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समय रैना पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, पहले 10 लाख फिर 3 लाख जुर्माना; रणवीर अलाहाबादिया को भी कड़ी चेतावनी

By Malay Ojha | Published: 14 July 2026 at 06:05 PM

‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ विवाद में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान कॉमेडियन समय रैना और पॉडकास्टर रणवीर अलाहाबादिया को लेकर अदालत ने कड़ा रुख अपनाया। अदालत ने कहा कि समय रैना ने पहले दिए गए निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं किया और इस मामले में अदालत को गुमराह करने की कोशिश हुई। शुरुआत में कोर्ट ने 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाने की बात कही, लेकिन बाद में वकील की अपील पर इसे घटाकर 3 लाख रुपये कर दिया। साथ ही अदालत ने साफ चेतावनी दी कि भविष्य में आदेशों की अनदेखी हुई तो इससे कहीं अधिक सख्त कार्रवाई की जा सकती है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि जिन लोगों का समाज में बड़ा प्रभाव होता है, उन्हें अपनी जिम्मेदारी भी उतनी ही गंभीरता से निभानी चाहिए। अदालत की टिप्पणी थी कि सोशल मीडिया और डिजिटल मंचों पर लोकप्रियता हासिल करने वाले लोग युवाओं के लिए उदाहरण बनते हैं। ऐसे में उनकी भाषा और व्यवहार समाज पर असर डालते हैं, इसलिए अदालत के निर्देशों का पालन करना उनकी जिम्मेदारी है।

जुर्माना क्यों लगाया गया?
अदालत ने माना कि पहले दिए गए निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। इसी वजह से समय रैना पर शुरुआत में 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाने की बात कही गई। हालांकि, उनके वकील ने अदालत से अंतिम अवसर देने और नरमी बरतने की अपील की। दलीलों पर विचार करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने जुर्माने की राशि घटाकर 3 लाख रुपये कर दी, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया कि दोबारा ऐसी स्थिति बनने पर 30 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

अदालत ने जिम्मेदारी पर दिया जोर
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मामला केवल जुर्माना लगाने का नहीं है, बल्कि यह समझाने का भी है कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले लोगों की जिम्मेदारी अधिक होती है। अदालत ने कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब किसी समुदाय, वर्ग या व्यक्ति की गरिमा को ठेस पहुंचाने का अधिकार नहीं है।

आखिर क्या है पूरा विवाद?
यह मामला चर्चित यूट्यूब शो ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ से जुड़ा है। शो के दौरान दिव्यांग व्यक्तियों को लेकर की गई कुछ टिप्पणियों पर विवाद खड़ा हो गया था। कई लोगों ने इन टिप्पणियों को असंवेदनशील और अपमानजनक बताया, जिसके बाद अलग-अलग स्तर पर शिकायतें दर्ज कराई गईं। मामला आखिरकार सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां अदालत ने इस तरह की भाषा और प्रस्तुति पर गंभीर चिंता जताई।

पिछली सुनवाई में क्या आदेश दिया गया था?
इससे पहले हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना समेत कुछ अन्य कंटेंट क्रिएटर्स और कॉमेडियंस को दिव्यांग लोगों के बीच जागरूकता कार्यक्रम चलाने और उनके हित में काम करने का निर्देश दिया था। अदालत का मानना था कि जिन लोगों की समाज में बड़ी पहुंच है, वे सकारात्मक बदलाव लाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

याचिकाकर्ता ने क्या कहा?
इस मामले में क्योर एसएमए फाउंडेशन की ओर से याचिका दाखिल की गई थी। फाउंडेशन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने अदालत को बताया कि कुछ कार्यक्रम जरूर किए गए, लेकिन अदालत के निर्देशों के अनुरूप फाउंडेशन से समन्वय नहीं किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि अदालत के आदेशों का पालन पूरी गंभीरता से होना चाहिए था।

अब आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल समय रैना को राहत देते हुए जुर्माने की राशि कम कर दी है, लेकिन साथ ही साफ संदेश दिया है कि भविष्य में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अगली सुनवाई में अदालत यह देखेगी कि उसके निर्देशों का पालन किस हद तक हुआ है। यदि आदेशों की अनदेखी जारी रही तो कड़ी कार्रवाई से इनकार नहीं किया जा सकता।

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समय रैना पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, पहले 10 लाख फिर 3 लाख जुर्माना; रणवीर अलाहाबादिया को भी कड़ी चेतावनी

By Malay Ojha | Published: 14 July 2026 at 06:05 PM

‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ विवाद में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान कॉमेडियन समय रैना और पॉडकास्टर रणवीर अलाहाबादिया को लेकर अदालत ने कड़ा रुख अपनाया। अदालत ने कहा कि समय रैना ने पहले दिए गए निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं किया और इस मामले में अदालत को गुमराह करने की कोशिश हुई। शुरुआत में कोर्ट ने 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाने की बात कही, लेकिन बाद में वकील की अपील पर इसे घटाकर 3 लाख रुपये कर दिया। साथ ही अदालत ने साफ चेतावनी दी कि भविष्य में आदेशों की अनदेखी हुई तो इससे कहीं अधिक सख्त कार्रवाई की जा सकती है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि जिन लोगों का समाज में बड़ा प्रभाव होता है, उन्हें अपनी जिम्मेदारी भी उतनी ही गंभीरता से निभानी चाहिए। अदालत की टिप्पणी थी कि सोशल मीडिया और डिजिटल मंचों पर लोकप्रियता हासिल करने वाले लोग युवाओं के लिए उदाहरण बनते हैं। ऐसे में उनकी भाषा और व्यवहार समाज पर असर डालते हैं, इसलिए अदालत के निर्देशों का पालन करना उनकी जिम्मेदारी है।

जुर्माना क्यों लगाया गया?
अदालत ने माना कि पहले दिए गए निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। इसी वजह से समय रैना पर शुरुआत में 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाने की बात कही गई। हालांकि, उनके वकील ने अदालत से अंतिम अवसर देने और नरमी बरतने की अपील की। दलीलों पर विचार करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने जुर्माने की राशि घटाकर 3 लाख रुपये कर दी, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया कि दोबारा ऐसी स्थिति बनने पर 30 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

अदालत ने जिम्मेदारी पर दिया जोर
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मामला केवल जुर्माना लगाने का नहीं है, बल्कि यह समझाने का भी है कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले लोगों की जिम्मेदारी अधिक होती है। अदालत ने कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी का मतलब किसी समुदाय, वर्ग या व्यक्ति की गरिमा को ठेस पहुंचाने का अधिकार नहीं है।

आखिर क्या है पूरा विवाद?
यह मामला चर्चित यूट्यूब शो ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ से जुड़ा है। शो के दौरान दिव्यांग व्यक्तियों को लेकर की गई कुछ टिप्पणियों पर विवाद खड़ा हो गया था। कई लोगों ने इन टिप्पणियों को असंवेदनशील और अपमानजनक बताया, जिसके बाद अलग-अलग स्तर पर शिकायतें दर्ज कराई गईं। मामला आखिरकार सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां अदालत ने इस तरह की भाषा और प्रस्तुति पर गंभीर चिंता जताई।

पिछली सुनवाई में क्या आदेश दिया गया था?
इससे पहले हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना समेत कुछ अन्य कंटेंट क्रिएटर्स और कॉमेडियंस को दिव्यांग लोगों के बीच जागरूकता कार्यक्रम चलाने और उनके हित में काम करने का निर्देश दिया था। अदालत का मानना था कि जिन लोगों की समाज में बड़ी पहुंच है, वे सकारात्मक बदलाव लाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

याचिकाकर्ता ने क्या कहा?
इस मामले में क्योर एसएमए फाउंडेशन की ओर से याचिका दाखिल की गई थी। फाउंडेशन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने अदालत को बताया कि कुछ कार्यक्रम जरूर किए गए, लेकिन अदालत के निर्देशों के अनुरूप फाउंडेशन से समन्वय नहीं किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि अदालत के आदेशों का पालन पूरी गंभीरता से होना चाहिए था।

अब आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल समय रैना को राहत देते हुए जुर्माने की राशि कम कर दी है, लेकिन साथ ही साफ संदेश दिया है कि भविष्य में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अगली सुनवाई में अदालत यह देखेगी कि उसके निर्देशों का पालन किस हद तक हुआ है। यदि आदेशों की अनदेखी जारी रही तो कड़ी कार्रवाई से इनकार नहीं किया जा सकता।

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