By Malay Ojha | Published: 15 July 2026 at 12:43 PM
रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर पोलैंड की ओर से ऐसा दावा सामने आया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। पोलैंड के उप विदेश मंत्री व्लादिस्लाव टेओफिल बार्टोशेव्स्की ने कहा है कि वर्ष 2022 के आखिर में जब रूस द्वारा यूक्रेन में सामरिक परमाणु हथियार इस्तेमाल किए जाने की आशंका थी, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को ऐसा कदम उठाने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके इस बयान के बाद एक बार फिर प्रधानमंत्री मोदी की वैश्विक कूटनीति चर्चा के केंद्र में आ गई है।
भारत-पोलैंड संयुक्त आर्थिक आयोग की बैठक के बाद नई दिल्ली में आयोजित प्रेस वार्ता में बार्टोशेव्स्की ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दुनिया के उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हैं, जिनकी बात राष्ट्रपति पुतिन गंभीरता से सुनते हैं। उनके मुताबिक, भारत और रूस के दशकों पुराने रणनीतिक रिश्तों की वजह से दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच भरोसे का मजबूत संबंध है।
PM मोदी की सलाह को पुतिन ने दिया महत्व
पोलैंड के उप विदेश मंत्री ने कहा कि वर्ष 2022 के अंतिम महीनों में युद्ध बेहद संवेदनशील दौर में पहुंच गया था। उस समय सामरिक परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की आशंका जताई जा रही थी। ऐसे हालात में प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन से बातचीत कर उन्हें ऐसा कदम उठाने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में युद्ध खत्म कराने की कोशिशों में भी भारत की भूमिका अहम हो सकती है।
फिर चर्चा में आया ‘आज का युग युद्ध का नहीं’
बार्टोशेव्स्की के बयान के बाद सितंबर 2022 की वह मुलाकात फिर सुर्खियों में आ गई, जब उज्बेकिस्तान में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन से कहा था, “आज का युग युद्ध का नहीं है।” उस समय इस संदेश की दुनिया भर में सराहना हुई थी और कई देशों ने इसे शांति की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना था।
भारत ने संतुलित विदेश नीति अपनाई
रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान कई पश्चिमी देशों ने भारत पर रूस से दूरी बनाने का दबाव बनाया, लेकिन भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देते हुए रियायती दरों पर रूसी कच्चे तेल की खरीद जारी रखी। भारत सरकार लगातार कहती रही है कि उसकी विदेश नीति स्वतंत्र है और हर फैसला देश की ऊर्जा सुरक्षा तथा आर्थिक हितों को ध्यान में रखकर लिया जाता है।
पुतिन भी कर चुके हैं भारत की सराहना
हाल के महीनों में राष्ट्रपति पुतिन भी कई मौकों पर भारत और प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका की तारीफ कर चुके हैं। उन्होंने भारत को एक बड़ा और प्रभावशाली देश बताते हुए उसकी स्वतंत्र विदेश नीति की सराहना की थी। विशेषज्ञों का मानना है कि यही भरोसा दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत बनाए हुए है।
ईरान मुद्दे पर भी भारत के रुख की तारीफ
पोलैंड के उप विदेश मंत्री ने केवल रूस-यूक्रेन युद्ध ही नहीं, बल्कि ईरान से जुड़े मुद्दे पर भी भारत के रुख की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत लगातार बातचीत और कूटनीतिक समाधान की वकालत करता रहा है। पोलैंड भी इसी सोच के साथ सभी पक्षों से संवाद बनाए हुए है और तनाव कम करने की दिशा में प्रयास कर रहा है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत को मिला समर्थन
बार्टोशेव्स्की ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की मांग का भी खुलकर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि भारत विश्व की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं और प्रभावशाली देशों में शामिल है। ऐसे में वैश्विक फैसले लेने वाली संस्थाओं में उसे उसकी वास्तविक भूमिका के अनुरूप स्थान मिलना चाहिए।
क्यों अहम माना जा रहा है यह बयान?
रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर किसी यूरोपीय देश के वरिष्ठ मंत्री द्वारा प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका पर इस तरह का सार्वजनिक बयान ऐसे समय आया है, जब दुनिया शांति वार्ता की संभावनाओं पर नजर बनाए हुए है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे भारत की कूटनीतिक विश्वसनीयता और वैश्विक प्रभाव को नई मजबूती मिल सकती है। हालांकि, पोलैंड के मंत्री ने इस दावे के समर्थन में कोई अतिरिक्त आधिकारिक दस्तावेज या विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की।
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