By Malay Ojha | Published: 15 July 2026 at 11:35 AM
पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा की रणनीति में बड़े बदलाव का दावा सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, संगठन अब केवल हथियार चलाने की ट्रेनिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं को शारीरिक क्षमता बढ़ाने और आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर भी जोर दे रहा है। दावा है कि भारत के मोस्ट वांटेड आतंकियों में शामिल राणा मोहम्मद अशफाक की निगरानी में अलग-अलग प्रशिक्षण शिविर चलाए जा रहे हैं, जहां तैराकी, मार्शल आर्ट और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से जुड़ी जानकारी भी दी जा रही है। हालांकि, इन दावों और वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा की राजनीतिक शाखा पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग के बैनर तले कई शहरों में युवाओं के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन शिविरों का उद्देश्य केवल वैचारिक रूप से प्रभावित करना नहीं, बल्कि युवाओं को शारीरिक रूप से मजबूत और तकनीकी रूप से सक्षम बनाना भी बताया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियां इन गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
तैराकी और शारीरिक प्रशिक्षण पर विशेष जोर
सामने आए वीडियो और तस्वीरों में दावा किया गया है कि राणा मोहम्मद अशफाक स्वयं तैराकी का अभ्यास करता दिखाई देता है। सूत्रों का कहना है कि उसके नेतृत्व में युवाओं को भी तैराकी सिखाई जा रही है। आशंका जताई जा रही है कि इसका उद्देश्य पानी के रास्ते आवाजाही, कठिन परिस्थितियों में बचाव और विशेष अभियानों के लिए युवाओं को तैयार करना हो सकता है।
मार्शल आर्ट से तैयार किए जा रहे युवा
जानकारी के अनुसार, प्रशिक्षण शिविरों में युवाओं को जूडो, कराटे, ताइक्वांडो, कुश्ती और अन्य शारीरिक अभ्यास भी कराए जा रहे हैं। वीडियो में कई युवक मार्शल आर्ट की तकनीकों का अभ्यास करते और कठिन शारीरिक प्रशिक्षण लेते दिखाई देते हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की गतिविधियों का मकसद युवाओं की शारीरिक क्षमता और मानसिक मजबूती बढ़ाना हो सकता है।
अब तकनीक और एआई पर भी फोकस
सूत्रों का दावा है कि आतंकी संगठन अब आधुनिक तकनीक को भी अपनी रणनीति का हिस्सा बना रहे हैं। बताया जा रहा है कि महिलाओं के लिए अलग से कौशल विकास कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, जिनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डिजिटल तकनीक और अन्य आधुनिक उपकरणों की जानकारी दी जा रही है। इन कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी होने का भी दावा किया गया है।
वीडियो में क्या दावा किया गया?
एक वीडियो में राणा मोहम्मद अशफाक कथित तौर पर यह कहते हुए दिखाई देता है कि विरोधी तकनीक के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, इसलिए संगठन से जुड़े लोगों को भी आधुनिक तकनीक सीखने की जरूरत है। हालांकि, इस वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इसके दावों की सत्यता की पुष्टि किसी आधिकारिक एजेंसी ने नहीं की है।
सुरक्षा एजेंसियों की बढ़ी चिंता
सुरक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि यदि इन दावों की पुष्टि होती है तो यह आतंकवादी संगठनों की बदलती कार्यशैली का संकेत हो सकता है। उनका कहना है कि अब केवल पारंपरिक हमलों की तैयारी ही नहीं, बल्कि साइबर गतिविधियों, तकनीकी संसाधनों और सोशल मीडिया के जरिए प्रचार जैसे क्षेत्रों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। यही वजह है कि भारतीय सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर रखे हुए हैं।
युवाओं को जोड़ने की कोशिश का दावा
सूत्रों के अनुसार, इन प्रशिक्षण शिविरों में संगठन के वरिष्ठ सदस्य भी समय-समय पर पहुंचते हैं और युवाओं का मनोबल बढ़ाने का प्रयास करते हैं। दावा है कि उन्हें संगठन से जुड़ने के लिए प्रेरित किया जाता है। सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि भविष्य में ऐसे प्रशिक्षित लोगों का इस्तेमाल घुसपैठ, साइबर हमलों या ऑनलाइन प्रचार गतिविधियों में किया जा सकता है।
स्वतंत्र पुष्टि नहीं, लेकिन एजेंसियां सतर्क
फिलहाल सामने आए वीडियो और दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। किसी आधिकारिक जांच एजेंसी ने भी इन दावों की पुष्टि नहीं की है। इसके बावजूद सुरक्षा एजेंसियां पाकिस्तान में चल रही ऐसी गतिविधियों को संभावित सुरक्षा चुनौती मानते हुए उन पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
पाकिस्तान में आतंकी संगठनों की कथित नई रणनीति यह संकेत देती है कि वे बदलते समय के साथ अपने तौर-तरीकों में बदलाव लाने की कोशिश कर रहे हैं। यदि ये दावे सही साबित होते हैं तो यह केवल पारंपरिक आतंकवाद तक सीमित मामला नहीं रहेगा, बल्कि तकनीक, साइबर गतिविधियों और आधुनिक प्रशिक्षण के नए आयाम भी इससे जुड़ सकते हैं। यही कारण है कि भारतीय सुरक्षा तंत्र इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से देख रहा है।
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