धिजीवियों और समाजसेवियों से उनका अनशन तत्काल तुड़वाने की अपील की है। उन्होंने इस संबंध में एक खुला पत्र जारी किया है। उन्होंने बताया कि मेडिकल जांच के दौरान सोनम वांगचुक बेहद कमजोर और लगभग बेसुध दिखाई दिए, जिससे उनके स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो गई है।

  1. शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से शिक्षा व्यवस्था नहीं बदलेगी
    धनंजय कुमार सिन्हा ने कहा कि जिन युवाओं की मांग को लेकर सोनम वांगचुक अनशन कर रहे हैं, यदि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा भी दे दें तो इससे देश की शिक्षा व्यवस्था की मूल समस्याएं समाप्त नहीं होंगी।

उन्होंने कहा कि यदि उनकी जगह कोई दूसरा भाजपा नेता भी शिक्षा मंत्री बनता है तो वर्तमान शिक्षा व्यवस्था की कमियां बनी रहेंगी। इन समस्याओं के समाधान के लिए शिक्षा नीति में व्यापक बदलाव जरूरी हैं। उनके अनुसार, केवल शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग करना ऐसा है जैसे “सोने का कंगन बनाने के लिए कौड़ी मांगना।”

  1. जीवन पर जोखिम लेने का अधिकार किसी को नहीं
    अपने पत्र में उन्होंने कहा कि भारतीय दर्शन और मानवतावादी दृष्टिकोण के अनुसार किसी भी व्यक्ति को अपनी जान जोखिम में डालने का अधिकार नहीं है।

उन्होंने कहा कि मानव शरीर प्रकृति की धरोहर है, जिसे सीमित समय के लिए उपयोग हेतु मिला है। इसलिए जीवन और मृत्यु से जुड़े निर्णय प्रकृति के अधिकार क्षेत्र में रहने चाहिए, व्यक्ति के नहीं।

  1. आंदोलन के और भी लोकतांत्रिक रास्ते मौजूद हैं
    उन्होंने कहा कि जिन सामाजिक और शैक्षणिक सुधारों की मांग को लेकर सोनम वांगचुक अनशन कर रहे हैं, उन्हें लोकतांत्रिक और सामाजिक तरीकों से भी हासिल किया जा सकता है। ऐसे में एक बड़े समाजसेवी के जीवन को खतरे में डालना आवश्यक नहीं है।
  2. देश को भविष्य में भी सोनम वांगचुक की जरूरत है
    धनंजय कुमार सिन्हा ने कहा कि सोनम वांगचुक भविष्य में भी समाज और देश के लिए अनेक महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। ऐसी स्थिति में अपेक्षाकृत छोटी मांग के लिए उनके जीवन को जोखिम में डालना उचित नहीं माना जा सकता।
  3. बुद्धिजीवी आगे आएं और अनशन तुड़वाएं
    उन्होंने अपील की कि जो बुद्धिजीवी और समाजसेवी लगातार जंतर-मंतर जाकर सोनम वांगचुक से मिल रहे हैं, वे उनसे आग्रह करें कि अब अनशन समाप्त कर दें।
  4. क्या इस्तीफा, एक जीवन से बड़ा हो सकता है?
    उन्होंने सवाल उठाया कि यदि दुर्भाग्यवश सोनम वांगचुक की जान चली जाए और उसके बाद शिक्षा मंत्री इस्तीफा भी दे दें, तो क्या वह परिणाम उनके जीवन से अधिक महत्वपूर्ण होगा?
  5. बड़ा बदलाव सुनिश्चित हो तभी जोखिम उचित
    धनंजय कुमार सिन्हा ने कहा कि यदि यह निश्चित होता कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से देश की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार आ जाएगा, तब इस तरह का जोखिम किसी हद तक समझा जा सकता था। लेकिन जब ऐसा कोई निश्चित परिणाम दिखाई नहीं देता, तब किसी व्यक्ति के जीवन को खतरे में डालना उचित नहीं है।

उन्होंने पुनः देशभर के बुद्धिजीवियों और समाजसेवियों से आग्रह किया कि वे तत्काल सोनम वांगचुक के अनशन स्थल पर पहुंचकर उनसे अनशन समाप्त करने का अनुरोध करें।

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